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Udham Singh Nagar News: पंजाबी समाज ने 1959 में जलाई थी रामलीला की लौ, आज भी है रोशन

Thu, 08 Oct 2026 11:46 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर Updated Thu, 08 Oct 2026 11:46 PM IST
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The Punjabi community ignited the flame of Ramlila in 1959; it remains alight to this day.
काशीपुर। दशहरा पर्व को लेकर शहर में श्रीरामा-कृष्णा ड्रामेटिक क्लब की रामलीला की तैयारियां जोरशोर से चल रही हैं। स्थानीय कारोबारी और युवा कलाकार अपनी व्यस्तता के बावजूद दिन-रात रिहर्सल में जुटे हैं। रामलीला मंचन की शुरुआत 8 अक्तूबर से शंकर-रावण संवाद के साथ होगी।
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मुख्य बाजार स्थित पोस्ट ऑफिस के सामने नमक वालों की धर्मशाला परिसर में वर्ष 1959 में हकीम दीवान चंद्र गुलाटी, ज्ञानचंद्र डाबर समेत पंजाबी समाज के सहयोग से श्रीरामा-कृष्णा ड्रामेटिक क्लब की स्थापना हुई थी। तभी से शारदीय नवरात्र में प्रतिवर्ष रामलीला का मंचन किया जा रहा है। इस वर्ष क्लब 67वां वार्षिकोत्सव मनाएगा।
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क्लब के अनिल सिंधवानी और नवीन अरोरा ने बताया कि मंचन की खासियत यह है कि शुरुआत से अब तक बाहरी कलाकारों को नहीं बुलाया गया। शहर के व्यापारी और युवा ही अलग-अलग किरदार निभाकर परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। सभी कलाकार अपनी भूमिकाओं को जीवंत बनाने के लिए नियमित रिहर्सल कर रहे हैं।
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पिता ने निभाया दशरथ का किरदार, बेटे ने निभाई राम-लक्ष्मण की भूमिका
काशीपुर। वर्ष 2002 से राम का किरदार निभा रहे ट्रांसपोर्टर गगन चावला बताते हैं कि उनके पिता स्व. रामकिशन चावला रामलीला में दशरथ की भूमिका निभाते थे। वर्ष 2016 में राम वनवास के मंचन के दौरान पिता ने दशरथ, गगन ने राम और उनके बेटे सूजल चावला ने लक्ष्मण का किरदार निभाया था। अब सूजल पढ़ाई के साथ रामलीला में अन्य किरदार निभाते हैं।

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मुंबई से हर साल 1400 किमी सफर कर रावण का किरदार निभाते हैं डॉ. राजीव
काशीपुर। माता मंदिर रोड निवासी और वर्तमान में मुंबई में रह रहे डॉ. राजीव कुमार चौधरी (71) वर्ष 1979 से क्लब से जुड़े हैं। उन्होंने पहली बार रावण का किरदार निभाया था और आज तक इस भूमिका को निभा रहे हैं। वर्ष 2007 में मुंबई बसने के बाद भी उनका रामलीला से जुड़ाव कायम है। वह हर वर्ष करीब 1400 किलोमीटर का सफर अपने खर्च पर तय कर काशीपुर पहुंचते हैं और रावण की भूमिका निभाते हैं।
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