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विवाहिता के हत्यारों को आजीवन कारावास
ब्यूरो, अमर उजाला, रुद्रपुर
Updated Wed, 06 May 2015 01:05 AM IST
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विवाहिता को जलाकर मारने के आरोपी पति, जेठ और देवर को द्वितीय अपर जिला जज राहुल गर्ग की अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता दीपक अरोरा के अनुसार 14 जनवरी 2014 को वार्ड तीन शक्तिफार्म निवासी सरस्वती मंडल ने दर्ज रिपोर्ट में कहा था कि उसकी पुत्री रंजीता वैरागी का विवाह शक्तिफार्म निवासी अशोक वैरागी के साथ किया था। विवाह के बाद से ही ससुराली रंजिश रखते हुए उसकी पुत्री को प्रताड़ित करते थे।
14 जनवरी 2014 को उसकी पुत्री उसके पास आई और बताया कि ससुराल वाले उसे सता रहे हैं और मारपीट कर रहे हैं। इस पर उसे समझा बुझाकर ससुराल भेज दिया। कुछ देर बाद उसे सूचना मिली कि पुत्री पर ज्वलन शील पदार्थ डालकर जला दिया गया है। जब वह पुत्री के ससुराल पहुंची तो ससुरालियों ने पुत्री दिखाने से मना कर दिया।
कुछ देर बाद उसकी लड़की की अस्पताल में मृत्यु हो गई। मृत्यु से पूर्व पुलिस ने रंजीता वैरागी के बयान लिए। जिस पर पुलिस ने जेठ विमल वैरागी और वासु वैरागी, देवर निशि वैरागी, पति अशोक वैरागी के खिलाफ 498 ए, 506, 302, 34 आईपीसी के तहत मुकदमा दर्ज कर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। मामले में अभियोजन पक्ष ने 11 गवाह पेश कर अभिुयुक्तों का जुर्म सिद्ध कर दिया। न्यायाधीश ने विमल वैरागी, निशि वैरागी व अशोक वैरागी को हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। जबकि वासु वैरागी को सबूतों के अभाव में बरी करार दिया।
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14 जनवरी 2014 को उसकी पुत्री उसके पास आई और बताया कि ससुराल वाले उसे सता रहे हैं और मारपीट कर रहे हैं। इस पर उसे समझा बुझाकर ससुराल भेज दिया। कुछ देर बाद उसे सूचना मिली कि पुत्री पर ज्वलन शील पदार्थ डालकर जला दिया गया है। जब वह पुत्री के ससुराल पहुंची तो ससुरालियों ने पुत्री दिखाने से मना कर दिया।
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कुछ देर बाद उसकी लड़की की अस्पताल में मृत्यु हो गई। मृत्यु से पूर्व पुलिस ने रंजीता वैरागी के बयान लिए। जिस पर पुलिस ने जेठ विमल वैरागी और वासु वैरागी, देवर निशि वैरागी, पति अशोक वैरागी के खिलाफ 498 ए, 506, 302, 34 आईपीसी के तहत मुकदमा दर्ज कर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। मामले में अभियोजन पक्ष ने 11 गवाह पेश कर अभिुयुक्तों का जुर्म सिद्ध कर दिया। न्यायाधीश ने विमल वैरागी, निशि वैरागी व अशोक वैरागी को हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। जबकि वासु वैरागी को सबूतों के अभाव में बरी करार दिया।
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