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किसानों का परिश्रम और त्याग ही हमारी सच्ची पूंजी : धामी

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sat, 08 Nov 2025 01:44 AM IST
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The hard work and sacrifice of farmers is our true capital: Dhami
पंतनगर में हुए किसानों सम्मेलन स्टाल पर गन्ना खाते सीएम धामी। संवाद
पंतनगर। उत्तराखंड राज्य के 25 वर्ष पूरे होने पर पंतनगर के स्टीवेंसन स्टेडियम में शुक्रवार को कृषक सम्मेलन का आयोजन किया गया। कृषक सम्मेलन का शुभारंभ सीएम पुष्कर सिंह धामी और कृषि मंत्री गणेश जोशी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस दौरान कृषि, उद्यान, दुग्ध, मत्स्य व सहकारिता क्षेत्र के प्रगतिशील किसानों सहित लखपति दीदियों को सीएम ने प्रतीक चिह्न, प्रशस्तिपत्र और अंगवस्त्र भेंटकर सम्मानित किया।
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सीएम धामी ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि किसानों का परिश्रम और त्याग ही उनकी सच्ची पूंजी और उनका पसीना ही उनकी ताकत है। उन्होंने उत्तराखंड निर्माण के सपने को साकार करने में योगदान देने वाले और 25 वर्षों में राज्य को आत्मनिर्भर बनाने में अपना अतुलनीय योगदान देने वाले किसानों को नमन किया।
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धामी ने कहा कि यह सम्मेलन केवल कृषि योजनाओं की चर्चा का आम कार्यक्रम नहीं बल्कि उत्तराखंड के सभी किसानों और उनके परिवारों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का अवसर भी है। उन्होंने कहा देश के संतुलित विकास के लिए बहुत आवश्यक है कि किसानों की परेशानियां कम हों और वह सशक्त बनें। क्योंकि किसानों के सशक्तीकरण के बिना राष्ट्र का सशक्तीकरण अधूरा है।
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उन्होंने कहा कि खेती-किसानी के इर्द-गिर्द ही हमारा समाज विकसित हुआ। हमारी परंपराएं पोषित हुईं और हमारे पर्व व त्योहार निर्धारित हुए। हमारे शास्त्रों में भी लिखा है कि कृषि संपत्ति और मेधा प्रदान करती है और कृषि ही मानव जीवन का आधार है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके लिए खेती देव उपासना करने जैसा है क्योंकि उनके पिता एक जवान और एक किसान भी थे। खेती से लोगों का पेट भर जो संतुष्टि प्राप्त होती है, वह अलौकिक है, उसकी व्याख्या नहीं की जा सकती। यही कारण है कि वह आज भी खेती से जुड़े हैं। इस दौरान सीएम ने लगे स्टालों का निरीक्षण भी किया।
कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि पिछले 25 वर्षों में कृषि व उद्यान के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य हुए हैं। कहा कि बागवानी के क्षेत्र में उत्तराखंड अब कश्मीर और हिमाचल के बाद तीसरे स्थान पर है। सरकार ने ड्रैगन फ्रूट, एप्पल, कीवी और मिलेट के लिए विशेष नीतियां बनाईं, ताकि किसानों को अधिक लाभ मिल सके।
उन्होंने कहा कि किसान हमारे अन्नदाता हैं। किसान मजबूत होगा तो देश मजबूत होगा। समूहों के माध्यम से महिलाएं आजीविका बढ़ा रही हैं और 1.65 लाख महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विधायक तिलकराज बेहड़ ने कहा कि सीएम धामी के नेतृत्व में प्रदेश निरंतर प्रगति कर रहा है। हमें दलगत राजनीति से ऊपर उठकर जनसमस्याओं का प्राथमिकता से निराकरण करना होगा। उन्होंने किच्छा में औद्योगिक पार्क बनाए जाने के लिए आभार व्यक्त करते हुए पंतनगर की जर्जर सड़कों की मरम्मत सहित अन्य समस्याओं को भी इंगित किया।
इस दौरान दायित्वधारी अनिल कपूर डब्बू, बलराज पासी, उत्तम दत्ता, खतीब अहमद, महापौर विकास शर्मा व दीपक बाली, जिलाध्यक्ष कमल जिंदल, गुंजन सुखीजा, महेंद्र सिंह नेगी, कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत, सचिव एसएन पांडे, डीएम नितिन सिंह भदौरिया, एसएसपी नैनीताल मंजूनाथ टीसी, अपर सचिव आनंद श्रीवास्तव व झरना कमठान सहित अनेकों जनप्रतिनिधि और लगभग पांच हजार किसान मौजूद रहे।
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गिनाई सरकार की योजनाएं और उपलब्धियां

सीएम धामी ने कहा कि वर्ष 2014 के बाद से पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसानों का जितना सशक्तीकरण हुआ है वह अभूतपूर्व है। सरकार का प्रयास है कि बड़े देशों के किसानों को जो सुविधाएं उपलब्ध हैं वह यहां के किसान को भी मिलें।
उन्होंने बताया कि 11 करोड़ किसानों को किसान सम्मान निधि से आर्थिक सहायता, प्रमुख फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य, फसल बीमा योजना से किसान को प्राकृतिक आपदाओं, फसल रोगों और कीटों से होने वाले नुकसान के लिए सुरक्षा कवच, मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना से खेतों की मिट्टी की जांच कर पोषक तत्वों की कमी और आवश्यक उर्वरकों की जानकारी, बिना ब्याज के तीन लाख रुपये तक ऋण, कृषि उपकरण खरीदने के लिए फार्म मशीनरी बैंक योजना से 80 प्रतिशत तक सब्सिडी और नहरों से सिंचाई पूरी तरह मुफ्त आदि सुविधाएं दी जा रही हैं।
सीएम ने कहा कि किसानों को पॉलीहाउस निर्माण के लिए 200 करोड़ की राशि का प्रावधान भी किया है। इससे राज्य में करीब 350 पॉलीहाउस स्थापित हुए हैं। गेहूं खरीद पर 20 रुपये प्रति क्विंटल बोनस, गन्ने की दर में 20 रुपये की बढ़ोत्तरी, पहाड़ों में वर्षा आधारित खेती के लिए 1,000 करोड़ रुपये से उत्तराखंड क्लाइमेट रिस्पॉन्सिव रेन-फेड फार्मिंग प्रोजेक्ट, 1200 करोड़ रुपये से नई सेब नीति, कीवी नीति, स्टेट मिलेट मिशन और ड्रैगन फ्रूट नीति जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं को लागू किया जिसके तहत बागवानों को 80 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही है।

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मशरूम-शहद उत्पादन में उत्तराखंड ने बनाया कीर्तिमान

सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि वह किसानों की उपज गुणवत्ता बढ़ाने के लिए ग्रेडिंग-सॉर्टिंग यूनिट निर्माण के लिए भी अनुदान दे रहे हैं। कहा कि प्रदेश में 50 से अधिक मशरूम इकाइयां, 30 से अधिक मौनपालन इकाइयां, 30 कोल्ड चेन इकाइयां, 18 कोल्ड स्टोरेज, पांच सीए स्टोरेज, 128 खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां, 1030 सूक्ष्म खाद्य उद्यम और दो मेगा फूड पार्क स्थापित हैं।
सीएम ने कहा कि बागवानी मिशन के तहत किसानों को पौधशाला, संरक्षित खेती, औद्यानिक यंत्रीकरण, तुड़ाई बाद प्रबंधन व प्रसंस्करण के लिए 50-55 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। कहा कि सरकार के प्रयासों से फलों की उत्पादकता में ढाई गुना वृद्धि हुई है जो पहले 1.82 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर थी, वह अब 4.52 मीट्रिक टन हो गई है। मशरूम उत्पादन में उत्तराखंड देश में पांचवें स्थान पर है। राज्य गठन के समय मशरूम उत्पादन 500 मीट्रिक टन था, वह आज बढ़कर 27,390 मीट्रिक टन हो गया है। इसी तरह शहद उत्पादन में भी राज्य देश में आठवें स्थान पर पहुंचा है और अब 3,320 मैट्रिक टन शहद का उत्पादन किया जा रहा है।

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यूकेडी पदाधिकारियों ने एसडीएम को सौंपा ज्ञापन

यूकेडी पदाधिकारियों ने पंतनगर कृषक सम्मेलन में एसडीएम गदरपुर अमृता शर्मा को ज्ञापन सौंपा। सीएम पुष्कर सिंह धामी को संबोधित ज्ञापन में राज्य आंदोलनकारियों की चार सूत्री मांगों और फूलसुंगा के वसुंधरा आवासीय काॅलोनी में 11 हजार हाईवोल्टेज लाइन को हटाए जाने की मांग की गई है। इस दौरान उत्तराखंड राज्य निर्माण सेनानी अध्यक्ष शिवशंकर भाटिया, राज्य आंदोलनकारी आनंद सिंह असगोला, यूकेडी जिलाध्यक्ष जीवन सिंह नेगी, सूरजपाल सिंह व कांति भाकुनी आदि मौजूद थे।


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भीड़ दिखाने के लिए कर्मियों और छात्रों का लिया सहारा

शासन-प्रशासन की ओर से सम्मेलन में 25-30 हजार किसानों के शिरकत करने का दावा किया गया था। इधर भीड़ बढ़ाने के लिए विवि की कुलसचिव ने कर्मियों, अधिकारियों और छात्र-छात्राओं को सम्मेलन में पहुंचने के आदेश जारी किए। आलम यह था कि छात्रावासों की मेस बंद कर छात्रों को सम्मेलन में पहुंचकर खाने के लिए कहा गया। फिर भी सम्मेलन में चार-पांच हजार से अधिक लोग नहीं जुट सके।



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