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क्रमिक अनशन में बदला ठेकेदारों का धरना

Fri, 30 Dec 2016 11:23 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, रुद्रपुर
अमर उजाला ब्यूरो, रुद्रपुर Updated Fri, 30 Dec 2016 11:23 PM IST
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The gradual change in the fast encompass contractors
नगर निगम परिसर में क्रमिक अनशन और धरने पर बैठे ठेकेदार - फोटो : अमर उजाला

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निर्माण कार्यों के टेंडर निरस्त करने के खिलाफ चल रहा ठेकेदारों का धरना शुक्रवार को क्रमिक अनशन में बदल गया। पहले दिन ठेकेदार कल्याण समिति के सचिव कृष्ण लाल सुखीजा और रामअवतार कोली क्रमिक अनशन पर बैठे। साथ में अन्य ठेकेदारों ने धरना भी दिया।

ठेकेदारों ने कहा कि 8.5 करोड़ के टेंडर बिना किसी वजह के निरस्त कर दिए गए। इससे ठेकेदारों की आर्थिक स्थिति बिगड़ गई है लेकिन मेयर मनमानी से बाज नहीं आ रहीं। ठेकेदार कल्याण समिति के अध्यक्ष अरशद खां ने कहा कि मेयर ने बिना जांच किए बिना कमेटी बनाकर टेंडर निरस्त कर दिए, जिससे शहर का विकास कार्य प्रभावित हुआ है। मेयर के कार्यों की पोल जनता के सामने खुल चुकी है। क्रमिक अनशन को कई पार्षदों ने भी अपना समर्थन दिया।
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वहां पर पप्पू मियां, मोहसिन खान, जावेद, मनोज शर्मा, जाकिर, बाबू, जुनैद, जाहिद, मोनीस हसन, मेसर मियां, सुशील, संतोष, अबरार, राजीव वर्मा आदि भी थे। ब्यूरो
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टेंडर निरस्त करने के मामले में ठेकेदारों के धरने को मेयर सोनी कोली ने हाईकोर्ट की अवमानना बताया है। साथ ही उन्होंने हाईकोर्ट के निर्देश पर टेंडर प्रक्रिया पुन: कराने की बात भी कही है। शुक्रवार को जारी बयान में मेयर ने कहा निगम ने लगभग 8 करोड़ की कार्य योजनाओं के लिए निविदायें तीन भागों में आमंत्रित की थी लेकिन ठेकेदारों ने मनमानी करते हुए दो बार निविदा नहीं खरीदी। इसके चलते निविदा में विलंब हुआ।


पुन: निविदा आमंत्रित की गई, जिसमें सरकारी विभागों में भी पंजीकृत ठेकेदारों को आमंत्रित किया गया ताकि पारदर्शिता बनी रहे। परंतु ठेकेदारों की मनमानी की शिकायत पार्षदों से मिलने के बाद निविदाएं निरस्त कर दी गईं। ताकि निगम को घाटे से बचाया जा सके। चूंकि ठेकेदारों की मनमानी नहीं चल पाई और उन्हें लाभ नहीं मिला इसलिए वह झूठे आरोप लगा रहे हैं। उक्त मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है जिसकी सुनवाई 5 जनवरी को होनी है। हाईकोर्ट के आदेशानुसार पुन: निविदाएं आमंत्रित की जाएंगी। मेयर ने कहा ठेकेदार हाईकोर्ट की अवमानना कर रहे हैं, उन्हें हाईकोर्ट के आदेश का इंतजार करना चाहिए।
 
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