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चावल मिलों का आवंटन न होने से भंडारण का संकट
अमर उजाला ब्यूरो, रुद्रपुर
Updated Fri, 13 Oct 2017 12:14 AM IST
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धान खरीद शुरू होने के बावजूद अब तक किसानों के खरीदे जाने वाले धान के भंडारण के लिए चावल मिल आवंटित नहीं हो सकी हैं। इसकेे अलावा पल्लेदारों से होने वाली धान की ढुलाई व परिवहन भाड़े के लिए भी टेंडर नहीं हो सके हैं। ऐसे हालातों में क्रय केंद्र प्रभारियों को धान खरीद के बाद उनके भंडारण की चिंता सता रही है।
एक अक्तूबर से धान खरीद शुरू होने के बाद शहर के केंद्रों में अभी तक धान की खरीद शून्य है। नियम के अनुसार खरीद के 24 से 48 घंटे में धान को राइस मिल में भेजा जाता है। पूर्वी रुद्रपुर किसान सेवा सहकारी समिति की अध्यक्ष नवजोत कौर कहती हैं कि उत्तराखंड राज्य सहकारी संघ के ढुलाई भाड़े की दरें प्रति क्विंटल धान को आठ किमी पहुंचाने के लिए आठ रुपये हैं। जबकि पल्लेदारों के प्रति क्विंटल लोडिंग-अनलोडिंग के सरकारी रेट नौ रुपये हैं। जबकि पल्लेदार 40 किलो प्रति कट्टे के हिसाब से सात रुपये पर काम कर रहे हैं। इस हिसाब से प्रति क्विंटल करीब 18 रुपये लेते हैं। इससे कम मूल्य पर वह काम करने को तैयार नहीं होते।
कोट
सहायक निबंधक सहकारिता मान सिंह सैनी ने बताया कि यूसीएफ ने मिलों से आवेदन मांगे हैं। जब तक आवंटन नहीं होता है तब तक खरीदा हुआ धान मंडी के टिन शेडों में रखवाया जाएगा। बताया कि पल्लेदार और परिवहन के कुछ जगह टेंडर हो चुके हैं। रुद्रपुर, काशीपुर, बाजपुर सहित जिन जगहों पर टेंडर नहीं हुए हैं। वहां समितियों को अपनी व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें होने वाले खर्च का भुगतान यूसीएफ करेगा।
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रुद्रपुर मंडी में एक भी पल्लेदार का पंजीकरण नहीं
रुद्रपुर। रुद्रपुर मंडी समिति में पल्लेदारी के काम के लिए कोई भी पल्लेदार पंजीकृत नहीं है। ऐसे में मंडी समिति के आढ़ती बाहरी लोगों से काम कराने को मजबूर हैं। मंडी सचिव आशा गोस्वामी ने बताया कि मंडी समिति में वर्तमान में कोई भी पल्लेदार पंजीकृत नहीं है। आढ़ती अपनी व्यवस्था स्वयं करते हैं।
डिजिटल नपी मापक यंत्र तोड़ने की होगी वसूली
रुद्रपुर। रुद्रपुर ब्लॉक में यूसीएफ के क्रय केंद्र में पिछले दिनों एक क्रय केंद्र प्रभारी की लापरवाही से डिजिटल नमी मापक यंत्र टूट गया था। मंडी की तरफ उपलब्ध कराई गई इस मशीन की कीमत करीब 14 हजार रुपये है। मंडी समिति उस क्रय केंद्र प्रभारी से इसकी वसूली करने की तैयारी कर रही है।
गोदाम से किसानों को नहीं फायदा
रुद्रपुर। पूर्वी रुद्रपुर किसान सेवा सहकारी समिति के पूर्व अध्यक्ष विक्रमजीत सिंह कहते हैं कि राज्य भंडारण निगम के गोदाम किसानों के लिए फायदेमंद साबित नहीं हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन गोदामों को विभिन्न एजेंसियों को किराये पर देने से किसानों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
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एक अक्तूबर से धान खरीद शुरू होने के बाद शहर के केंद्रों में अभी तक धान की खरीद शून्य है। नियम के अनुसार खरीद के 24 से 48 घंटे में धान को राइस मिल में भेजा जाता है। पूर्वी रुद्रपुर किसान सेवा सहकारी समिति की अध्यक्ष नवजोत कौर कहती हैं कि उत्तराखंड राज्य सहकारी संघ के ढुलाई भाड़े की दरें प्रति क्विंटल धान को आठ किमी पहुंचाने के लिए आठ रुपये हैं। जबकि पल्लेदारों के प्रति क्विंटल लोडिंग-अनलोडिंग के सरकारी रेट नौ रुपये हैं। जबकि पल्लेदार 40 किलो प्रति कट्टे के हिसाब से सात रुपये पर काम कर रहे हैं। इस हिसाब से प्रति क्विंटल करीब 18 रुपये लेते हैं। इससे कम मूल्य पर वह काम करने को तैयार नहीं होते।
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कोट
सहायक निबंधक सहकारिता मान सिंह सैनी ने बताया कि यूसीएफ ने मिलों से आवेदन मांगे हैं। जब तक आवंटन नहीं होता है तब तक खरीदा हुआ धान मंडी के टिन शेडों में रखवाया जाएगा। बताया कि पल्लेदार और परिवहन के कुछ जगह टेंडर हो चुके हैं। रुद्रपुर, काशीपुर, बाजपुर सहित जिन जगहों पर टेंडर नहीं हुए हैं। वहां समितियों को अपनी व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें होने वाले खर्च का भुगतान यूसीएफ करेगा।
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रुद्रपुर मंडी में एक भी पल्लेदार का पंजीकरण नहीं
रुद्रपुर। रुद्रपुर मंडी समिति में पल्लेदारी के काम के लिए कोई भी पल्लेदार पंजीकृत नहीं है। ऐसे में मंडी समिति के आढ़ती बाहरी लोगों से काम कराने को मजबूर हैं। मंडी सचिव आशा गोस्वामी ने बताया कि मंडी समिति में वर्तमान में कोई भी पल्लेदार पंजीकृत नहीं है। आढ़ती अपनी व्यवस्था स्वयं करते हैं।
डिजिटल नपी मापक यंत्र तोड़ने की होगी वसूली
रुद्रपुर। रुद्रपुर ब्लॉक में यूसीएफ के क्रय केंद्र में पिछले दिनों एक क्रय केंद्र प्रभारी की लापरवाही से डिजिटल नमी मापक यंत्र टूट गया था। मंडी की तरफ उपलब्ध कराई गई इस मशीन की कीमत करीब 14 हजार रुपये है। मंडी समिति उस क्रय केंद्र प्रभारी से इसकी वसूली करने की तैयारी कर रही है।
गोदाम से किसानों को नहीं फायदा
रुद्रपुर। पूर्वी रुद्रपुर किसान सेवा सहकारी समिति के पूर्व अध्यक्ष विक्रमजीत सिंह कहते हैं कि राज्य भंडारण निगम के गोदाम किसानों के लिए फायदेमंद साबित नहीं हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन गोदामों को विभिन्न एजेंसियों को किराये पर देने से किसानों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।