Uttarakhand: आपसी सहमति से बने शारीरिक संबंध दुष्कर्म नहीं, आरोपी को राहत
अपर सत्र न्यायाधीश संगीता आर्य ने नानकमत्ता क्षेत्र के बहुचर्चित प्रेम प्रसंग से जुड़े दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के मामले में अभियुक्त को साक्ष्यों के अभाव में संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।
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रुद्रपुर में अपर सत्र न्यायाधीश संगीता आर्य ने नानकमत्ता क्षेत्र के बहुचर्चित प्रेम प्रसंग से जुड़े दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के मामले में अभियुक्त को साक्ष्यों के अभाव में संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष यह संदेह से परे साबित नहीं कर सका कि घटना के समय युवती नाबालिग थी या उसके साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाए गए थे।
28 नवंबर 2022 को कोतवाली नानकमत्ता में किशोरी के भाई ने बहन के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस जांच के बाद गांव के ही युवक छिंदर सिंह के खिलाफ अपहरण, दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट की धाराओं में चार्जशीट दाखिल की गई। सुनवाई के दौरान लड़की ने अदालत में बताया कि दोनों के बीच करीब पांच वर्षों से प्रेम संबंध था। उसने यह भी स्वीकार किया कि घरवालों के विरोध के कारण उसने स्वयं अभियुक्त की दी गई नींद की गोलियां सब्जी में मिलाई थीं ताकि परिवार के लोग सो जाएं और वह अपनी इच्छा से उसके साथ जा सके।
अपर सत्र न्यायाधीश संगीता आर्य ने फैसले में कहा कि लड़की की उम्र को लेकर रिकॉर्ड और गवाहों के बयानों में गंभीर विरोधाभास है। स्कूल ट्रांसफर सर्टिफिकेट में जन्मतिथि 15 जनवरी 2008 दर्ज थी जबकि स्वयं युवती और उसके भाइयों ने अदालत में अलग-अलग वर्ष बताए। ऐसे में अभियोजन यह सिद्ध नहीं कर सका कि घटना के समय युवती नाबालिग थी। अदालत ने यह भी माना कि दोनों दो दिनों तक स्वेच्छा से साथ रहे और मेडिकल रिपोर्ट में किसी प्रकार की चोट या जबरदस्ती के संकेत नहीं मिले। अदालत ने उच्चतम न्यायालय के एक पूर्व निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि आपसी सहमति से बने संबंधों को परिस्थितियों के अनुसार दुष्कर्म नहीं माना जा सकता। इन्हीं आधारों पर अभियुक्त को सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया गया।