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Udham Singh Nagar News: शारीरिक शोषण प्रकरण में अभियुक्त की सजा बढ़ाने की अपील याचिका खारिज
Thu, 14 May 2026 12:21 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Thu, 14 May 2026 12:21 AM IST
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रुद्रपुर। तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश मुकेश चंद्र आर्य की अदालत ने महिला से शारीरिक शोषण प्रकरण में अभियुक्त की सजा बढ़ाने की अपील याचिका को खारिज कर दिया है।
ग्राम आनन्दपुर किच्छा निवासी रजनी ने आरोप लगाया था कि नानकनगद किच्छा निवासी दीपक सिंह बिष्ट ने उसे प्रेम जाल में फंसाकर 21 मार्च 2016 को फर्जी कोर्ट मैरिज के कागजात बनवाए और उसके साथ पति-पत्नी की तरह रहकर शारीरिक शोषण किया। मार्च 2021 में अभियुक्त ने उसे मारपीट कर घर से निकाल दिया। मामले में प्राथमिकी के बाद जब मामला अदालत में गया तो निचली अदालत ने 25 नवंबर 2024 को अभियुक्त को आईपीसी की धारा 323 और 504 में दोषी मानकर दो हजार के जुर्माने की सजा सुनाई थी लेकिन पीड़िता ने इस सजा को अपर्याप्त बताते हुए सजा बढ़ाने और दुष्कर्म व अप्राकृतिक कृत्य की धाराएं जोड़ने की मांग के साथ अपील की थी। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के नजीरों का हवाला देते हुए कहा कि धारा 372 सीआरपीसी के तहत पीड़ित सिर्फ दोषमुक्ति या कम मुआवजे के खिलाफ अपील कर सकता है। सजा को अपर्याप्त बताकर उसे चुनौती देने का अधिकार सिर्फ राज्य सरकार के पास है। पीड़ित के पास नहीं। इसी कानूनी बिंदु के आधार पर अदालत ने अपील खारिज कर दी।
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ग्राम आनन्दपुर किच्छा निवासी रजनी ने आरोप लगाया था कि नानकनगद किच्छा निवासी दीपक सिंह बिष्ट ने उसे प्रेम जाल में फंसाकर 21 मार्च 2016 को फर्जी कोर्ट मैरिज के कागजात बनवाए और उसके साथ पति-पत्नी की तरह रहकर शारीरिक शोषण किया। मार्च 2021 में अभियुक्त ने उसे मारपीट कर घर से निकाल दिया। मामले में प्राथमिकी के बाद जब मामला अदालत में गया तो निचली अदालत ने 25 नवंबर 2024 को अभियुक्त को आईपीसी की धारा 323 और 504 में दोषी मानकर दो हजार के जुर्माने की सजा सुनाई थी लेकिन पीड़िता ने इस सजा को अपर्याप्त बताते हुए सजा बढ़ाने और दुष्कर्म व अप्राकृतिक कृत्य की धाराएं जोड़ने की मांग के साथ अपील की थी। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के नजीरों का हवाला देते हुए कहा कि धारा 372 सीआरपीसी के तहत पीड़ित सिर्फ दोषमुक्ति या कम मुआवजे के खिलाफ अपील कर सकता है। सजा को अपर्याप्त बताकर उसे चुनौती देने का अधिकार सिर्फ राज्य सरकार के पास है। पीड़ित के पास नहीं। इसी कानूनी बिंदु के आधार पर अदालत ने अपील खारिज कर दी।
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