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Udham Singh Nagar News: न्यायालय ने दुर्घटना के आरोपी चालक को किया दोषमुक्त
Sat, 20 Jan 2024 02:28 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Sat, 20 Jan 2024 02:28 AM IST
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प्रतीकात्मक
काशीपुर। न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने धारा 279, 304ए, 427 आईपीसी के आरोपी चालक को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार संजय चौहान पुत्र सुखरम सिंह निवासी ग्राम नजारपुर कलां थाना नौगंवा सादात जिला अमरोहा यूपी काशीपुर स्थित मल्टीवाल पेपर मिल में काम करता था। 12 अक्तूबर 2016 को वह ड्यूटी खत्म करके घर लौट रहा था। इसी दौरान दोपहर करीब सवा दो बजे ग्राम मुकंदपुर के पास एक कार ने संजय चौहान को टक्कर मार दी। हादसे में उसकी घटनास्थल पर मौत हो गई।
घटना के संबंध में आईटीआई थाना में विभिन्न धाराओं में केस दर्ज कराकर आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया गया। जिसके बाद मुकदमे का विचारण फौजदारी वाद न्यायालय में किया गया।
इस दौरान अभियोजन पत्र की ओर से वादी, चश्मदीद गवाह व अन्य गवाहों का परीक्षण कराया गया। जिसमें आरोपी चंद्र प्रसाद दुबे के अधिवक्ता अब्दुल सलीम ने बचाव में जिरह की। पांच जनवरी 2024 को मुकदमे में अभियोजन अधिकारी और बचाव पक्ष की ओर से आरोपी के अधिवक्ता ने बहस की। बहस के दौरान आरोपी के अधिवक्ता की ओर से दिए गए तर्कों से सहमत होकर न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने संदेह का लाभ देते हुए आरोपी को दोषमुक्त कर दिया।
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अभियोजन पक्ष के अनुसार संजय चौहान पुत्र सुखरम सिंह निवासी ग्राम नजारपुर कलां थाना नौगंवा सादात जिला अमरोहा यूपी काशीपुर स्थित मल्टीवाल पेपर मिल में काम करता था। 12 अक्तूबर 2016 को वह ड्यूटी खत्म करके घर लौट रहा था। इसी दौरान दोपहर करीब सवा दो बजे ग्राम मुकंदपुर के पास एक कार ने संजय चौहान को टक्कर मार दी। हादसे में उसकी घटनास्थल पर मौत हो गई।
घटना के संबंध में आईटीआई थाना में विभिन्न धाराओं में केस दर्ज कराकर आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया गया। जिसके बाद मुकदमे का विचारण फौजदारी वाद न्यायालय में किया गया।
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इस दौरान अभियोजन पत्र की ओर से वादी, चश्मदीद गवाह व अन्य गवाहों का परीक्षण कराया गया। जिसमें आरोपी चंद्र प्रसाद दुबे के अधिवक्ता अब्दुल सलीम ने बचाव में जिरह की। पांच जनवरी 2024 को मुकदमे में अभियोजन अधिकारी और बचाव पक्ष की ओर से आरोपी के अधिवक्ता ने बहस की। बहस के दौरान आरोपी के अधिवक्ता की ओर से दिए गए तर्कों से सहमत होकर न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने संदेह का लाभ देते हुए आरोपी को दोषमुक्त कर दिया।
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