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Udham Singh Nagar News: बस चल पड़ी, मां-बाप छूटे... सिमरन की सूझबूझ से हैप्पी एंडिंग
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रुद्रपुर। बस अड्डे की भीड़, यात्रियों की भागदौड़ और वाहनों के शोर के बीच एक पल ऐसा आया, जब एक परिवार की खुशियां दांव पर लग गईं। मां-बाप की आंखों से दूर हुआ 10 माह का मासूम अपनों से बिछड़कर एक अजनबी गोद में चला गया। बस में बैठी कॉलेज छात्रा सिमरन मददगार बन गई और उसकी सूझबूझ से बच्चा सकुशल मां-बाप तक पहुंचाया जा सका।
लालपुर निवासी रोहित रस्तोगी शुक्रवार दोपहर को पत्नी रूपा और बेटे मन्नू के साथ मुरादाबाद जाने के लिए रुद्रपुर रोडवेज बस स्टेशन पहुंचे। बस चलने में समय था तो दंपती ने खुद शौचालय जाने के लिए मन्नू को पास बैठी कॉलेज छात्रा सिमरन की गोद में दे दिया। इसी दौरान बस चल पड़ी। रोहित और रूपा बस स्टेशन पर ही छूट गए। मासूम मन्नू छात्रा की गोद में ही रह गया। बेटे के छूट जाने का एहसास होते ही मानो दोनों के पैरों तले जमीन खिसक गई।
बस के आगे बढ़ते ही छात्रा सिमरन की धड़कनें भी तेज हो गईं। डर और घबराहट के बीच सिमरन ने हालात से भागने के बजाय सूझबूझ का परिचय दिया। उसने बस को नगर निगम कार्यालय के सामने रुकवाया और बच्चे के माता-पिता की तलाश शुरू की। उसकी इंसानियत ने उस अनजान बच्चे को अकेला नहीं होने दिया।
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इस घटना की सूचना मिलने पर मेयर विकास शर्मा भी सक्रिय हुए। उन्होंने पुलिस को सूचना दी और पूरे मामले की निगरानी संभाली। कुछ ही समय बाद मन्नू के परिजन रुद्रपुर पहुंचे। मेयर कार्यालय में जब मासूम मन्नू मां की गोद में लौटा तो सबके आंसू बह निकले। मां ने बच्चे को सीने से लगा लिया। छात्रा सिमरन की सूझबूझ मन्नू के लिए मददगार और समाज के लिए भरोसे की मिसाल बन गई।
बच्चा रुद्रपुर में, मां-बाप पहुंचे रामपुर
भरोसे का पल अचानक रोहित और रूपा के लिए परीक्षा की घड़ी बन गया। यह जुदाई माता-पिता के लिए किसी सदमे से कम नहीं थी। दोनों बस का पीछा करते हुए रामपुर तक पहुंच गए। हर मोड़ पर डर, हर पल अनहोनी की आशंका दिल को कचोट रही थी। रामपुर पहुंचकर पता चला कि बच्चा रुद्रपुर में ही सुरक्षित उतार दिया गया है।
लालपुर निवासी रोहित रस्तोगी शुक्रवार दोपहर को पत्नी रूपा और बेटे मन्नू के साथ मुरादाबाद जाने के लिए रुद्रपुर रोडवेज बस स्टेशन पहुंचे। बस चलने में समय था तो दंपती ने खुद शौचालय जाने के लिए मन्नू को पास बैठी कॉलेज छात्रा सिमरन की गोद में दे दिया। इसी दौरान बस चल पड़ी। रोहित और रूपा बस स्टेशन पर ही छूट गए। मासूम मन्नू छात्रा की गोद में ही रह गया। बेटे के छूट जाने का एहसास होते ही मानो दोनों के पैरों तले जमीन खिसक गई।
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बस के आगे बढ़ते ही छात्रा सिमरन की धड़कनें भी तेज हो गईं। डर और घबराहट के बीच सिमरन ने हालात से भागने के बजाय सूझबूझ का परिचय दिया। उसने बस को नगर निगम कार्यालय के सामने रुकवाया और बच्चे के माता-पिता की तलाश शुरू की। उसकी इंसानियत ने उस अनजान बच्चे को अकेला नहीं होने दिया।
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इस घटना की सूचना मिलने पर मेयर विकास शर्मा भी सक्रिय हुए। उन्होंने पुलिस को सूचना दी और पूरे मामले की निगरानी संभाली। कुछ ही समय बाद मन्नू के परिजन रुद्रपुर पहुंचे। मेयर कार्यालय में जब मासूम मन्नू मां की गोद में लौटा तो सबके आंसू बह निकले। मां ने बच्चे को सीने से लगा लिया। छात्रा सिमरन की सूझबूझ मन्नू के लिए मददगार और समाज के लिए भरोसे की मिसाल बन गई।
बच्चा रुद्रपुर में, मां-बाप पहुंचे रामपुर
भरोसे का पल अचानक रोहित और रूपा के लिए परीक्षा की घड़ी बन गया। यह जुदाई माता-पिता के लिए किसी सदमे से कम नहीं थी। दोनों बस का पीछा करते हुए रामपुर तक पहुंच गए। हर मोड़ पर डर, हर पल अनहोनी की आशंका दिल को कचोट रही थी। रामपुर पहुंचकर पता चला कि बच्चा रुद्रपुर में ही सुरक्षित उतार दिया गया है।