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महंगाई की मार: कहीं इतिहास ना बन जाए चैती मेला, सरकारी होने के बाद से हर साल बढ़ रहे टैंडर के दाम

Mon, 18 Mar 2024 01:07 PM IST
हीरा मेहरा राजीव कुमार,संवाद
राजीव कुमार,संवाद Published by: हीरा मेहरा Updated Mon, 18 Mar 2024 01:07 PM IST
सार

Kashipur News: उत्तर भारत के प्रसिद्ध ऐतिहासिक मां बाल सुंदरी देवी के चैती मेले का टेंडर हर साल महंगा होता जा रहा है। इससे अब मेले के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है। 

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Tender prices are increasing every year since Chaiti Mela became official in kashipur
मां बाल सुंदरी देवी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तर भारत के प्रसिद्ध ऐतिहासिक मां बाल सुंदरी देवी के चैती मेले का टेंडर हर साल महंगा होता जा रहा है। इससे अब मेले के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है। लोगों का मानना है कि यदि इसी तरह टेंडर महंगा होता रहा, तो आने वाले वर्षों में चैती मेला इतिहास के पन्नों में सिमट कर न रह जाए।

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ऐतिहासिक चैती मेला वर्ष 2018 से पहले तक पंडा परिवार संचालित करता था लेकिन आपसी कलह और बढ़ते विवाद के चलते यह मेला अब प्रशासन की देखरेख में होता है। मेले में लगने वाली सभी दुकानें, खेल-तमाशे, साइकिल स्टैंड, लाइटिंग-टेंट, बैरिकेडिंग, तहबाजारी आदि का करीब छह साल से प्रशासन की देखरेख में टेंडर हो रहा है।

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इसके लिए प्रत्येक वर्ष स्थानीय प्रशासन टेंडर कराता है, लेकिन हर वर्ष टेंडर के बढ़ते दामों से मेले में दुकानों की संख्या घटने लगी है। मंदिर के मुख्य पंडा विकास अग्निहोत्री ने बताया वर्ष 2018 से पहले चैती मेले में दूरदराज से दुकानदार अपनी दुकानें लगाते थे लेकिन टेंडर महंगा होने से इसमें लगातार गिरावट आने लगी है। अब 600-700 दुकानें लगती हैं। उधर मेला मजिस्ट्रेट अभय प्रताप सिंह ने बताया कि नियमानुसार टेंडर होता है। जैसे बोली लगती है उसके मुताबिक ही टेंडर स्वीकृत किया जाता है। हर साल बीते वर्ष की अपेक्षा दस फीसदी टेंडर के दाम बढ़ाने का प्रावधान है। 
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क्या कहना है दुकानदारों का 
मेला का टेंडर प्रत्येक वर्ष महंगा हो रहा है, जिसके चलते इस वर्ष दुकान लगाने की हिम्मत नहीं हो रही है। क्योंकि जो दुकान पहले हजारों में मिलती थी वह अब लाखों में मिल रही है। - दिलीप सक्सेना, दिल्ली चाट भंडार।

पहले साॅफ्टी के लिए दुकान करीब 3 से 4 हजार रुपये में मिलती थी, उसी साइज की दुकान अब 50 हजार में मिल रही है। ऐसे में इतनी दूर से आकर दुकान लगाना मुश्किल हो रहा है। - कैलाश माहेश्वरी, बंदायू।

मेरा परिवार चैती मेला में वर्ष से प्रसाद की दुकान लगा रहा है। पहले दुकान 15 से 20 हजार में मिलती थी, जो अब 70 से 80 हजार में मिल रही है। इसलिए बीते वर्ष नहीं आए थे। इस बार भी उम्मीद कम है।
-भगवान दास, स्वार, जिला रामपुर।

मैं वर्षों से हलुवा-पराठा की दुकान लगाता था। पहले दुकान 40-42 हजार रुपये में मिल जाती थी, जो अब चार लाख रुपये में मिल रही है। मैंने इसलिए बीते 4-5 साल से काम बंद कर दिया है। - पुनीत कुमार अग्रवाल, काशीपुर।

यह हुए तीन साल में टेंडर :

निविदा वर्ष            2022             2023             2024

दुकान             1,11,51,551     1,15,55,553    1,66,00,013

झूले-तमाशे     72,51,551         1,46,51,151   1,51,51,051

पार्किंग           13,73,173         11,00,000       16,60,000

तहबाजारी      16,61,000         22,11,000         33,33,339

बिजली साउंड 10,11,000        13, 61,551        10,15,980

कुल             2,24,48,275        3,08,79,255    3,77,60,383
 

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