{"_id":"60a2ad578ebc3ed2a87afa78","slug":"team-reached-to-private-hospital-to-check-bills-kashipur-news-hld424665760","type":"story","status":"publish","title_hn":"अधिक बिल वसूली की शिकायत पर निजी अस्पताल में छापा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अधिक बिल वसूली की शिकायत पर निजी अस्पताल में छापा
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
काशीपुर। कुछ निजी अस्पतालों के संचालक कोविड रोगियों के तीमारदारों से अधिक बिल वसूल रहे हैं। शिकायत का संज्ञान लेते हुए संयुक्त मजिस्ट्रेट की ओर से गठित टीम ने तहसीलदार के नेतृत्व में मुरादाबाद रोड स्थित एक अस्पताल में छापा मारा। टीम ने कोविड के इलाज की एवज में वसूले गए बिलों के बारे में जानकारी जुटाई। खबर लिखे जाने तक बिलों की जांच जारी थी। इस दौरान अस्पताल पर आयुष्मान कार्ड पर कोविड का इलाज न करने के भी आरोप लगे।
काशीपुर के कुछ अस्पतालों के संचालकों पर यह आरोप लग रहे हैं कि उनके द्वारा कोविड के इलाज में तीमारदारों से कई गुना रकम वसूली जा रही है। इनके द्वारा प्रतिदिन 45 हजार रुपये से लेकर 60 हजार रुपये तक का बिल बनाया जा रहा है। ऐसे ही आरोपों के चलते दस दिन पूर्व मुरादाबाद रोड स्थित एक निजी अस्पताल के संचालक के खिलाफ मुकदमा भी हो चुका है। बावजूद इसके निजी अस्पतालों पर आरोप लग रहे हैं।
दो दिन पहले मुरादाबाद रोड स्थित एक दूसरे अस्पताल के संचालक पर 19 दिनों के इलाज का बिल 7.68 लाख रुपये बनाने का आरोप लगा। वहीं एक अन्य युवक का आरोप था कि मात्र पंद्रह मिनट भर्ती रखने पर अस्पताल प्रबंधन की ओर से 25 हजार रुपये की मांग की गई। रुपये देने में देरी होने पर अस्पताल प्रबंधन ने उसके मृत पिता को कोरोना मरीज बता दिया। इस अस्पताल के खिलाफ आरोप सोशल मीडिया पर भी खूब वायरल हुए। अमर उजाला ने भी सोमवार के अंक में इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया।
विज्ञापन
इसका संज्ञान लेते हुए संयुुक्त मजिस्ट्रेट गौरव कुमार ने इन आरोपों की जांच के लिए एक टीम का गठन किया था। सोमवार शाम तहसीलदार वीसी पंत, नोडल अधिकारी डॉ. अमरजीत सिंह, सीओ एपी कोंडे, कोतवाल जीबी जोशी व कानूनगो अरुण कुमार ने मुरादाबाद रोड स्थित इस अस्पताल पर छापा मारा। टीम ने अस्पताल में भर्ती हुए कोरोना मरीजों के इलाज के बिलों का सत्यापन किया। टीम ने कुछ दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए। नोडल अधिकारी डॉ. अमरजीत साहनी ने बताया कि जांच की जा रही है। शिकायत सही पाए जाने पर अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
कोविड रोगियों के तीमारदारों से अधिक बिल वसूली की शिकायतें मिली है। जांच के लिए टीम गठित की गई है। शिकायतें सही पाए जाने पर अस्पताल का लाइसेंस निरस्त करने और मुकदमा दर्ज करने की कार्रवाई की जाएगी। गौरव कुमार, संयुक्त मजिस्ट्रेट।
विज्ञापन
काशीपुर के कुछ अस्पतालों के संचालकों पर यह आरोप लग रहे हैं कि उनके द्वारा कोविड के इलाज में तीमारदारों से कई गुना रकम वसूली जा रही है। इनके द्वारा प्रतिदिन 45 हजार रुपये से लेकर 60 हजार रुपये तक का बिल बनाया जा रहा है। ऐसे ही आरोपों के चलते दस दिन पूर्व मुरादाबाद रोड स्थित एक निजी अस्पताल के संचालक के खिलाफ मुकदमा भी हो चुका है। बावजूद इसके निजी अस्पतालों पर आरोप लग रहे हैं।
विज्ञापन
दो दिन पहले मुरादाबाद रोड स्थित एक दूसरे अस्पताल के संचालक पर 19 दिनों के इलाज का बिल 7.68 लाख रुपये बनाने का आरोप लगा। वहीं एक अन्य युवक का आरोप था कि मात्र पंद्रह मिनट भर्ती रखने पर अस्पताल प्रबंधन की ओर से 25 हजार रुपये की मांग की गई। रुपये देने में देरी होने पर अस्पताल प्रबंधन ने उसके मृत पिता को कोरोना मरीज बता दिया। इस अस्पताल के खिलाफ आरोप सोशल मीडिया पर भी खूब वायरल हुए। अमर उजाला ने भी सोमवार के अंक में इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया।
विज्ञापन
इसका संज्ञान लेते हुए संयुुक्त मजिस्ट्रेट गौरव कुमार ने इन आरोपों की जांच के लिए एक टीम का गठन किया था। सोमवार शाम तहसीलदार वीसी पंत, नोडल अधिकारी डॉ. अमरजीत सिंह, सीओ एपी कोंडे, कोतवाल जीबी जोशी व कानूनगो अरुण कुमार ने मुरादाबाद रोड स्थित इस अस्पताल पर छापा मारा। टीम ने अस्पताल में भर्ती हुए कोरोना मरीजों के इलाज के बिलों का सत्यापन किया। टीम ने कुछ दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए। नोडल अधिकारी डॉ. अमरजीत साहनी ने बताया कि जांच की जा रही है। शिकायत सही पाए जाने पर अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
कोविड रोगियों के तीमारदारों से अधिक बिल वसूली की शिकायतें मिली है। जांच के लिए टीम गठित की गई है। शिकायतें सही पाए जाने पर अस्पताल का लाइसेंस निरस्त करने और मुकदमा दर्ज करने की कार्रवाई की जाएगी। गौरव कुमार, संयुक्त मजिस्ट्रेट।