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Udham Singh Nagar News: तराई में तमंचे बन रहे कत्ल का सामान
Tue, 03 Oct 2023 12:38 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Tue, 03 Oct 2023 12:38 AM IST
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- ऊधम सिंह नगर में वर्ष 2022 में बरामद हुए सर्वाधिक 202 तमंचे
- पांच से आठ हजार रुपये मूल्य में आसानी से मिल रहे है तमंचे
कीर्तिराज रुमाल
रुद्रपुर। तराई में अवैध असलहों पर अंकुश न लगने से आपराधिक घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। फायरिंग और हत्या की अधिकतर घटनाओं में तमंचों का ही इस्तेमाल हो रहा है। ऊधम सिंह नगर जिले में वर्ष 2022 में पुलिस ने विभिन्न मामलों में 202 तमंचे बरामद किए थे। इस साल भी अभी तक करीब पुलिस करीब 130 तमंचे बरामद कर चुकी है।
जिले में एक तमंचा पांच हजार से आठ हजार रुपये तक आसानी उपलब्ध हो रहा है। अधिकतर युवा स्टेटस सिंबल के लिए इनका इस्तेमाल करते हैं। फिर धीरे-धीरे वह अपराध के दलदल में धंसते जाते हैं। ऊधम सिंह नगर में अब तक अवैध असलहे बनाने वाली कई फैक्टरी मिल चुकी हैं।
वर्ष 2015 में पुलिस ने बिंदुखेड़ा गांव में अवैध असलहा बनाने वाली फैक्टरी पकड़ी थी। इसी तरह वर्ष 2016 में गदरपुर के बकैनिया कलकत्ती के जंगल में और वर्ष 2017 में नानकमत्ता के जंगल में अवैध असलहे बनाने की फैक्टरी पकड़ी थी।
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इसके बाद वर्ष 2018 में सितारगंज के जंगलों में, वर्ष 2019 में रुद्रपुर के टांडा जंगल में और वर्ष 2020 में एक बार फिर से एसटीएफ ने नानकमत्ता के जंगलों में अवैध असलहों की फैक्टरी पकड़ी थी। पुलिस ने जुड़े सूत्रों ने बताया कि तराई में अवैध असलहे बनाने के लिए दिल्ली से सामान लाया जाता है। तराई में तमंचा बनाने वाले कई कुशल मिस्त्री होने की आशंका है।
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कोट-
जिले में पिछले डेढ़-दो सालों में पुलिस ने सबसे अधिक तमंचे बरामद किए हैं। अवैध असलहे बनाने वालों को भी पुलिस लगातार ट्रेस कर रही है। अवैध तमंचों के इस्तेमाल की सबसे बड़ी वजह गन कल्चर भी है, इस गन कल्चर को खत्म करने के लिए समाज को भी आगे चाहिए। - डॉ. मंजूनाथ टीसी, एसएसपी
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- पांच से आठ हजार रुपये मूल्य में आसानी से मिल रहे है तमंचे
कीर्तिराज रुमाल
रुद्रपुर। तराई में अवैध असलहों पर अंकुश न लगने से आपराधिक घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। फायरिंग और हत्या की अधिकतर घटनाओं में तमंचों का ही इस्तेमाल हो रहा है। ऊधम सिंह नगर जिले में वर्ष 2022 में पुलिस ने विभिन्न मामलों में 202 तमंचे बरामद किए थे। इस साल भी अभी तक करीब पुलिस करीब 130 तमंचे बरामद कर चुकी है।
जिले में एक तमंचा पांच हजार से आठ हजार रुपये तक आसानी उपलब्ध हो रहा है। अधिकतर युवा स्टेटस सिंबल के लिए इनका इस्तेमाल करते हैं। फिर धीरे-धीरे वह अपराध के दलदल में धंसते जाते हैं। ऊधम सिंह नगर में अब तक अवैध असलहे बनाने वाली कई फैक्टरी मिल चुकी हैं।
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वर्ष 2015 में पुलिस ने बिंदुखेड़ा गांव में अवैध असलहा बनाने वाली फैक्टरी पकड़ी थी। इसी तरह वर्ष 2016 में गदरपुर के बकैनिया कलकत्ती के जंगल में और वर्ष 2017 में नानकमत्ता के जंगल में अवैध असलहे बनाने की फैक्टरी पकड़ी थी।
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इसके बाद वर्ष 2018 में सितारगंज के जंगलों में, वर्ष 2019 में रुद्रपुर के टांडा जंगल में और वर्ष 2020 में एक बार फिर से एसटीएफ ने नानकमत्ता के जंगलों में अवैध असलहों की फैक्टरी पकड़ी थी। पुलिस ने जुड़े सूत्रों ने बताया कि तराई में अवैध असलहे बनाने के लिए दिल्ली से सामान लाया जाता है। तराई में तमंचा बनाने वाले कई कुशल मिस्त्री होने की आशंका है।
कोट-
जिले में पिछले डेढ़-दो सालों में पुलिस ने सबसे अधिक तमंचे बरामद किए हैं। अवैध असलहे बनाने वालों को भी पुलिस लगातार ट्रेस कर रही है। अवैध तमंचों के इस्तेमाल की सबसे बड़ी वजह गन कल्चर भी है, इस गन कल्चर को खत्म करने के लिए समाज को भी आगे चाहिए। - डॉ. मंजूनाथ टीसी, एसएसपी