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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Udham Singh Nagar News ›   Suri, KHATIMA, Kilpura will be in the range of 22 thousand hectare buffer zone

सुरई, खटीमा, किलपुरा रेंज के 22 हजार हेक्टेअर में बनेगा बफर जोन

Thu, 14 Jan 2016 12:45 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो/खटीमा।
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो/खटीमा। Updated Thu, 14 Jan 2016 12:45 AM IST
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पीलीभीत टाइगर रिजर्व बफर जोन से लगे सुरई, खटीमा एवं किलपुरा वन रेंजों के 22 हजार हेक्टेअर क्षेत्रफल में बफर जोन बनेगा। इसका प्रस्ताव शासन को जा चुका है। इसकी सीमा पीलीभीत के साथ ही नेपाल के शुक्ला फंटा सेंचुरी एवं नंधौर सेंचुरी तक होगी। इसके साथ ही नेपाल से लगे तराई के जंगल अब रामनगर कार्बेट टाइगर रिजर्ब की तर्ज पर तराई आर्कलैंड बनाने की सरकार की योजना है।

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जिसमें तेंदुए, हाथी और बाघ आदि वन्य जीव सुरक्षित विचरण कर सकेंगे।    उत्तर प्रदेश के माला एवं महोफ वन रेंज से लगा सुरई, खटीमा के नखाताल बिहड़, किलपुरा वन रेंज, हल्द्वानी वन प्रभाग के नन्धौर, जौलासाल वन रेंज से मिला जंगल वन्य प्राणियों के लिए महफूज है। यहां भालू, तेंदुए, हाथी एवं बाघों के लिए प्रचुर मात्रा में शाकाहारी एवं मांसाहारी भोजन उपलब्ध है। छोटे-बडे़ वन्य जीव जन्तुओं के लिए यहां के जंगलों में शारदा सागर बनबसा से निकलने वाली नहरों का पानी हमेशा मिलता है।
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सुरई व खटीमा वन रैंज में यद्यपि तेंदुए एवं बाघों की गर्जना एवं किलपुरा व खटीमा वन रेंज में हाथियों की चिंघाड़ पूर्व से ही सुनाई देती थी लेकिन सरकार द्वारा वन्य जीव-जन्तुओं के संरक्षण कोेेेेे गंभीरता से नहीं लिए जाने की वजह से ही जीवन के लिए मानव एवं वन्य प्राणियों में संघर्ष चलता रहा। जिसकी मिसाल समय-समय पर मृत पाए जाने वाले हाथियों, तेंदुओं एवं बाघों से दी जा सकती है। लगातार सिकुड़ रहे क्षेत्रफल एवं वनों के सफाए के चलते वन्य जीव जंतुओं का अस्तित्व खतरे में था।
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