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पीपीपी मोड पर नवंबर से शुरु होगी सितारगंज चीनी मिल
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चार सालों से बंद दि किसान सहकारी चीनी मिल अब पीपीपी मोड पर दोबारा चालू होगी। नवंबर से आरंभ पेराई सत्र में मिल को चालू करने के लिए शासन से टेंडर निकाल दिया गया है और टेंडर में शामिल होने वाली फर्मों की एक जुलाई को टेक्निकल व फाइनेंशियल बिड खोली जाएंगी। मिल चालू होने से क्षेत्र के किसानों को अब बाहरी चीनी मिलों को गन्ना नहीं देना होगा। साथ ही क्षेत्र में गन्ने की खेती का रकबा भी बढ़ेगा।
करोड़ों के घाटे की वजह से सरकड़ा गांव स्थित दि किसान सहकारी चीनी मिल को बीते पांच दिसंबर 2017 को बंद कर दिया गया था। मिल में कार्यरत 706 मिल कर्मियों को वीआरएस दे दिया गया था जिससे वे बेरोजगार हो गए थे। तब से मिल बंद है और किसान, राजनैतिक दल मिल चालू करने की मांग को लेकर आंदोलनरत थे। मिल दोबारा चालू कराने के लिए विधायक सौरभ बहुगुणा शासन में लगातार पैरवी कर रहे हैं। बीते जनवरी में मिल संचालन को लेकर राज्य सचिवालय में तत्कालीन सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत व विधायक सौरभ बहुगुणा ने अधिकारियों के साथ वार्ता की थी।
बुधवार को विधायक ने बताया कि सरकार ने एक बार पुन: मिल चलाने के लिए निविदा आमंत्रित कर दी है। नवंबर में मिल का पेराई सत्र शुरू होने की उम्मीद है। क्षेत्र के गन्ना किसानों ने मिल पुन: संचालित करने के निर्णय का स्वागत किया है। विधायक ने कहा कि सितारगंज चीनी मिल पुन: शुरू कराने के लिए सितारगंज, नानकमत्ता, खटीमा के किसानों से वायदा किया था जो अब पूरा हो जाएगा। आगामी सत्र में मिल चलेगी। इधर, मिल अगर चालू होती है तो सैकड़ों युवाओं को रोजगार की भी उम्मीद जाग उठी है। वहीं सरकार का राजस्व भी बढ़ेगा।
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निलंबित किए नौ चीनी मिल कर्मी बहाल
जसपुर। आंदोलन के दौरान निलंबित किए गए सभी नौ श्रमिकों को मिल के प्रधान प्रबंधक ने बहाल कर दिया है। बता दें कि श्रमिक फरवरी में मिल गेट पर फिटमेंट एवं अन्य मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे थे। मिल प्रधान प्रबंधक के अल्टीमेटम के बाद भी कर्मचारी वापस ड्यूटी पर नहीं आए थे। मिल प्रधान प्रबंधक सीएस इमलाल ने इसे अनुशासनहीनता मानते हुए राजेंद्र सिंह, बेगराज सिंह, मनोज जोशी, संजय शर्मा, उपेंद्र सिंह, अर्जुन सिंह ,नन्हे सिंह, विनोद कुमार, रुस्तम अली को 18 फरवरी को निलंबित कर दिया था।
जांच में निर्दोष पाए जाने पर प्रधान प्रबंधक अनिल कुमार ने उन्हें बहाल कर दिया है। निलंबन वापस लिए जाने पर श्रमिकों ने गन्ना मंत्री एवं गन्ना सचिव का आभार जताया है। आभार प्रकट करने वालों में प्रभुनाथ सिंह, विपिन कुमार, बलराम सिंह, अशोक कुमार, प्रीतम सिंह, उमेश सिंह, बाबूराम, देवराम, सुरेश कुमार, ध्यान सिंह आदि शामिल हैं। (संवाद)
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करोड़ों के घाटे की वजह से सरकड़ा गांव स्थित दि किसान सहकारी चीनी मिल को बीते पांच दिसंबर 2017 को बंद कर दिया गया था। मिल में कार्यरत 706 मिल कर्मियों को वीआरएस दे दिया गया था जिससे वे बेरोजगार हो गए थे। तब से मिल बंद है और किसान, राजनैतिक दल मिल चालू करने की मांग को लेकर आंदोलनरत थे। मिल दोबारा चालू कराने के लिए विधायक सौरभ बहुगुणा शासन में लगातार पैरवी कर रहे हैं। बीते जनवरी में मिल संचालन को लेकर राज्य सचिवालय में तत्कालीन सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत व विधायक सौरभ बहुगुणा ने अधिकारियों के साथ वार्ता की थी।
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बुधवार को विधायक ने बताया कि सरकार ने एक बार पुन: मिल चलाने के लिए निविदा आमंत्रित कर दी है। नवंबर में मिल का पेराई सत्र शुरू होने की उम्मीद है। क्षेत्र के गन्ना किसानों ने मिल पुन: संचालित करने के निर्णय का स्वागत किया है। विधायक ने कहा कि सितारगंज चीनी मिल पुन: शुरू कराने के लिए सितारगंज, नानकमत्ता, खटीमा के किसानों से वायदा किया था जो अब पूरा हो जाएगा। आगामी सत्र में मिल चलेगी। इधर, मिल अगर चालू होती है तो सैकड़ों युवाओं को रोजगार की भी उम्मीद जाग उठी है। वहीं सरकार का राजस्व भी बढ़ेगा।
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निलंबित किए नौ चीनी मिल कर्मी बहाल
जसपुर। आंदोलन के दौरान निलंबित किए गए सभी नौ श्रमिकों को मिल के प्रधान प्रबंधक ने बहाल कर दिया है। बता दें कि श्रमिक फरवरी में मिल गेट पर फिटमेंट एवं अन्य मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे थे। मिल प्रधान प्रबंधक के अल्टीमेटम के बाद भी कर्मचारी वापस ड्यूटी पर नहीं आए थे। मिल प्रधान प्रबंधक सीएस इमलाल ने इसे अनुशासनहीनता मानते हुए राजेंद्र सिंह, बेगराज सिंह, मनोज जोशी, संजय शर्मा, उपेंद्र सिंह, अर्जुन सिंह ,नन्हे सिंह, विनोद कुमार, रुस्तम अली को 18 फरवरी को निलंबित कर दिया था।
जांच में निर्दोष पाए जाने पर प्रधान प्रबंधक अनिल कुमार ने उन्हें बहाल कर दिया है। निलंबन वापस लिए जाने पर श्रमिकों ने गन्ना मंत्री एवं गन्ना सचिव का आभार जताया है। आभार प्रकट करने वालों में प्रभुनाथ सिंह, विपिन कुमार, बलराम सिंह, अशोक कुमार, प्रीतम सिंह, उमेश सिंह, बाबूराम, देवराम, सुरेश कुमार, ध्यान सिंह आदि शामिल हैं। (संवाद)