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Udham Singh Nagar News: फर्जी लाइसेंस प्रकरण में एसटीएफ ने काशीपुर से ठेकेदार को दबोचा
Mon, 29 Jun 2026 12:32 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Mon, 29 Jun 2026 12:32 AM IST
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काशीपुर। फर्जी शस्त्र लाइसेंस मामले में एसटीएफ ने कुंडा थाना क्षेत्र के ग्राम बसई में दबिश देकर फईम अहमद को गिरफ्तार किया है। वह ठेकेदार बताया जा रहा है। आरोपी की निशानदेही पर टीम ने .32 बोर की सेमी ऑटोमैटिक पिस्टल और नौ जिंदा कारतूस बरामद किए हैं।
एसटीएफ इस मामले में गैंग के सरगना सतानंद शर्मा और सौरभ अग्रवाल समेत दस आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें से किसी भी आरोपी को अब तक जमानत नहीं मिली है। एसटीएफ की टीमें बाहरी राज्यों से स्थानांतरित होकर आए लाइसेंसों की वैधता और सत्यता की जांच कर रही हैं।
इसी जांच के दौरान बगास ठेकेदार ग्राम बसई चौक हरियावाला निवासी फईम अहमद का नाम सामने आया। एसटीएफ ने उसे गिरफ्तार कर उसकी निशानदेही पर .32 बोर की सेमी ऑटोमैटिक पिस्टल और नौ कारतूस बरामद किए। एसटीएफ के अनुसार इस मामले में अब तक तीन अभियोग पंजीकृत कर 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। आरोपियों से 15 अवैध शस्त्र और 350 कारतूस बरामद हुए हैं।
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पुलिस पहले छोड़ चुकी थी फर्जी लाइसेंस से जुड़े शस्त्र
काशीपुर। फर्जी शस्त्र लाइसेंस मामले में सामने आए दो शस्त्र ऐसे भी हैं जिन्हें पुलिस पहले बरामद कर चुकी थी लेकिन बाद में छोड़ दिया गया था। एसटीएफ ने 27 जून की रात ग्राम बसई हरियावाला थाना कुंडा निवासी फईम सिद्दीकी को गिरफ्तार किया था। एसटीएफ को उसके पास से फर्जी लाइसेंस नहीं मिला लेकिन .32 बोर की पिस्टल और नौ कारतूस बरामद हुए। पूछताछ में सामने आया कि फईम ने यह पिस्टल मार्च 2026 में खरीदी थी। बताया गया कि फईम का परिवार जसपुर से आकर ग्राम बसई में बसा है। उसके पिता पेपर मिलों को भूसी सप्लाई करने का काम करते हैं। दो माह पहले फईम ने रामपुर में आयोजित विवाह समारोह की अपनी एक फोटो पिस्टल के साथ सोशल मीडिया पर अपलोड की थी। मामला संज्ञान में आने के बाद कुंडा पुलिस ने उससे पूछताछ कर हिदायत देकर छोड़ दिया था। इससे पहले सार्वजनिक स्थान पर फायरिंग के आरोप में सौरभ अग्रवाल को भी पिस्टल के साथ पकड़ा गया था। आरोप है कि मामूली कार्रवाई के बाद वह भी छूट गया था।
अब तक 11 आरोपियों की गिरफ्तारी
इस मामले में अब तक 11 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। फर्जी लाइसेंस प्रकरण की जांच डीआईजी दीपम सेठ के आदेश पर शुरू की गई थी। मामला सामने आने के बाद एसटीएफ के एसएसपी अजय सिंह के निर्देश पर जून माह में काशीपुर कोतवाली में दस लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। विवेचना के दौरान मामले में नए नाम सामने आते रहे हैं।
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एसटीएफ इस मामले में गैंग के सरगना सतानंद शर्मा और सौरभ अग्रवाल समेत दस आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें से किसी भी आरोपी को अब तक जमानत नहीं मिली है। एसटीएफ की टीमें बाहरी राज्यों से स्थानांतरित होकर आए लाइसेंसों की वैधता और सत्यता की जांच कर रही हैं।
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इसी जांच के दौरान बगास ठेकेदार ग्राम बसई चौक हरियावाला निवासी फईम अहमद का नाम सामने आया। एसटीएफ ने उसे गिरफ्तार कर उसकी निशानदेही पर .32 बोर की सेमी ऑटोमैटिक पिस्टल और नौ कारतूस बरामद किए। एसटीएफ के अनुसार इस मामले में अब तक तीन अभियोग पंजीकृत कर 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। आरोपियों से 15 अवैध शस्त्र और 350 कारतूस बरामद हुए हैं।
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पुलिस पहले छोड़ चुकी थी फर्जी लाइसेंस से जुड़े शस्त्र
काशीपुर। फर्जी शस्त्र लाइसेंस मामले में सामने आए दो शस्त्र ऐसे भी हैं जिन्हें पुलिस पहले बरामद कर चुकी थी लेकिन बाद में छोड़ दिया गया था। एसटीएफ ने 27 जून की रात ग्राम बसई हरियावाला थाना कुंडा निवासी फईम सिद्दीकी को गिरफ्तार किया था। एसटीएफ को उसके पास से फर्जी लाइसेंस नहीं मिला लेकिन .32 बोर की पिस्टल और नौ कारतूस बरामद हुए। पूछताछ में सामने आया कि फईम ने यह पिस्टल मार्च 2026 में खरीदी थी। बताया गया कि फईम का परिवार जसपुर से आकर ग्राम बसई में बसा है। उसके पिता पेपर मिलों को भूसी सप्लाई करने का काम करते हैं। दो माह पहले फईम ने रामपुर में आयोजित विवाह समारोह की अपनी एक फोटो पिस्टल के साथ सोशल मीडिया पर अपलोड की थी। मामला संज्ञान में आने के बाद कुंडा पुलिस ने उससे पूछताछ कर हिदायत देकर छोड़ दिया था। इससे पहले सार्वजनिक स्थान पर फायरिंग के आरोप में सौरभ अग्रवाल को भी पिस्टल के साथ पकड़ा गया था। आरोप है कि मामूली कार्रवाई के बाद वह भी छूट गया था।
अब तक 11 आरोपियों की गिरफ्तारी
इस मामले में अब तक 11 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। फर्जी लाइसेंस प्रकरण की जांच डीआईजी दीपम सेठ के आदेश पर शुरू की गई थी। मामला सामने आने के बाद एसटीएफ के एसएसपी अजय सिंह के निर्देश पर जून माह में काशीपुर कोतवाली में दस लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। विवेचना के दौरान मामले में नए नाम सामने आते रहे हैं।