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Udham Singh Nagar News: किसी के अरमानों पर फिरा पानी तो कहीं जली उम्मीदों की लौ...

Tue, 24 Jun 2025 01:10 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर Updated Tue, 24 Jun 2025 01:10 AM IST
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Somebody's wishes were shattered, somewhere the flame of hope was lit...
रुद्रपुर। त्रि-स्तरीय पंचायत चुनाव में पूर्व में लागू आरक्षण को शून्य मानते हुए इस वर्ष किए गए प्रथम आरक्षण पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। इसके बाद जहां कई दिग्गजों के अरमानों पर पानी फिर गया है तो कई लोगों की अरमानों की लौ जल उठी है। अगर फिर से आरक्षण प्रक्रिया बदली तो जिला पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत प्रमुख और ग्राम प्रधान पदों पर समीकरण बदल जाएंगे।
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पंचायत चुनाव में जिला पंचायत अध्यक्ष पद का आरक्षण अभी तक तय नहीं हुआ है। सदस्य पद के लिए जारी आरक्षण को लेकर निवर्तमान अध्यक्ष सहित संभावित दावेदारों ने अपनी गुणा-गणित बैठाना शुरू कर दिया था। हर सीट पर आरक्षण के मुताबिक अपने प्रत्याशियों का भी चयन कर रहे थे। यही हाल क्षेत्र पंचायत प्रमुख का भी रहा।
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बीते चुनावों में रोटेशन पालिसी के तहत आरक्षण तय किए गए थे। इस बार पूर्व के आरक्षण को शून्य मानते हुए नए सिरे से आरक्षण की रूपरेखा तय की गई थी। अब हाईकोर्ट की ओर से इस बार के आरक्षण पर रोक लगाए जाने के बाद फिर से आरक्षण पालिसी तय किए जाने की कयासबाजी तेज हो गई है। इससे पंचायत चुनाव के दावेदारों के बीच ऊहापोह की स्थिति पैदा हो गई है।
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मनमाफिक किया सीटों का आरक्षण


बाजपुर। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा कि हाईकोर्ट का आरक्षण को लेकर चुनाव स्थगन करना स्पष्ट करता है कि उत्तराखंड में एक संवैधानिक संकट की स्थिति है। सरकार ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में नियम, कायदे, कानून, परंपराओं को ताक पर रखकर सीटों के आरक्षण में अपने मन माफिक काम किया है। आरक्षण और आवंटन के संबंध में पंचायत राज अधिनियम की धारा 126 उल्लेखित प्रावधानों के अंतर्गत नियमावली बनाकर उसे नोटिफाइड करना था। सरकार ने नियमावली बनाकर नोटिफाइड करवाने के लिए बजाए शासनादेश जारी करके इतिश्री कर दी। इस मामले में शासनादेश का कोई मूल्य नहीं है। आर्य ने कहा कि सरकार को आरक्षण के नियमों में साफ निष्पक्ष व्यवस्था प्रणाली की उनकी मांग को हाईकोर्ट ने स्वीकारा है। लोकतंत्र और ग्रामीण सरकार की बुनियाद से छेड़छाड़ में आखिर जवाबदेही किसकी होगी। सरकार को प्रदेश के जनमानस को जवाब देना होगा। संवाद
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