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धान की बौना बीमारी ने किसानों व वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ाई
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जसपुर का किसान बौना धान की पौध दिखाते हुए । संवाद
- फोटो : KASHIPUR
काशीपुर। धान की कुछ प्रजातियों में बौना रोग लगने से किसानों की परेशानी बढ़ गई है। पंजाब के लुधियाना कृषि विश्वविद्यालय में विकसित धान की पीआर-121 और पीआर 130 प्रजाति में यह रोग पाया जाता है। बौना रोग में धान का पौधा 35-40 दिनों तक अन्य पौधों के समान बढ़ता है। इसके बाद पौधे की बढ़त रुक जाती है। कृषि वैज्ञानिक इसका कारण पता नहीं कर पाए हैं।
कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) के प्रभारी डॉ. जितेंद्र क्वात्रा ने बताया कि जसपुर के चार किसानों ने अपनी पीआर-211 की फसल में बौना रोग लगने की सूचना दी है। बताया कि अगर किसी किसान ने एक एकड़ में पीआर -130 की पौध लगाई है तो उसकी पूरी पौध बोनी नहीं हो रही बल्कि चार प्रतिशत तक पौधे बौने रह जाते हैं।
बौने पौधों में कल्ले नहीं फूटते हैं और बढ़त रुक जाती है। पौधे सूख भी नहीं रहे हैं। पौधों के बौना रहने के कारणों का पता लगाने के लिए बौने पौधे के नमूने कृषि विवि लुधियाना के वैज्ञानिकों ने कृषि विज्ञान लैब दिल्ली और केवीके ने पंतनगर विश्वविद्यालय में भेजे हैं। डॉ. क्वात्रा ने इस बीमारी को चिंताजनक बताया। उम्मीद जताई कि जल्द ही वैज्ञानिक इसका कारण खोज लेंगे।
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कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) के प्रभारी डॉ. जितेंद्र क्वात्रा ने बताया कि जसपुर के चार किसानों ने अपनी पीआर-211 की फसल में बौना रोग लगने की सूचना दी है। बताया कि अगर किसी किसान ने एक एकड़ में पीआर -130 की पौध लगाई है तो उसकी पूरी पौध बोनी नहीं हो रही बल्कि चार प्रतिशत तक पौधे बौने रह जाते हैं।
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बौने पौधों में कल्ले नहीं फूटते हैं और बढ़त रुक जाती है। पौधे सूख भी नहीं रहे हैं। पौधों के बौना रहने के कारणों का पता लगाने के लिए बौने पौधे के नमूने कृषि विवि लुधियाना के वैज्ञानिकों ने कृषि विज्ञान लैब दिल्ली और केवीके ने पंतनगर विश्वविद्यालय में भेजे हैं। डॉ. क्वात्रा ने इस बीमारी को चिंताजनक बताया। उम्मीद जताई कि जल्द ही वैज्ञानिक इसका कारण खोज लेंगे।
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