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आत्मनिर्भरता के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ कौशल विकास भी जरूरी,

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Thu, 08 Sep 2022 12:30 AM IST
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Skill Devalopment in Pantanagar
पंतनगर बायोटेक प्रयोगशाला में छात्राओं को जानकारी देते डॉ. मणिंद्र मोहन शर्मा। - फोटो : RUDRAPUR
पंतनगर। युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए बचपन से ही कौशल विकास आधारित शिक्षा दी जानी चाहिए। इसके लिए उच्च शिक्षण, शोध, तकनीकी संस्थानों, विश्वविद्यालयों के उत्कृष्टता केंद्र स्कूली बच्चों के लिए खोलने होंगे। यह बात उत्तराखंड जैव प्रौद्योगिकी परिषद (बायोटेक) के वैज्ञानिक डॉ. मणिंद्र मोहन शर्मा ने अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस पर कही।
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डॉ. शर्मा ने कहा कि गुणवत्तायुक्त शिक्षा और कौशल विकास एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। बच्चों में सर्वांगीण विकास के लिए दोनों का होना बहुत जरूरी है। इसलिए बच्चों को छोटी उम्र से ही शिक्षा के साथ कौशल विकास का प्रशिक्षण देने की जरूरत है। अधिकतर विद्यालयों में संवेदनशील यंत्रों, उपकरणों से सुसज्जित आधुनिक प्रयोगशालाओं का अभाव है। इससे युवा पीढ़ी शिक्षित होने के बावजूद कौशल विकास से वंचित रह जा रही है।
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पिछले कई दशकों से स्कूलों और विद्यालयों में स्थापित प्रयोगशालाएं अब बहुत ज्यादा सक्रिय नहीं हैं जो बच्चों की संकल्पना को समझने और उनके रचनात्मकता के विकास में सहायक होती हैं। इसके लिए जरूरी है कि कुछ शिक्षा, शोध, तकनीकी संस्थानों, व्यावसायिक संस्थानों, विश्वविद्यालयों में स्थापित उत्कृष्टता केंद्रों (प्रयोगशालाओं) का लाभ स्कूली बच्चों को भी मिल सके। स्कूलों, विद्यालयों के शिक्षकों, अधिकारियों को भी इसके लिए ईमानदार प्रयास करने होंगे और समय-समय पर उच्च शिक्षण, शोध, तकनीकी संस्थानों, विश्वविद्यालयों के उत्कृष्टता केंद्रों में सामंजस्य स्थापित करने होंगे।
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क्यों मनाते हैं साक्षरता दिवस
पंतनगर। यूनेस्को की ओर से आठ सितंबर को अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समाज को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के प्रति जागरूक करके साक्षर बनाना है। संयुक्त राष्ट्र ने अपने 17 सतत विकास लक्ष्यों में गरीबी, भूख मिटाने, अच्छे स्वास्थ्य के बाद गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को चौथे स्थान पर रखा है। वहीं देश में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को सुदृढ़ बनाने के लिए सतत विकास के लक्ष्यों (एसडीजी) में शामिल किया गया है। वर्ष 2021 में नीति आयोग की ओर से जारी एसडीजी सूचकांक में उत्तराखंड को देश में चौथा स्थान मिला है जबकि केरल, हिमाचल, गोवा क्रमश: पहले, दूसरे, तीसरे स्थान पर रहे हैं।
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