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सितारगंज में स्वास्थ्य सेवाएं बेदम
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो/सितारगंज।
Updated Thu, 30 Jul 2015 01:30 AM IST
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केंद्र व राज्य सरकार हर गांव तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने का दम भरती हैं। लेकिन, यह योजनाएं कितनी कारगर हैं, इसका अंदाजा प्रदेश के वीआईपी क्षेत्र सितारगंज में बेदम हो चुकी स्वास्थ्य सेवाओं से लगाया जा सकता है।
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सवा दो लाख की आबादी के स्वास्थ्य के लिए सिर्फ दो डाक्टर ही तैनात हैं। शक्तिफार्म, मैनाझुंडी, नानकमत्ता पीएचसी और साधूनगर, तिलियापुर डिस्पेंसरी में डाक्टर ही नहीं है।
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स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े के अनुसार सितारगंज ब्लाक क्षेत्र की करीब 2.25 लाख आबादी है। इसके लिए शहर में सामुदायिक स्वास्थ्य स्वास्थ्य केंद्र, शक्तिफार्म, नानकमत्ता और मैनाझुंडी गांव में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र एवं साधूनगर और तिलियापुर गांव में डिस्पेंसरी स्थापित है।
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इन अस्पतालों में डाक्टरों के 15 पद हैं। जिनमें से सीएचसी में आठ में से सिर्फ दो डाक्टर ही तैनात हैं। एक डाक्टर मेडिकल अवकाश पर है। लेडी डाक्टर के पद पर संविदा पर डाक्टर रखी गई है।
शक्तिफार्म, नानकमत्ता, मैनाझुंडी पीएचसी, साधूनगर व तिलियापुर डिस्पेंसरी में डाक्टर ही तैनात नहीं हैं। शक्तिफार्म में 54 हजार की आबादी के लिए अस्पताल में तीन डाक्टर और नानकमत्ता में 56 हजार की आबादी के लिए एक डाक्टर व मैनाझुंडी में 20 हजार आबादी के लिए दो डाक्टरों के पद हैं। जो वर्तमान में खाली पड़े हैं।
अस्पतालों में डाक्टर न होने से प्रतिदिन अस्पतालों में आने वाले करीब पांच सौ मरीजों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है।
वहीं, सरकारी अस्पतालों में डिलीवरी के लिए आने वाली गर्भवती महिलाएं या तो इलाज के अभाव में दम तोड़ देती है या फिर जान जोखिम में डालकर दाई या स्टाफ नर्सों से डिलीवरी कराती हैं।
अस्पतालों के रेफर सेंटर बने होने से अधिकांश मरीज निजी अस्पतालों में महंगा इलाज कराने को मजबूर हैं। इसके अलावा एक्सीडेंटल व अन्य गंभीर बीमारियों के कारण दम तोड़ देते हैं।
चिकित्साधिकारी डा. हर्ष सिंह ऐरी ने बताया कि अस्पताल में डाक्टरों की कमी से विभागीय उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।