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Udham Singh Nagar News: समर कैंप में श्रवण बाधित बच्चों के लिए सांकेतिक भाषा से खुल रहे सीखने के द्वार
Tue, 02 Jun 2026 12:38 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Tue, 02 Jun 2026 12:38 AM IST
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रुद्रपुर। शिक्षा विभाग की अभिनव पहल से अब श्रवण बाधित बच्चों के लिए शिक्षा की राह और अधिक सुगम होती जा रही है। भारतीय भाषा समर कैंप के माध्यम से ऐसे बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए भारतीय सांकेतिक भाषा (आईएसएल) को विशेष रूप से शामिल किया गया है। इससे सुनने और बोलने में असमर्थ बच्चों को अन्य विद्यार्थियों की तरह सीखने, समझने का अवसर मिल रहा है।
कैंप में एनसीईआरटी और भारतीय सांकेतिक भाषा अनुसंधान और प्रशिक्षण केंद्र के विकसित डिजिटल सामग्री का उपयोग किया जा रहा है। सांकेतिक भाषा आधारित सैकड़ों वीडियो के माध्यम से श्रवण बाधित विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम की जानकारी सरल और रोचक तरीके से दी जा रही है। वीरगाथा शृंखला के माध्यम से वीर सैनिकों की गाथाएं सांकेतिक भाषा में दिखाई जा रही हैं। वहीं बैंकिंग, बीमा, निवेश और वित्तीय साक्षरता से जुड़े विषयों की जानकारी भी बच्चों तक पहुंचाई जा रही है।
मुख्य शिक्षा अधिकारी हरेंद्र कुमार मिश्रा ने कहा कि विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को शिक्षा के समान अवसर उपलब्ध कराना ही वास्तविक समावेशी शिक्षा है। विभाग की इस पहल से श्रवण बाधित बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ रहा है और वे समाज की मुख्यधारा से जुड़ने की दिशा में मजबूत कदम बढ़ा रहे हैं। इस तरह के प्रयास भविष्य में भी जारी रहेंगे ताकि कोई भी बच्चा अपनी शारीरिक बाधा के कारण शिक्षा और विकास के अवसरों से वंचित न रहे।
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कैंप में एनसीईआरटी और भारतीय सांकेतिक भाषा अनुसंधान और प्रशिक्षण केंद्र के विकसित डिजिटल सामग्री का उपयोग किया जा रहा है। सांकेतिक भाषा आधारित सैकड़ों वीडियो के माध्यम से श्रवण बाधित विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम की जानकारी सरल और रोचक तरीके से दी जा रही है। वीरगाथा शृंखला के माध्यम से वीर सैनिकों की गाथाएं सांकेतिक भाषा में दिखाई जा रही हैं। वहीं बैंकिंग, बीमा, निवेश और वित्तीय साक्षरता से जुड़े विषयों की जानकारी भी बच्चों तक पहुंचाई जा रही है।
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मुख्य शिक्षा अधिकारी हरेंद्र कुमार मिश्रा ने कहा कि विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को शिक्षा के समान अवसर उपलब्ध कराना ही वास्तविक समावेशी शिक्षा है। विभाग की इस पहल से श्रवण बाधित बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ रहा है और वे समाज की मुख्यधारा से जुड़ने की दिशा में मजबूत कदम बढ़ा रहे हैं। इस तरह के प्रयास भविष्य में भी जारी रहेंगे ताकि कोई भी बच्चा अपनी शारीरिक बाधा के कारण शिक्षा और विकास के अवसरों से वंचित न रहे।
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