{"_id":"5c69ac59bdec225fe96d776b","slug":"shaheed-s-wife-said-blood-was-replaced-by-blood","type":"story","status":"publish","title_hn":"शहीद की पत्नी बोलीं, खून का बदला खून से","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शहीद की पत्नी बोलीं, खून का बदला खून से
Mon, 18 Feb 2019 12:17 AM IST
अरुण कुमार
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो
Published by: अरुण कुमार
Updated Mon, 18 Feb 2019 12:17 AM IST
विज्ञापन
खटीमा के मोहम्मदपुर भुड़िया में शहीद वीरेंद्र सिंह राणा की पत्नी रेनू बताते हुए।
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शहीद वीरेंद्र सिंह राणा की पत्नी रेनू राणा का कहना है कि आतंकियों और पाकिस्तान को सबक सिखाना ही होगा। बोलीं कि खून का बदला खून से लेना होगा। रविवार को शहीद के गांव मोहम्मदपुर भुड़िया में वीरेंद्र सिंह के घर काफी संख्या में सुबह से ही नाते रिश्तेदार सांत्वना देने पहुंच गए थे।
विज्ञापन
शहीद वीरेंद्र सिंह की गमजदा पत्नी ने इस दौरान बताया कि 14 फरवरी की सुबह करीब सात बजे उनका फोन आया। उन्होंने बताया था कि नाश्ता करने के बाद गाड़ी में बैठ गए हैं। इसके बाद फोन बंद हो गया। रेनू राणा ने कहा कि नौकरी मिली तो बच्चों को खूब पढ़ा लिखाकर अफसर बनाएंगी। पाकिस्तान की कायराना हरकत पर कहा कि आतंकियों को छोड़ना नहीं चाहिए। बदल लेना ही होगा और खून का बदला खून से ही चाहिए।
विज्ञापन
घर के आंगन में बैठे पिता दीवान सिंह, बड़े भाई जयराम, भतीजे राहुल और रिश्तेदार प्रवेश कुमार मौर्य आदि ने कहा कि अब तो सिर्फ वीरेंद्र की यादें रह गईं हैं। वीरेंद्र में देशभक्ति का जज्बा और जुनून था, लेकिन अब सिर्फ यादें ही रह गईं हैं।
विज्ञापन
2012 में बाल-बाल बच गए थे वीरेंद्र
शहीद वीरेंद्र सिंह की पत्नी रेनू ने बताया कि वर्ष 2012 में जब उनके पति वीरेंद्र सिंह छत्तीसगढ़ में तैनात थे, तब नक्सलियों के बम ब्लास्ट में उनकी गाड़ी का एक ओर का हिस्सा उड़ गया था, जिसमें वह बाल-बाल बच गए थे।
शहीद के भांजे अतीश ने दी थी आतंकी हमले की सूचना
खटीमा। शहीद वीरेंद्र की बहन रिच्छा के तीन पुत्रों में दो सीआरपीएफ और एक एसएसबी में तैनात हैं। शहीद के पिता दीवान सिंह ने बताया कि 14 फरवरी को जब पुलवामा में आतंकी हमला हुआ तो छत्तीसगढ़ में सीआरपीएफ में तैनात रिच्छा के पुत्र अतीश का अपने घर फोन आया। उसी ने आतंकी हमले की जानकारी दी।
तब बहन रिच्छा मायके आई और पूछा की भाई का फोन आया या नहीं। इसके बाद शहीद के तीन फोन नंबरों पर परिजन लगातार फोन करते रहे, लेकिन सब बंद आए। रात दस बजे 45वीं बटालियन के काफिले पर हमले की सूचना से ही परिवार में कोहराम मच गया।