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खुद में आत्मबल पैदा करना ही वास्तविक सशक्तीकरण
Wed, 24 Apr 2019 12:13 AM IST
अरुण कुमार
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो
Published by: अरुण कुमार
Updated Wed, 24 Apr 2019 12:13 AM IST
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अपराजिता कार्यक्रम में शपथ पत्र के साथ छात्राएं।
- फोटो : amar ujala
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श्री गुरुनानक कन्या इंटर कॉलेज में मंगलवार को अमर उजाला अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर छात्राओं ने जूडो-कराटे कला का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में करीब 200 छात्राओं ने शपथ पत्र भी भरे।
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अपराजिता कार्यक्रम का शुभारंभ कॉलेज की प्रधानाचार्य सुरुचि सक्सेना ने किया। उन्होंने कहा कि खुद में आत्मबल पैदा करना ही वास्तविक सशक्तीकरण है। महिलाएं आसमान की ऊंचाईयों तक तरक्की करें, लेकिन यह उन्नति संस्कारों की जमीन पर होनी चाहिए। स्कूल की प्रधानाध्यापिका शालिनी गुप्ता ने कहा कि महिलाओं को सशक्त व सक्षम बनाने की पहल हमें अपने परिवार से ही करनी होगी।
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शिक्षिका आरती खुराना और शिक्षिका विनीता ने कहा कि छेड़छाड़ की घटनाओं से बचने के लिए लड़कियों को आत्मरक्षा के गुर सीखने आवश्यक है, जिससे जरूरत पड़ने पर वह अपनी रक्षा स्वयं कर सकती हैं।
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पढ़ी लिखी महिलाएं भी उत्पीड़न का शिकार होती है। कई बार परिवार और समाज की रूढ़िवादिता उन्हें अपने अधिकारों के प्रति आवाज उठाने से रोकती है। पिछले वर्ष मैंने मेलबर्न (ऑस्ट्रेलिया) में हुई संगोष्ठी में प्रतिभाग किया था। वहां के अनुभव को स्कूल की छात्राओं के साथ साझा किया और उन्हें सशक्त होने को प्रेरित किया। - सुरुचि सक्सेना, प्रधानाचार्य श्री गुरुनानक इंटर कॉलेज, काशीपुर।
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बच्चों को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण अनिवार्य रूप से देना चाहिए। अगर बेटियां खुद में सक्षम होंगी तो किसी की हिम्मत नहीं कि वह शोषण करने का साहस जुटा सके। जब महिलाएं कमजोर होंगी, तभी उनका उत्पीड़न होगा। - शालिनी गुप्ता, अनामिका वर्मा, शिक्षिका।
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इस कार्यक्रम में वक्ताओं के विचारों से हमारे भीतर नई ऊर्जा का संचार हुआ है। हमारा जोश बढ़ा है। अब लगता है कि हम हार नहीं मानेंगे, महिलाएं न कभी कमजोर थीं और न कमजोर होगी। - कशिश, नैना यादव, छात्राएं।
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मुसीबत के दौरान आत्मविश्वास बनाए रखना आत्मरक्षा का पहला सबक है। अगर खुद को घिरे देखकर हम हौसला खो बैठते हैं तो फिर कभी जीत नहीं सकते। हमेशा डर को हराकर जीत मिलती है। - सुमैया, पायल, छात्राएं।
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हमें खुद पर विश्वास होना जरूरी है। हमारा आत्मविश्वास ही हमें हर मुश्किल से निकले में मदद करता है। महिलाएं बहुत सशक्त है लेकिन समाज की रूढ़िवादिता उन्हें आगे नहीं बढ़ने देती है। - पायल, वारिजा, छात्राएं।