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वैज्ञानिकों ने भूजल प्रदूषण रोकने की तकनीक खोजी
ब्यूरो/अमर उजाला, पंतनगर।
Updated Fri, 16 Oct 2015 12:47 AM IST
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पंतनगर विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने मिट्टी में मौजूद पेस्टीसाइड यानि कृषि रसायन को भूजल में रिसने के कारण दूषित होने से रोकने के लिए तकनीक विकसित की है। तकनीक को अपनाकर भूजल के प्रदूषित होने की गति को काफी कम किया जा सकता है।
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पंतनगर विश्वविद्यालय के रसायन विज्ञान विभाग की प्रोफेसर अंजना श्रीवास्तव ने बताया कि अध्ययन के दौरान विभिन्न प्रकार के जैविक मिट्टी संशोधन पदार्थ जैसे फार्मयार्ड खाद, ताजा गोबर का घोल, धान की भूसी और प्रेसमड खाद मिट्टी में मिलाकर पेस्टीसाइड का प्रयोग किया गया तो मृदा में विभिन्न रसायनों जैसे लिंडेन, क्लोरोपाइरीफास, फिप्रोनिल, कार्बेंडाजिम, साइपरमेथ्रिन, एंडोसल्फान, इमिडाक्लोप्रिड एवं सल्फोसलफ्यूरान, के अवधारण की शक्ति में काफी वृद्धि पायी गयी।
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समस्त संशोधनों में से फार्मयार्ड खाद या धान की भूसी को मिट्टी में मिलाने से पेस्टीसाइड के रिसने की तीव्रता 75 प्रतिशत तक कम हो गई।
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उन्होंने बताया कि यदि किसान बुवाई अथवा रोपण से पहले मिट्टी में फार्मयार्ड खाद अथवा धान की भूसी को पांच टन प्रति हैक्टेयर की दर से मिट्टी में मिला दें तो भूजल के प्रदूषण को काफी हद तक रोका जा सकता है।
उल्लेखनीय है कि विभिन्न पेस्टीसाइड फसलों, पशुओं एवं उनके उत्पादों की रक्षा के उद्देश्य से पौधों और पशुओं पर प्रयोग किये जाते हैं।
एक ही फसल पर तीन या चार रसायन जैसे शाकनाशी, कवकनाशी और कीटनाशी आदि दो से तीन बार तक छिड़के जाते हैं।
अधिकतर पेस्टीसाइड पर्यावरण में आसानी से अपघटित नहीं होते हैं, बल्कि मिट्टी में विद्यमान रहते हैं और धीरे धीरे मिट्टी की तह से रिसकर भूजल में पहुंच जाते हैं।
अपने रसायनिक गुणों के आधार पर ये जीव के अंदर प्रवेश कर खाद्य श्रंखला में संग्रहित होकर मनुष्य एवं अन्य जीवों के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव डालते हैं।
भूजल में कृषि रसायनों को रिसने से रोकने के लिये सबसे अच्छा उपाय मिट्टी में इनकी प्रतिधारण शक्ति में वृद्धि करना है।
जैविक मिट्टी संशोधन पदार्थ मृदा में मिलाने से रसायनों के रिसने की प्रक्रिया को मृदा को बिना नुकसान पहुंचाए कम किया जा सकता है।