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Udham Singh Nagar News: दुर्लभ फिन्स वीवर के संरक्षण के लिए मांगा स्थानीय लोगों का सहयोग
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रुद्रपुर के संजय वन में बैठक को संबोधित करते डीएफओ यूसी तिवारी। आयोजक
टांडा रेंज के संजय वन चेतना केंद्र में हुई बैठक, हरिपुरा जलाशय में पक्षी आधारित पर्यटन पर जोर
रुद्रपुर। गूलरभोज के हरिपुरा जलाशय में पाई जाने वाले दुर्लभ फिन्स वीवर पक्षी के संरक्षण को लेकर तराई केंद्रीय वन प्रभाग ने प्रशासन, सिंचाई विभाग और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक की। इसमें स्थानीय लोगों से सहयोग मांगा गया। इस दौरान हरिपुरा जलाशय में पक्षी आधारित पर्यटन और उससे स्थानीय लोगों को जोड़ने पर चर्चा की गई।
शुक्रवार को टांडा रेंज के संजय वन चेतना केंद्र में हुई बैठक में डीएफओ यूसी तिवारी ने कहा कि हरिपुरा जलाशय और उसके आसपास के क्षेत्र में फिन्स वीवर पक्षी की मौजूदगी है। दुर्लभ श्रेणी में शुमार इस पक्षी के संरक्षण की आवश्यकता है और यह सभी के सहयोग से होगा। वैज्ञानिक डॉ. रजत भार्गव ने फिन्स वीवर पक्षी के बारे में रोचक जानकारियां दी। पक्षी विशेषज्ञ राजेश भट्ट ने कहा कि फिन्स वीवर का संरक्षण स्थानीय लोगों की जागरूकता के बिना संभव नहीं है। अगर स्थानीय लोगों की आर्थिकी से इसे जोड़ा जाए तो वे संरक्षण के प्रति प्रेरित होंगे। उन्होंने जलाशय में बड़ी संख्या में पक्षियों की मौजूदगी को देखते हुए पक्षी आधारित पर्यटन की संभावनाएं जताई। कहा कि इससे स्थानीय लोगों को जोड़ा जाए। टांडा रेंजर आरएन गौतम ने बताया कि हरिपुरा जलाशय में करीब सौ पक्षी हैं। कहा कि पक्षी संरक्षण में सभी का सहयोग जरूरी है। वहां पर एसडीएम गदरपुर गौरव पांडेय, एसडीओ सिंचाई विशाल प्रसाद, एसडीओ मयंक मेहता,ग्राम कूल्हा के प्रधान सुंदर गिरी, ग्राम कोपा के प्रधान मनोज देवराड़ी, जिपं सदस्य चंदन नयाल, बीडीसी श्याम सिंह सहित अनेक मौजूद रहे।
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फिन्स वीवर को कहा जाता है जुलाहा पक्षी
रुद्रपुर। पक्षी विशेषज्ञ राजेश भट्ट ने बताया कि फिन्स वीवर की विश्व में 124 और भारत में चार प्रजातियां पाई जाती हैं। जून से सितंबर तक पक्षी का ब्रीडिंग का समय होता है और यह समूह में रहना पसंद करती है। यह आसाम के साथ ही नेपाल से सटे तराई के नम भूमि क्षेत्रों के अलावा हरिपुरा जलाशय व काशीपुर में तुमड़िया जलाशय के पास पीली डैम के पास पाई जाती हैं। यह पक्षी सेमल के पेड़ या जलाशय के किनारे रीड घास में घोंसला बनाती है। पक्षी की घोंसला बुनने की कला अद्भुत है और इसे जुलाहा पक्षी भी कहा जाता है। संवाद
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रुद्रपुर। गूलरभोज के हरिपुरा जलाशय में पाई जाने वाले दुर्लभ फिन्स वीवर पक्षी के संरक्षण को लेकर तराई केंद्रीय वन प्रभाग ने प्रशासन, सिंचाई विभाग और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक की। इसमें स्थानीय लोगों से सहयोग मांगा गया। इस दौरान हरिपुरा जलाशय में पक्षी आधारित पर्यटन और उससे स्थानीय लोगों को जोड़ने पर चर्चा की गई।
शुक्रवार को टांडा रेंज के संजय वन चेतना केंद्र में हुई बैठक में डीएफओ यूसी तिवारी ने कहा कि हरिपुरा जलाशय और उसके आसपास के क्षेत्र में फिन्स वीवर पक्षी की मौजूदगी है। दुर्लभ श्रेणी में शुमार इस पक्षी के संरक्षण की आवश्यकता है और यह सभी के सहयोग से होगा। वैज्ञानिक डॉ. रजत भार्गव ने फिन्स वीवर पक्षी के बारे में रोचक जानकारियां दी। पक्षी विशेषज्ञ राजेश भट्ट ने कहा कि फिन्स वीवर का संरक्षण स्थानीय लोगों की जागरूकता के बिना संभव नहीं है। अगर स्थानीय लोगों की आर्थिकी से इसे जोड़ा जाए तो वे संरक्षण के प्रति प्रेरित होंगे। उन्होंने जलाशय में बड़ी संख्या में पक्षियों की मौजूदगी को देखते हुए पक्षी आधारित पर्यटन की संभावनाएं जताई। कहा कि इससे स्थानीय लोगों को जोड़ा जाए। टांडा रेंजर आरएन गौतम ने बताया कि हरिपुरा जलाशय में करीब सौ पक्षी हैं। कहा कि पक्षी संरक्षण में सभी का सहयोग जरूरी है। वहां पर एसडीएम गदरपुर गौरव पांडेय, एसडीओ सिंचाई विशाल प्रसाद, एसडीओ मयंक मेहता,ग्राम कूल्हा के प्रधान सुंदर गिरी, ग्राम कोपा के प्रधान मनोज देवराड़ी, जिपं सदस्य चंदन नयाल, बीडीसी श्याम सिंह सहित अनेक मौजूद रहे।
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फिन्स वीवर को कहा जाता है जुलाहा पक्षी
रुद्रपुर। पक्षी विशेषज्ञ राजेश भट्ट ने बताया कि फिन्स वीवर की विश्व में 124 और भारत में चार प्रजातियां पाई जाती हैं। जून से सितंबर तक पक्षी का ब्रीडिंग का समय होता है और यह समूह में रहना पसंद करती है। यह आसाम के साथ ही नेपाल से सटे तराई के नम भूमि क्षेत्रों के अलावा हरिपुरा जलाशय व काशीपुर में तुमड़िया जलाशय के पास पीली डैम के पास पाई जाती हैं। यह पक्षी सेमल के पेड़ या जलाशय के किनारे रीड घास में घोंसला बनाती है। पक्षी की घोंसला बुनने की कला अद्भुत है और इसे जुलाहा पक्षी भी कहा जाता है। संवाद
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