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Udham Singh Nagar News: अतिक्रमण के पेंच में फंसा रुद्रपुर का बस टर्मिनल
Wed, 05 Nov 2025 01:07 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Wed, 05 Nov 2025 01:07 AM IST
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रुद्रपुर। जिला मुख्यालय में आईएसबीटी की तर्ज पर बन रहा बस टर्मिनल का निर्माण कार्य दस साल बाद भी पूरा नहीं हो पाया है। करीब ढाई साल तक पीपीपी मोड पर करीब 80 करोड़ की लागत से बन रहे बस टर्मिनल का आधा निर्माण ठप पड़ा है। परिवहन निगम के अधिकारियों का कहना है कि निर्माणाधीन भवन के आसपास हुए अतिक्रमण का पेंच सबसे बड़ा बाधक बना हुआ है।
शहर के बीचों बीच बन रहे बस टर्मिनल की रुपरेखा 2011 में ही तैयार हो गई थी। अगले चरण में टेंडरिंग की प्रक्रिया के बाद 2016 में बस टर्मिनल के निर्माण का ठेका एक निजी कंपनी को सौंपा गया। तैयार रुपरेखा के अनुसार नए बस टर्मिनल में यात्रियों के लिए आधुनिक वेटिंग हाल, वर्कशॉप, प्लेटफार्म और शौचालय आदि का निर्माण होना था। इसके लिए करीब चार एकड़ भूमि प्रस्तावित की गई थी। तमाम बाधाओं को पार कर बस टर्मिनल का टेंडर पूरा होने के पांच साल बाद जिला विकास प्राधिकरण ने निर्माणदायी संस्था को नक्सा पास नहीं होने के चलते नोटिस भेज दिया था। बाद में कंपाउंडिंग के जरिए इसका निस्तारण हो गया था।
परिवहन निगम का कहना है कि अतिक्रमण के बाद ही बस टर्मिनल का संचालन संभव है। आलम ये है कि सालों से निर्माण नहीं होने के चलते इस भवन में जगह-जगह घास व झांड़ियां उग आई हैं।
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1500 वर्ग मीटर में अतिक्रमण हटाना प्रशासन के लिए चुनौती
रोडवेज के आसपास करीब 1500 वर्ग मीटर का क्षेत्र अतिक्रमण की जद में है। परिवहन निगम की ओर से इससे पहले भी कई बार अतिक्रमण मुक्त कराने को लेकर जिला प्रशासन को कहा गया है। अतिक्रमण मुक्ति के नाम पर प्रशासन के हाथ अभी भी खाली ही हैं।
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कोट:
बस टर्मिनल के निर्माण का काम अतिक्रमण के चलते रुका हुआ है। उम्मीद है कि इस माह के अंत तक अतिक्रमण हटने के बाद निर्माण कार्य शुरु हो जाएगा। अतिक्रमण मुक्त कराने को लेकर जिलाधिकारी को पत्र भेजा गया है। रीना जोशी, प्रबंध निदेशक, परिवहन निगम
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शहर के बीचों बीच बन रहे बस टर्मिनल की रुपरेखा 2011 में ही तैयार हो गई थी। अगले चरण में टेंडरिंग की प्रक्रिया के बाद 2016 में बस टर्मिनल के निर्माण का ठेका एक निजी कंपनी को सौंपा गया। तैयार रुपरेखा के अनुसार नए बस टर्मिनल में यात्रियों के लिए आधुनिक वेटिंग हाल, वर्कशॉप, प्लेटफार्म और शौचालय आदि का निर्माण होना था। इसके लिए करीब चार एकड़ भूमि प्रस्तावित की गई थी। तमाम बाधाओं को पार कर बस टर्मिनल का टेंडर पूरा होने के पांच साल बाद जिला विकास प्राधिकरण ने निर्माणदायी संस्था को नक्सा पास नहीं होने के चलते नोटिस भेज दिया था। बाद में कंपाउंडिंग के जरिए इसका निस्तारण हो गया था।
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परिवहन निगम का कहना है कि अतिक्रमण के बाद ही बस टर्मिनल का संचालन संभव है। आलम ये है कि सालों से निर्माण नहीं होने के चलते इस भवन में जगह-जगह घास व झांड़ियां उग आई हैं।
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1500 वर्ग मीटर में अतिक्रमण हटाना प्रशासन के लिए चुनौती
रोडवेज के आसपास करीब 1500 वर्ग मीटर का क्षेत्र अतिक्रमण की जद में है। परिवहन निगम की ओर से इससे पहले भी कई बार अतिक्रमण मुक्त कराने को लेकर जिला प्रशासन को कहा गया है। अतिक्रमण मुक्ति के नाम पर प्रशासन के हाथ अभी भी खाली ही हैं।
कोट:
बस टर्मिनल के निर्माण का काम अतिक्रमण के चलते रुका हुआ है। उम्मीद है कि इस माह के अंत तक अतिक्रमण हटने के बाद निर्माण कार्य शुरु हो जाएगा। अतिक्रमण मुक्त कराने को लेकर जिलाधिकारी को पत्र भेजा गया है। रीना जोशी, प्रबंध निदेशक, परिवहन निगम