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भारत-पाक युद्ध में माता-पिता से बिछड़कर रोशन लाल ने बेटों की जिंदगी में भरा उजाला
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रुद्रपुर में अपने भरे-पूरे परिवार के साथ रोशन लाल व उनकी पत्नी तरनजीत कौर।
- फोटो : RUDRAPUR
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रुद्रपुर। वर्ष 1947 में हुए भारत-पाकिस्तान बंटवारे के दौरान रुद्रपुर निवासी रोशन लाल जुनेजा पाकिस्तान में अपनी मां चूनों देवी और पिता भगत राम से बिछड़कर जैसे तैसे हिंदुस्तान पहुंचे। यहां रहकर रोशन लाल ने अपने दोनों बेटों को अच्छी परवरिश और संस्कार देकर साथ रहना सिखाया। दोनों बेटे संयुक्त परिवार में रहकर पिछले 31 साल से साथ में कारोबार कर रहे हैं।
आवास विकास निवासी 80 वर्षीय रोशन लाल जुनेजा बताते हैं कि भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के दौरान वह अपने माता-पिता से अलग हो गए थे। इसके बाद वह अकेले जैसे-तैसे अमृतसर पहुंचे। कई दिनों तक भूखे पेट रहने के बाद वह कुरुक्षेत्र में रिफ्यूजी कैंप में रहे। इसके बाद फरीदाबाद पहुंचकर वह अनाथ आश्रम में रहने लगे। वर्ष 1956 में रुद्रपुर पहुंचकर उन्होंने एक पेशावरी होटल में काम किया। उसके बाद ट्रैक्टर बनाने वाली एक उच्च कंपनी में स्पेशलिस्ट के तौर पर काम किया। कहा कि वर्ष 1971 में तरनजीत कौर के साथ शादी की और उनके दो बच्चे हुए।
बड़ा बेटा संजय जुनेजा और छोटा बेटा पुनीत जुनेजा को हमेशा साथ रखकर आगे भी एक साथ रहने की नसीहत दी। आगे चलकर दोनों भाइयों ने वर्ष 1991 में शहर में व्यापार करना शुरू कर दिया। कहा कि पहले मेडिकल स्टोर शुरू किया। इसके बाद दोनों ने वर्ष 2016 में डिस्पोजेबल मैन्यूफैक्चरिंग की फैक्टरी स्थापित की।
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रोशन लाल जुनेजा ने कहा कि बीते 31 सालों से दोनों बेटे साथ कारोबार कर रहे हैं। रुद्रपुर में उनकी तीन पीढ़ियां हो गईं हैं।
प्रांतीय उद्योग व्यापार मंडल के नगर अध्यक्ष संजय जुनेजा ने कहा कि उनका बेटा ऋतिक जुनेजा ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई कर रहा है, जबकि बेटी रिया जुनेजा की ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी हो गई है। कहा कि छोटे भाई पुनीत की बड़ी बेटी जानवी जुनेजा देहरादून में पढ़ाई कर रही है। छोटा बेटा राघव 10वीं कक्षा में पढ़ रहा है। रोशन लाल ने कहा कि दोनों बेटे भी अपने बच्चों को साथ में रहने की नसीहत दे रहे हैं।
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आवास विकास निवासी 80 वर्षीय रोशन लाल जुनेजा बताते हैं कि भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के दौरान वह अपने माता-पिता से अलग हो गए थे। इसके बाद वह अकेले जैसे-तैसे अमृतसर पहुंचे। कई दिनों तक भूखे पेट रहने के बाद वह कुरुक्षेत्र में रिफ्यूजी कैंप में रहे। इसके बाद फरीदाबाद पहुंचकर वह अनाथ आश्रम में रहने लगे। वर्ष 1956 में रुद्रपुर पहुंचकर उन्होंने एक पेशावरी होटल में काम किया। उसके बाद ट्रैक्टर बनाने वाली एक उच्च कंपनी में स्पेशलिस्ट के तौर पर काम किया। कहा कि वर्ष 1971 में तरनजीत कौर के साथ शादी की और उनके दो बच्चे हुए।
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बड़ा बेटा संजय जुनेजा और छोटा बेटा पुनीत जुनेजा को हमेशा साथ रखकर आगे भी एक साथ रहने की नसीहत दी। आगे चलकर दोनों भाइयों ने वर्ष 1991 में शहर में व्यापार करना शुरू कर दिया। कहा कि पहले मेडिकल स्टोर शुरू किया। इसके बाद दोनों ने वर्ष 2016 में डिस्पोजेबल मैन्यूफैक्चरिंग की फैक्टरी स्थापित की।
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रोशन लाल जुनेजा ने कहा कि बीते 31 सालों से दोनों बेटे साथ कारोबार कर रहे हैं। रुद्रपुर में उनकी तीन पीढ़ियां हो गईं हैं।
प्रांतीय उद्योग व्यापार मंडल के नगर अध्यक्ष संजय जुनेजा ने कहा कि उनका बेटा ऋतिक जुनेजा ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई कर रहा है, जबकि बेटी रिया जुनेजा की ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी हो गई है। कहा कि छोटे भाई पुनीत की बड़ी बेटी जानवी जुनेजा देहरादून में पढ़ाई कर रही है। छोटा बेटा राघव 10वीं कक्षा में पढ़ रहा है। रोशन लाल ने कहा कि दोनों बेटे भी अपने बच्चों को साथ में रहने की नसीहत दे रहे हैं।