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विदेशों में फंसे भारतीयों को बचाने का बीड़ा उठाए हैं रोशन

Thu, 30 May 2019 12:13 AM IST
अरुण कुमार मो. यामीन अंसारी
मो. यामीन अंसारी Published by: अरुण कुमार Updated Thu, 30 May 2019 12:13 AM IST
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roshan have been taken to save Indians stranded abroad
समाज सेवी रोशन रतूड़ी। - फोटो : amar ujala

एयरलिफ्ट फिल्म में जिस तरह अक्षय कुमार ने जिस तरह विदेशों में फंसे भारतीयों को बचाया उसी तरह उत्तराखंड के रोशन लाल भी रीयल लाइफ में विदेश में फं से भारतीयों को बचाने में जुटे हुए हैं। वह अब तक करीब 600 लोगों को बचाकर उनके घर सकुशल पहुंचा चुके हैं। विदेशों में फंसे भारतीयों के लिए वह  मसीहा हैं।

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जून 2014 में इराक में आतंकी संगठन ने 39 भारतीयों को बंधक बनाया था। इस पर भारत सरकार के विदेश राज्यमंत्री वीके सिंह इराक तक पहुंच गए थे। 90 के दशक में कुवैत में इराक हमले के दौरान एक लाख 70 हजार भारतीयों को बचाने वाले रंजीत कत्याल, उनकी पत्नी निमरत कौर और बच्ची पर बनी एयरलिफ्ट फिल्म ने भी खूब सुर्खियां बटोरीं और अक्षय कुमार के किरदार को सराहा गया। लेकिन असल जिंदगी (रीयल लाइफ) में आज दुबई में क्लीनिंग एवं टेक्निकल सर्विसेज लिमिटेड कंपनी के मालिक रोशन रतूड़ी भी विदेशों में फंसे भारतीयों के लिए किसी हीरो से कम नहीं हैं।
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अमर उजाला से बातचीत में रोशन रतूड़ी ने बताया कि उनका मकसद समाज की सेवा करना था। फूड सेफ्टी मैनेजमेंट एवं बिजनेस मैनेजमेंट की शिक्षा लेने के बाद 2004 से ओमान मस्कट में रेस्त्रां चलाने के बाद 2015 में दुबई आए और यहां कंपनी की शुरुआत की। विदेशों में उन्हें टूरिस्ट या एंप्लाइमेंट वीजा लेकर आने वाले भारतीय फंसकर अपनी जिंदगी बर्बाद करते मिले। इस पर ऐसे भारतीय को बचाकर सकुशल उनके घर तक पहुंचाने को रोशन ने मिशन बना लिया और अब तक वह भारतीय नागरिकों समेत बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल, पाकिस्तान, कतर, मलयेशिया, थाईलैंड, फिलीपींस और केन्या आदि देशों के लोगों को उनके परिवारों से मिलवा चुके हैं। वह फंसे हुए लोगों को बचाने के लिए दुनिया के किसी भी कोने में पहुंच जाते हैं।
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रोशन ने आरआर हृयूमैनिटी देवभूमि उत्तराखंड के नाम से संगठन भी बना रखा है। विदेशों में फंसे लोगों को उनके घर तक भेजने में जो भी खर्च आता है, उसे वह अपनी कंपनी से होने वाली आय से खर्च करते हैं। रतूड़ी मूलरूप से बिटूला जिला टिहरी गढ़वाल निवासी हैं। वह स्व. गोविंद राम रतूड़ी और स्व. भरोसी देवी रतूड़ी के बेटे हैं। 39 वर्षीय रोशन का परिवार 1980 में भगवानपुर भाऊवाला देहरादून में आकर बस गया था। उनके पिता गोविंद राम टिहरी में रेस्त्रां चलाते थे और 2016 में उनका निधन हो गया। पांच भाई-बहन में सबसे बड़े भाई बीएसएफ में अधिकारी हैं। उनसे छोटे मस्कट में ऑन रेट्रो हैं और तीसरे वाले भाई कनाडियन हैं। सबसे छोटी बहन देहरादून में रहती है

रोशन बताते हैं कि वह सरकार की मदद के बिना ही काम करते हैं। अपनी कंपनी से कमाकर लोगों की मदद करना ही उनकी सेवा बन गई है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार को एजेंटों के माध्यम से विदेश भेजने पर रोक लगानी चाहिए। कहा कि भारत सच में सबसे सुंदर और संस्कृतियों की धरोहर वाला देश है। वह भविष्य में दुबई से आकर उत्तराखंड में ही रहना चाहते हैं।

2016 में सुल्तानपुर पट्टी के युवक का शव भेजा था 

सितारगंज। समाजसेवी रोशन रतूड़ी ने 29 दिसंबर 2016 को दुबई में आत्महत्या करने वाले सुल्तानपुर पट्टी के युवक का शव घर भिजवाने का जिम्मा उठाया था। युवक ने काम न मिलने पर जान गवां दी थी। रतूड़ी ने सोशल मीडिया के जरिये उसके परिजनों से संपर्क कर युवक का शव घर तक पहुंचवाया था। उन्होंने बताया कि इस समय उत्तराखंड के एक युवक समेत चार लोग मलयेशिया में फंसे है, जिन्हें बचाने के लिए रेस्कयू किया जा रहा है। 

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