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Uttarakhand news: रिटायर बैंक मैनेजर को तीन दिन तक डिजिटल अरेस्ट कर 27 लाख ठगे, ये दिखाया डर; जानें पूरा मामला
Fri, 05 Sep 2025 03:56 PM IST
हीरा मेहरा
अमर उजाला नेटवर्क, ऊधम सिंह नगर
अमर उजाला नेटवर्क, ऊधम सिंह नगर
Published by: हीरा मेहरा
Updated Fri, 05 Sep 2025 03:56 PM IST
सार
सेवानिवृत्त बैंक मैनेजर को मनी लांड्रिंग का डर दिखाकर साइबर अपराधियों ने डिजिटल अरेस्ट कर 27 लाख की धोखाधड़ी कर ली। पीड़ित ने साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में साइबर अपराधियों के खिलाफ केस दर्ज कराया है।
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साइबर अपराधी।
- फोटो : amar ujala
विस्तार
नैनीताल जिले के कॉपरेटिव बैंक से सेवानिवृत्त बैंक मैनेजर को मनी लांड्रिंग का डर दिखाकर साइबर अपराधियों ने डिजिटल अरेस्ट कर 27 लाख की धोखाधड़ी कर ली। पीड़ित ने साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में साइबर अपराधियों के खिलाफ केस दर्ज कराया है।
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जिले के कालाढूंगी स्थित वार्ड नंबर दो निवासी लोकमणी नोडियाल ने दर्ज कराए केस में कहा कि उनको 30 अगस्त को अज्ञात नंबर से व्हॉट्सएप कॉल आई थी। काॅलर ने खुद को मुंबई साइबर क्राइम विभाग का अधिकारी बताते हुए उनके नाम से मुंबई में चल रहे सिम से लोगों को आपत्तिजनक वीडियो भेजने की बात कही थी। उन पर कार्रवाई करने की बात उसने कही थी। इसके बाद उनके नाम से चल रहे केनरा बैंक के खाते में मनी लांड्रिंग से तीन करोड़ रुपये आने की बात कही गई और खाता संचालक शादाब की गिरफ्तारी होने व उसकी ओर से पीड़ित को 10 फीसदी देने की बात बताई गई।
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लोकमणि ने पुलिस को बताया कि इन लोगों ने उनको अदालत का अरेस्ट वारंट व केनरा बैक का एटीएम कार्ड भेजा था। इसके बाद सत्यापन के नाम पर उनको डिजिटल अरेस्ट कर पत्नी व अन्य लोगों से बात नहीं करने के साथ ही कॉल पर ही बिजी रहने को कहा गया गया था। इसके बाद तीन नंबरों से उनको व्हॉट्सएप पर ऑडियो और वीडियो काल आते रहे थे। एक सितंबर को उनको बैंक में जाकर दिए गए खाता नंबर पर 27 लाख रुपये भेजने के लिए कहा गया था। उन्होंने उक्त नंबर पर रुपये ट्रांसफर कर दिए थे। जब ले लोग फिर से रुपये मांगने लगे तो उनको धोखाधड़ी होने का शक हुआ था। इस पर उन्होंने तीन सितंबर को साइबर क्राइम हेल्प पोर्टल नम्बर 1930 पर शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने कहा कि अज्ञात व्यक्तियों ने खुद को मुंबई पुलिस का फर्जी अधिकारी बताकर झांसे में लेकर 27 लाख की ऑनलाईन धोखाधड़ी की है।
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साइबर थाने के प्रभारी निरीक्षक अरूण कुमार ने बताया कि पीड़ित की रिपोर्ट दर्ज करने के बाद मामले की विवेचना शुरू कर दी गई है। जिस खाते में रुपये ट्रांसफर किए गए हैं, उसका ब्योरा मंगाया जा रहा है।