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शांतिपुरी में मिला दुर्लभ रेड कोरल कुकरी सांप
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शांतिपुरी में दुर्लभ प्रजाति का सांप पकड़े हुए सोनू कार्की।
- फोटो : RUDRAPUR
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शांतिपुरी। डौली रेंज के वन कर्मियों ने शांतिपुरी नंबर तीन निवासी गोविंद सिंह कार्की के घर से दुर्लभ रेड कोरल कुकरी सांप का रेस्क्यू किया। सांप को देखने के लिए मौके पर लोगों की भीड़ लगी रही।
सांप रेस्क्यू विशेषज्ञ सोनू कार्की ने बताया कि बृहस्पतिवार रात को शांतिपुरी नंबर तीन निवासी गोविंद सिंह कार्की के घर में सांप देखे जाने की सूचना मिली। इस पर वह टीम के साथ मौके पर पहुंचे लेकिन अंधेरा होने के कारण रेस्क्यू नहीं किया जा सका। इसके बाद शुक्रवार सुबह दोबारा टीम के साथ मौके पर पहुंचे और सांप की खोजबीन की। सकुशल रेस्क्यू कर सांप को जंगल में सुरक्षित छोड़ दिया।
डौली रेंजर अनिल जोशी ने कहा कि रेस्क्यू किया गया सांप दुर्लभ रेड कोरल कुकरी सांप है। यह सांप उत्तराखंड में तीसरी बार देेेखा गया है। इससे पहले वर्ष 2015 में खटीमा में और वर्ष 2020 में नैनीताल में देेेखा गया था। अति दुर्लभ श्रेणी में आने वाला यह सांप विष रहित होता है।
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छोटे जीव-जंतु, चूहे, मेंढक इसका भोजन हैं। प्रभागीय वनाधिकारी संदीप कुमार ने बताया कि इस दुर्लभ प्रजाति के सांप के आंकड़े एकत्र किए जा रहे हैं, जिस पर भविष्य में रिसर्च की जाएगी। एक रिपोर्ट के अनुसार रेड कोरल कुकरी सांप को पहली बार वर्ष 1936 में उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी क्षेत्र में देखा गया था।
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सांप रेस्क्यू विशेषज्ञ सोनू कार्की ने बताया कि बृहस्पतिवार रात को शांतिपुरी नंबर तीन निवासी गोविंद सिंह कार्की के घर में सांप देखे जाने की सूचना मिली। इस पर वह टीम के साथ मौके पर पहुंचे लेकिन अंधेरा होने के कारण रेस्क्यू नहीं किया जा सका। इसके बाद शुक्रवार सुबह दोबारा टीम के साथ मौके पर पहुंचे और सांप की खोजबीन की। सकुशल रेस्क्यू कर सांप को जंगल में सुरक्षित छोड़ दिया।
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डौली रेंजर अनिल जोशी ने कहा कि रेस्क्यू किया गया सांप दुर्लभ रेड कोरल कुकरी सांप है। यह सांप उत्तराखंड में तीसरी बार देेेखा गया है। इससे पहले वर्ष 2015 में खटीमा में और वर्ष 2020 में नैनीताल में देेेखा गया था। अति दुर्लभ श्रेणी में आने वाला यह सांप विष रहित होता है।
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छोटे जीव-जंतु, चूहे, मेंढक इसका भोजन हैं। प्रभागीय वनाधिकारी संदीप कुमार ने बताया कि इस दुर्लभ प्रजाति के सांप के आंकड़े एकत्र किए जा रहे हैं, जिस पर भविष्य में रिसर्च की जाएगी। एक रिपोर्ट के अनुसार रेड कोरल कुकरी सांप को पहली बार वर्ष 1936 में उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी क्षेत्र में देखा गया था।