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रामलीलाः ऋषि कन्या वेदवती को देखकर सम्मोहित हुआ रावण, मिला श्राप
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रामलीला में रावण वेदवती संवाद में दिखाया गया कि लंकापति रावत भ्रमण करते हुए बियाबान जंगल में पहुंचता है, तो वहां ऋषि कन्या वेदवती पूजन कर रही थी। रावण उसे देखकर सम्मोहित हो जाता है और विवाह करने का आग्रह करता है, लेकिन वेदवती यह आग्रह ठुकराकर कहती है कि अगर शादी करुंगी तो सिर्फ भगवान विष्णु के साथ ही। रावण जबरन विवाह करने की हठ करता है तो आकाशवाणी से उसे चेतावनी मिलती है कि वेदवती साक्षात लक्ष्मी जी का अवतार है। अपनी मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करने के लिए जानबूझकर रावण उसका अपमान करता है और श्राप का भोगी बनता है।
प्राचीन बस स्टेंड वाली मुख्य रामलीला में दूसरे दिन रावण वेदवती संवाद, श्रवण कुमार की माता-पिता की भक्ति, रामजन्म, सीता जन्म की लीला का मंचन हुआ। दूसरे दिन मंचन का शुभारंभ मुख्य अतिथि समाजसेवी सतपाल गाबा, मीनाक्षी गाबा, मोहक गाबा व सौरभ बेहड़ ने किया।
इधर, रामलीला में श्रवण कुमार अपने अंधे माता पिता का अंधत्व दूर करने के लिए महर्षि वशिष्ठ से राय मशवरा कर उनको 63 तीर्थों की यात्रा करवाने के लिए काठ की कांवर बनाते हैं। जंगल में सरयू नदी के किनारे से जल भरने के दौरान राजा दशरथ का शब्द बेदी बाण श्रवण की छाती में घुस जाता है। मरते हुए वह राजा दशरथ से अपने माता पिता को पानी पिलाने का निवेदन करता है। उसके बाद श्रवण कुमार के माता-पिता राजा दशरथ को श्राप देते हैं। मंच का संचालन केवल बत्रा ने किया। वहां रामलीला कमेटी के अध्यक्ष पवन अग्रवाल, विजय अरोड़ा, सुशील गाबा, नरेश शर्मा, विजय जग्गा, सुभाष खंडेलवाल, अमित अरोड़ा, रमन अरोरा आदि थे।
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प्राचीन बस स्टेंड वाली मुख्य रामलीला में दूसरे दिन रावण वेदवती संवाद, श्रवण कुमार की माता-पिता की भक्ति, रामजन्म, सीता जन्म की लीला का मंचन हुआ। दूसरे दिन मंचन का शुभारंभ मुख्य अतिथि समाजसेवी सतपाल गाबा, मीनाक्षी गाबा, मोहक गाबा व सौरभ बेहड़ ने किया।
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इधर, रामलीला में श्रवण कुमार अपने अंधे माता पिता का अंधत्व दूर करने के लिए महर्षि वशिष्ठ से राय मशवरा कर उनको 63 तीर्थों की यात्रा करवाने के लिए काठ की कांवर बनाते हैं। जंगल में सरयू नदी के किनारे से जल भरने के दौरान राजा दशरथ का शब्द बेदी बाण श्रवण की छाती में घुस जाता है। मरते हुए वह राजा दशरथ से अपने माता पिता को पानी पिलाने का निवेदन करता है। उसके बाद श्रवण कुमार के माता-पिता राजा दशरथ को श्राप देते हैं। मंच का संचालन केवल बत्रा ने किया। वहां रामलीला कमेटी के अध्यक्ष पवन अग्रवाल, विजय अरोड़ा, सुशील गाबा, नरेश शर्मा, विजय जग्गा, सुभाष खंडेलवाल, अमित अरोड़ा, रमन अरोरा आदि थे।
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