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ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की अवधारणा के खिलाफ है नया नियम
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काशीपुर। कुमाऊं गढ़वाल चैंबर ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्री (केजीसीसीआई) अध्यक्ष अशोक बंसल ने कहा कि श्रम विभाग ने एक नोटिफिकेशन जारी कर उद्योगों में स्थापित बॉयलरों का थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन किया जाना अनिवार्य कर दिया है। जिसके कारण उद्योगों को विभिन्न परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
बृहस्पतिवार को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बंसल ने कहा कि थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन की बाध्यता को अपनाए जाने के बावजूद मुख्य बॉयलर निरीक्षक कार्यालय की निर्भरता को समाप्त नहीं किया गया है। बॉयलर की किसी भी प्रकार की मरम्मत के कार्य के लिए थर्ड पार्टी एजेंसी एवं मुख्य बॉयलर निरीक्षक कार्यालय दोनों के ही साथ पृथक-पृथक पत्राचार करना होगा। यह प्रावधान अत्यंत जटिल है और सरकार की ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ की अवधारणा के विरुद्ध है। कहा कि निरीक्षण करने वाली कोई भी थर्ड पार्टी एजेंसी उत्तराखंड में नहीं है। उनकी समय पर उपलब्धता और उन तक पहुंच बनाना जटिल काम है। सरकार को राज्य में सक्षम थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन एजेंसियों को स्थापित करने के बाद निरीक्षण की शर्त को लागू किया जाना चाहिए था। इससे उद्योगों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ रहा है। प्रति बॉयलर प्रति निरीक्षक की 60 हजार से 70 हजार रुपये तक लागत आती है जबकि उद्योगों में कई-कई बॉयलर लगे होते हैं। थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन की प्रक्रिया राज्य में किसी भी प्रकार से व्यापार सुगमता सिद्धांत का समर्थन नहीं करती है। अत: इसे उद्योगों की इच्छा पर एक विकल्प के रूप में अपनाए जाने पर छोड़ दिया जाना चाहिए। बंसल ने मांग करते हुए कहा कि चूंकि हमारा एक छोटा राज्य है और मुख्य बॉयलर निरीक्षक के स्तर से उद्योगों को प्रदान की जाने वाली सेवाएं संतोषजनक हैं अत: तीसरे पक्ष द्वारा निरीक्षण की प्रक्रिया को पूर्व की भांति विकल्प के रूप में ही रखा जाना चाहिए।
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बृहस्पतिवार को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बंसल ने कहा कि थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन की बाध्यता को अपनाए जाने के बावजूद मुख्य बॉयलर निरीक्षक कार्यालय की निर्भरता को समाप्त नहीं किया गया है। बॉयलर की किसी भी प्रकार की मरम्मत के कार्य के लिए थर्ड पार्टी एजेंसी एवं मुख्य बॉयलर निरीक्षक कार्यालय दोनों के ही साथ पृथक-पृथक पत्राचार करना होगा। यह प्रावधान अत्यंत जटिल है और सरकार की ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ की अवधारणा के विरुद्ध है। कहा कि निरीक्षण करने वाली कोई भी थर्ड पार्टी एजेंसी उत्तराखंड में नहीं है। उनकी समय पर उपलब्धता और उन तक पहुंच बनाना जटिल काम है। सरकार को राज्य में सक्षम थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन एजेंसियों को स्थापित करने के बाद निरीक्षण की शर्त को लागू किया जाना चाहिए था। इससे उद्योगों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ रहा है। प्रति बॉयलर प्रति निरीक्षक की 60 हजार से 70 हजार रुपये तक लागत आती है जबकि उद्योगों में कई-कई बॉयलर लगे होते हैं। थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन की प्रक्रिया राज्य में किसी भी प्रकार से व्यापार सुगमता सिद्धांत का समर्थन नहीं करती है। अत: इसे उद्योगों की इच्छा पर एक विकल्प के रूप में अपनाए जाने पर छोड़ दिया जाना चाहिए। बंसल ने मांग करते हुए कहा कि चूंकि हमारा एक छोटा राज्य है और मुख्य बॉयलर निरीक्षक के स्तर से उद्योगों को प्रदान की जाने वाली सेवाएं संतोषजनक हैं अत: तीसरे पक्ष द्वारा निरीक्षण की प्रक्रिया को पूर्व की भांति विकल्प के रूप में ही रखा जाना चाहिए।
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