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सिख समुदाय के लोगों का एसडीएम दफ्तर में प्रदर्शन
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सितारगंज में एसडीएम दफ्तर के बाहर हस्ताक्षर कर प्रदर्शन करते सिख समुदाय के लोग।
- फोटो : SITARGANJ
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कश्मीर और राजस्थान प्रांत में पंजाबी भाषा के तीसरे स्थान का दर्जा समाप्त करने से सिख समुदाय में आक्रोश है। सिख समुदाय के लोगों ने केंद्र सरकार के इस फैसले के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया और हस्ताक्षर अभियान चलाकर केंद्र सरकार से सभी धर्मों का सम्मान करने का आह्वान किया। उन्होंने सभी राज्यों में पंजाबी भाषा को तीसरा दर्जा देने की मांग को लेकर एसडीएम मुक्ता मिश्र को ज्ञापन सौंपा।
मंगलवार को एसडीएम को दिए ज्ञापन में सिख संगठन उत्तराखंड व उत्तर प्रदेश के हरविंदर सिंह हीरा ने कहा कि केंद्र सरकार सिखों की 70 फीसदी कुर्बानियां होने के बावजूद समाज के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है। कारगिल और चीन के साथ युद्ध में सिखों ने देश के लिए कुर्बानी दी जिनका सम्मान बरकरार रखने के लिए पंजाबी भाषा को हर राज्य में लागू करना होगा।
सतवंत सिंह बागी ने चेतावनी दी कि अगर सरकार समाज के साथ इंसाफ नहीं करती है तो इस आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने सिख समुदाय की भावनाओं को आहत होने से बचाने व पंजाबी भाषा को जम्मू कश्मीर, राजस्थान व उत्तराखंड में लागू करने की मांग की। इस दौरान लोगों ने सिख संगठन के बैनर पर हस्ताक्षर भी किए। वहां गुरदेव सिंह, हरजिंदर सिंह खालसा, सुरजीत सिंह, गुरदेव सिंह विर्क, सुखपाल सिंह, कुलविंदर सिंह, त्रिलोक सिंह, निर्मल सिंह आदि थे।
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मंगलवार को एसडीएम को दिए ज्ञापन में सिख संगठन उत्तराखंड व उत्तर प्रदेश के हरविंदर सिंह हीरा ने कहा कि केंद्र सरकार सिखों की 70 फीसदी कुर्बानियां होने के बावजूद समाज के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है। कारगिल और चीन के साथ युद्ध में सिखों ने देश के लिए कुर्बानी दी जिनका सम्मान बरकरार रखने के लिए पंजाबी भाषा को हर राज्य में लागू करना होगा।
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सतवंत सिंह बागी ने चेतावनी दी कि अगर सरकार समाज के साथ इंसाफ नहीं करती है तो इस आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने सिख समुदाय की भावनाओं को आहत होने से बचाने व पंजाबी भाषा को जम्मू कश्मीर, राजस्थान व उत्तराखंड में लागू करने की मांग की। इस दौरान लोगों ने सिख संगठन के बैनर पर हस्ताक्षर भी किए। वहां गुरदेव सिंह, हरजिंदर सिंह खालसा, सुरजीत सिंह, गुरदेव सिंह विर्क, सुखपाल सिंह, कुलविंदर सिंह, त्रिलोक सिंह, निर्मल सिंह आदि थे।
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