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Udham Singh Nagar News: पॉलीटेक्निक के छात्रों ने तैयार किया न्यूमैटिक लिफ्टिंग एवं मैटेरियल हैंडलिंग मॉडल
Fri, 11 Sep 2026 01:25 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Fri, 11 Sep 2026 01:25 AM IST
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काशीपुर। तकनीकी शिक्षा में नवाचार और व्यावहारिक ज्ञान का बेहतरीन उदाहरण पेश करते हुए पॉलीटेक्निक के छात्रों ने न्यूमैटिक लिफ्टिंग एवं मैटेरियल हैंडलिंग मॉडल तैयार किया है। यह मॉडल स्किल प्रोजेक्ट के तहत तैयार किया गया है। यह संपीड़ित वायु (कंप्रेस्ड एयर) से यांत्रिक गति उत्पन्न कर वस्तुओं को उठाने, आगे बढ़ाने और स्थानांतरित करने की औद्योगिक प्रणाली में कारगर साबित होगा।
राजकीय पॉलीटेक्निक की मैकेनिकल इंजीनियरिंग ब्रांच के छात्र ललित मटियाली, गौरव कोटिल्य और सुमित कुमार ने मैकेनिकल लिंकेज, फैब्रिकेशन और इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन के सिद्धांत पर यह मॉडल विकसित किया है। छात्रों ने बताया कि फैक्टरियों में बार-बार भारी सामान उठाने में बहुत मेहनत और समय लगता है। इसी को आसान बनाने के लिए यह मॉडल तैयार किया है। इसका ढांचा लोहे के पाइप से बना है। इसमें एक सिलिंडर लगा है, जो हवा भरने पर आगे-पीछे होता है। एक छोटी मोटर (कंप्रेशर) हवा को टंकी में भरती है। फिर पाइप के जरिये वह हवा सिलिंडर में जाती है। हवा का दबाव बढ़ते ही लिफ्ट ऊपर उठ जाती है और सामान को उठा लेती है। प्रधानाचार्य बीपी सिंह, विभागाध्यक्ष जीतेश सुंद्रियाल, शिक्षिका नेहा बोरा, मनमोहन आदि ने उन्हें बधाई दी।
निर्माण प्रक्रिया और लागत
छात्रों ने पहले औद्योगिक आवश्यकता का अध्ययन कर डिजाइन और आयाम तय किए। इसके बाद एमएस सेक्शन को काटकर फ्रेम बनाया। वेल्डिंग कर सिलिंडर को स्थापित किया और मैकेनिकल लिंक से जोड़ा। अंत में कंप्रेशर, टैंक और पाइप कनेक्शन कर लीकेज टेस्ट और अलग-अलग प्रेशर पर परीक्षण किया। मॉडल को तैयार करने में करीब 10 से 15 हजार रुपये का खर्च आया।
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इसके फायदे
छात्रों ने बताया कि फैक्टरियों में सामान उठाने, पैकिंग करने और असेंबली के काम में इसका खूब इस्तेमाल होता है। इसमें बिजली कम लगती है, चलाना आसान है और खराब भी कम होती है। इसमें सेंसर और ऑटोमेटिक स्विच लगाकर इसे पूरा ऑटोमेटिक भी बनाया जा सकता है।
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राजकीय पॉलीटेक्निक की मैकेनिकल इंजीनियरिंग ब्रांच के छात्र ललित मटियाली, गौरव कोटिल्य और सुमित कुमार ने मैकेनिकल लिंकेज, फैब्रिकेशन और इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन के सिद्धांत पर यह मॉडल विकसित किया है। छात्रों ने बताया कि फैक्टरियों में बार-बार भारी सामान उठाने में बहुत मेहनत और समय लगता है। इसी को आसान बनाने के लिए यह मॉडल तैयार किया है। इसका ढांचा लोहे के पाइप से बना है। इसमें एक सिलिंडर लगा है, जो हवा भरने पर आगे-पीछे होता है। एक छोटी मोटर (कंप्रेशर) हवा को टंकी में भरती है। फिर पाइप के जरिये वह हवा सिलिंडर में जाती है। हवा का दबाव बढ़ते ही लिफ्ट ऊपर उठ जाती है और सामान को उठा लेती है। प्रधानाचार्य बीपी सिंह, विभागाध्यक्ष जीतेश सुंद्रियाल, शिक्षिका नेहा बोरा, मनमोहन आदि ने उन्हें बधाई दी।
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निर्माण प्रक्रिया और लागत
छात्रों ने पहले औद्योगिक आवश्यकता का अध्ययन कर डिजाइन और आयाम तय किए। इसके बाद एमएस सेक्शन को काटकर फ्रेम बनाया। वेल्डिंग कर सिलिंडर को स्थापित किया और मैकेनिकल लिंक से जोड़ा। अंत में कंप्रेशर, टैंक और पाइप कनेक्शन कर लीकेज टेस्ट और अलग-अलग प्रेशर पर परीक्षण किया। मॉडल को तैयार करने में करीब 10 से 15 हजार रुपये का खर्च आया।
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इसके फायदे
छात्रों ने बताया कि फैक्टरियों में सामान उठाने, पैकिंग करने और असेंबली के काम में इसका खूब इस्तेमाल होता है। इसमें बिजली कम लगती है, चलाना आसान है और खराब भी कम होती है। इसमें सेंसर और ऑटोमेटिक स्विच लगाकर इसे पूरा ऑटोमेटिक भी बनाया जा सकता है।