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Udham Singh Nagar News: साहीवाल की कोख से जन्मी बद्री नस्ल की बछिया
Sat, 12 Sep 2026 12:42 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Sat, 12 Sep 2026 12:42 AM IST
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पंतनगर।
जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विवि के पशु चिकित्सा विज्ञान महाविद्यालय और एनडीआरआई करनाल के वैज्ञानिकों ने बद्री नस्ल के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। ओवम पिकअप (ओपीयू)-इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) तकनीक से तैयार उत्कृष्ट बद्री भ्रूण को साहीवाल गाय में प्रत्यारोपित किया गया। साहीवाल गाय ने शुक्रवार तड़के बद्री नस्ल की बछिया को जन्म दिया।
डाॅ. शिव प्रसाद ने बताया कि पंतनगर विवि के शैक्षणिक डेयरी फार्म में चयनित उत्कृष्ट बद्री गायों से ओवम पिकअप तकनीक के जरिए अंडाणु एकत्र किए गए। इन्हें प्रयोगशाला में 24 घंटे परिपक्व करने के बाद उत्तराखंड लाइवस्टॉक डेवलपमेंट बोर्ड से प्राप्त बद्री नस्ल के सांड के उत्कृष्ट वीर्य से आईवीएफ के जरिए निषेचित किया गया। विकसित बद्री भ्रूण को साहीवाल और संकर नस्ल की गायों के गर्भाशय में प्रत्यारोपित किया गया।
इस शोध में पंतनगर विवि के डाॅ. सुनील कुमार, डाॅ. संजय कुमार व डाॅ. मृदुला शर्मा और एनडीआरआई के डाॅ. नरेश एल सलोकर और डाॅ. एमके विशेष का योगदान रहा। संकर नस्ल की गाय भी आगामी पांच से सात दिनों में बद्री नस्ल के बच्चे को जन्म दे सकती हैं। कुलपति डा. शिवेंद्र कश्यप और डीन वेटरिनरी डाॅ. डी. कुमार ने वैज्ञानिकों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस तरह के अनुसंधान उत्तराखंड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पशुपालकों की आय को मजबूत करने में मददगार साबित हो सकते हैं।
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इंसेट : नौ माह 17 दिन में जन्मी बछिया
ओपीयू-आईवीएफ तकनीक से तैयार बद्री भ्रूण को साहीवाल गाय में नवंबर-2025 में प्रत्यारोपित किया गया था। उसके नौ माह 17 दिन बाद बद्री नस्ल की बछिया का जन्म हुआ। वैज्ञानिकों के अनुसार यह बद्री नस्ल के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
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जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विवि के पशु चिकित्सा विज्ञान महाविद्यालय और एनडीआरआई करनाल के वैज्ञानिकों ने बद्री नस्ल के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। ओवम पिकअप (ओपीयू)-इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) तकनीक से तैयार उत्कृष्ट बद्री भ्रूण को साहीवाल गाय में प्रत्यारोपित किया गया। साहीवाल गाय ने शुक्रवार तड़के बद्री नस्ल की बछिया को जन्म दिया।
डाॅ. शिव प्रसाद ने बताया कि पंतनगर विवि के शैक्षणिक डेयरी फार्म में चयनित उत्कृष्ट बद्री गायों से ओवम पिकअप तकनीक के जरिए अंडाणु एकत्र किए गए। इन्हें प्रयोगशाला में 24 घंटे परिपक्व करने के बाद उत्तराखंड लाइवस्टॉक डेवलपमेंट बोर्ड से प्राप्त बद्री नस्ल के सांड के उत्कृष्ट वीर्य से आईवीएफ के जरिए निषेचित किया गया। विकसित बद्री भ्रूण को साहीवाल और संकर नस्ल की गायों के गर्भाशय में प्रत्यारोपित किया गया।
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इस शोध में पंतनगर विवि के डाॅ. सुनील कुमार, डाॅ. संजय कुमार व डाॅ. मृदुला शर्मा और एनडीआरआई के डाॅ. नरेश एल सलोकर और डाॅ. एमके विशेष का योगदान रहा। संकर नस्ल की गाय भी आगामी पांच से सात दिनों में बद्री नस्ल के बच्चे को जन्म दे सकती हैं। कुलपति डा. शिवेंद्र कश्यप और डीन वेटरिनरी डाॅ. डी. कुमार ने वैज्ञानिकों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस तरह के अनुसंधान उत्तराखंड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पशुपालकों की आय को मजबूत करने में मददगार साबित हो सकते हैं।
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इंसेट : नौ माह 17 दिन में जन्मी बछिया
ओपीयू-आईवीएफ तकनीक से तैयार बद्री भ्रूण को साहीवाल गाय में नवंबर-2025 में प्रत्यारोपित किया गया था। उसके नौ माह 17 दिन बाद बद्री नस्ल की बछिया का जन्म हुआ। वैज्ञानिकों के अनुसार यह बद्री नस्ल के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है।