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तीन साल पहले गया ‘पृथ्वी’ लौटकर नहीं आया
कुंदन बिष्ट /अमर उजाला ब्यूरो, ऊध्ामसिंह नगर
Updated Sun, 09 Apr 2017 12:29 AM IST
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आख़िर समंदर का स्तर कितना ऊंचा उठ सकता है?
- फोटो : BBC
कुमाऊं में जिला ऊधम सिंह नगर में ही सबसे अधिक उद्योग-धंधे हैं। उद्योगों से निकलने वाले प्रदूषण की मॉनीटरिंग, सैंपल भरने की जिम्मेदारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के कर्मचारियों की है, लेकिन विडंबना यह है कि जिले में सैंपल की जांच को एक भी लैब नहीं है। एक ‘पृथ्वी’ वाहन था वह भी अब देहरादून मुख्यालय में है। ऐसे में जांच को सैंपल हल्द्वानी भेजे जाते हैं, इसकी रिपोर्ट आने में ही हफ्ताभर लग जाता है।
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जिले में रुद्रपुर, सितारंगज, काशीपुर में सबसे अधिक उद्योग है। उद्योगों की मॉनीटरिंग के लिए नवंबर 2011 में काशीपुर में उत्तराखंड पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का क्षेत्रीय कार्यालय खोला गया था। तब कार्यालय को करीब 15 लाख रुपये की लागत का लैब से सुसज्जित ‘पृथ्वी’ वाहन दिया गया था। इस वाहन की खासियत थी कि यह मौके पर ही फैक्ट्री से निकलने वाले पानी, नदियों के पानी की सैंपल भर जांच कर लेता था। वाहन में एक टेक्नीशियन भी तैनात रहता था।
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बताया जाता है कि वर्ष 2014 में वाहन में मौजूद लैब में खराबी आने लगी। सूत्र बताते है कि मशीनों को ठीक करने के लिए राशि न मिलने से यह वाहन महीनों तक खड़ा रहा। बाद में इस देहरादून मुख्यालय भेज दिया गया। अब स्थिति यह है कि उद्योगों के सैंपल को जांच के लिए हल्द्वानी भेजा जा रहा है। इसमें जहां आने-जाने में समय बर्बाद होता है वहीं सैंपल की जांच रिपोर्ट आने में भी एक हफ्ते का समय लग जाता है।
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‘पृथ्वी’ वाहन में मौके पर ही सैंपल भर जांच कर ली जाती थी, लेकिन तकनीकी खराबी आने के चलते वाहन को वर्ष 2014 में देहरादून मुख्यालय भेज दिया गया। वर्तमान में सैंपल की जांच हल्द्वानी लैब में की जा रही है। रिपोर्ट आने में थोड़ा समय लग जाता है। शीघ्र ही गढ़वाल मंडल और कुमाऊं मंडल को एक-एक ‘पृथ्वी’ वाहन मिलने की उम्मीद है। इससे सैंपलों की त्वरित जांच करने में मदद मिल सकेगी।
- एसपी सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी, उत्तराखंड पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, काशीपुर।