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आरक्षण के लिए धार्मिक पाबंदी को हटाने की सरकार से की मांग
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खटीमा में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ऑफ इंडिया के सम्मेलन में मंचासीन अतिथिगण।
- फोटो : KHATIMA
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मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ऑफ इंडिया की उत्तराखंड इकाई के सम्मेलन में कई प्रस्ताव पारित किए गए। इस दौरान केंद्र सरकार से आरक्षण के लिए धार्मिक पाबंदी हटाने की पुरजोर मांग की गई।
रविवार को आपाजी मैरिज लॉन में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ऑफ इंडिया का पहला राज्यस्तरीय सम्मेलन आयोजित किया गया। इसमें प्रदेश भर के उलेमा, दरगाहों के सज्जादगान और बुद्धिजीवी लोगों ने शिरकत की। सम्मेलन में मुख्य अतिथि के तौर पर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष कारी मोहम्मद यूसुफ अजीजी, राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. मुईन अहमद खान, राष्ट्रीय प्रवक्ता रियाजुद्दीन और जावेद अहमद शामिल हुए। उन्होंने समाज में फैल रही कुरीतियों को लेकर लोगोें को आगाह किया। साथ ही मस्जिद, मदरसों और जलसों के जरिये नशा, दहेज आदि के खिलाफ अभियान चलाकर लोगों को जागरूक करने की जरूरत बताई।
सम्मेलन में कई प्रस्ताव पारित किए गए। तय किया गया कि देश के संविधान के अनुसार बिना किसी भेदभाव के इंसानियत और समाज के विकास एवं तरक्की के लिए बोर्ड और उसके पदाधिकारी बेहतर से बेहतर खिदमात अंजाम देंगे। मदरसे की अरबी फारसी की परीक्षाओं को समकक्षता देने, संविधान की धारा 341 के अनुसार आरक्षण के लिए धार्मिक पाबंदी को हटाने की सरकार से मांग की जाएगी।
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मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ऑफ इंडिया देश में शांति और भाईचारे को कायम रखने के लिए हरसंभव प्रयास करेगा। ये प्रस्ताव भी पास किया गया कि बोर्ड से जुड़ेउलमा इत्तेहाद एहले सुन्नत के लिए काम करेंगे। बोर्ड के उत्तराखंड संयोजक मौलाना इरफानुल हक कादरी और हज कमेटी के पूर्व अध्यक्ष मौलाना जाहिद रजा रिजवी ने मेहमानों का शुक्रिया अदा किया।
इस मौके पर मुफ्ती शमीम आलम, मौलाना इमामुद्दीन, मुफ्ती मोहम्मद मुकीम रजा कादरी, मुफ्ती फरीद, मौलाना तारिक मिस्बाही, मुफ्ती कासिम, मौलाना रईसुद्दीन, कारी सईदुर्रहमान, कारी इरशाद, उस्मान अल्वी, मौलाना अशरफुल कादरी, हसनैन खतीबी, वकील अहमद, डॉ. सोनू खान, नासिर खान, जीशान मलिक आदि थे।
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रविवार को आपाजी मैरिज लॉन में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ऑफ इंडिया का पहला राज्यस्तरीय सम्मेलन आयोजित किया गया। इसमें प्रदेश भर के उलेमा, दरगाहों के सज्जादगान और बुद्धिजीवी लोगों ने शिरकत की। सम्मेलन में मुख्य अतिथि के तौर पर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष कारी मोहम्मद यूसुफ अजीजी, राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. मुईन अहमद खान, राष्ट्रीय प्रवक्ता रियाजुद्दीन और जावेद अहमद शामिल हुए। उन्होंने समाज में फैल रही कुरीतियों को लेकर लोगोें को आगाह किया। साथ ही मस्जिद, मदरसों और जलसों के जरिये नशा, दहेज आदि के खिलाफ अभियान चलाकर लोगों को जागरूक करने की जरूरत बताई।
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सम्मेलन में कई प्रस्ताव पारित किए गए। तय किया गया कि देश के संविधान के अनुसार बिना किसी भेदभाव के इंसानियत और समाज के विकास एवं तरक्की के लिए बोर्ड और उसके पदाधिकारी बेहतर से बेहतर खिदमात अंजाम देंगे। मदरसे की अरबी फारसी की परीक्षाओं को समकक्षता देने, संविधान की धारा 341 के अनुसार आरक्षण के लिए धार्मिक पाबंदी को हटाने की सरकार से मांग की जाएगी।
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मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ऑफ इंडिया देश में शांति और भाईचारे को कायम रखने के लिए हरसंभव प्रयास करेगा। ये प्रस्ताव भी पास किया गया कि बोर्ड से जुड़ेउलमा इत्तेहाद एहले सुन्नत के लिए काम करेंगे। बोर्ड के उत्तराखंड संयोजक मौलाना इरफानुल हक कादरी और हज कमेटी के पूर्व अध्यक्ष मौलाना जाहिद रजा रिजवी ने मेहमानों का शुक्रिया अदा किया।
इस मौके पर मुफ्ती शमीम आलम, मौलाना इमामुद्दीन, मुफ्ती मोहम्मद मुकीम रजा कादरी, मुफ्ती फरीद, मौलाना तारिक मिस्बाही, मुफ्ती कासिम, मौलाना रईसुद्दीन, कारी सईदुर्रहमान, कारी इरशाद, उस्मान अल्वी, मौलाना अशरफुल कादरी, हसनैन खतीबी, वकील अहमद, डॉ. सोनू खान, नासिर खान, जीशान मलिक आदि थे।