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सपने टूटे, लाखों के विकास कार्यों पर भी पानी फिरेगा

Sat, 08 Sep 2018 12:13 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो  खटीमा।
अमर उजाला ब्यूरो  खटीमा। Updated Sat, 08 Sep 2018 12:13 AM IST
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planning will not be executed in village
खटीमा के बग्घा चौवन की सड़क और गांव का दृश्य। - फोटो : amar ujala

खटीमा। सांसद आदर्श ग्राम सरपुड़ा बग्घा चौवन का सर्वांगीण विकास कर एक आदर्श ग्राम बनाने के उद्देश्य से 2014 में पूर्व मुख्यमंत्री एवं सांसद भगत सिंह कोश्यारी ने इसे गोद लिया था। वन भूमि पर काबिज लगभग एक हजार परिवार आदर्श सांसद ग्राम बनने की घोषणा से स्वयं को मुख्यधारा से जोड़ने का सपना संजोए हुए थे। हाईकोर्ट के ताजा फैसले से उनके सपने तो टूट ही गए यहां सांसद और विधायक द्वारा किए गए लाखों के कामों पर भी पानी फिर जाएगा।

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सांसद कोश्यारी ने अपने चार वर्ष के कार्यकाल में बग्घा को विकास के लिए करीब 70 लाख निर्गत किए हैं। इसमें बारातघर, सीसी रोड, यात्री शेड, इंटर कालेज को कंप्यूटर फर्नीचर आदि काम शामिल हैं। विधायक पुष्कर सिंह धामी ने भी अपने राजनैतिक गुरु कोश्यारी द्वारा गोद लिए गांव को पिछले पांच साल के कार्यकाल में लगभग 40 लाख रुपये निर्गत किए।
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इनमें 15 लाख खड़ंजे, ढाई लाख सीसी मार्ग, पांच लाख धार्मिक स्थलों के सौंदर्यीकरण, तीन लाख रामलीला मंच एवं छठ मैया पूजा स्थल के लिए दिए गए। सरपुड़ा में सीसी मार्ग एवं नालियों का निर्माण कराया गया था। बग्घा में अब तक सहकारिता विभाग, पोस्टल विभाग, समाज कल्याण विभाग, उत्तराखंड पावर कारपोरेशन, भारत संचार निगम, सिंचाई विभाग, उत्तराखंड जल संस्थान, बाल विकास परियोजना, शिक्षा विभाग, कृषि विभाग दुग्घ उत्पादक सहकारी संघ आदि शामिल हैं।
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तो उजड़ जाएगा ‘मिनी इंडिया’
खटीमा। सरपुड़ा बग्घा का क्षेत्रफल लगभग एक हजार हेक्टेयर है। इसमें एक अकेली बग्घा चौवन का रकबा लगभग 600 हेक्टेयर है। बग्घा चौवन में साधूनगर, नौसर, बंडिया, दिल्ली प्लाट, भुड़िया-1, भुड़िया-2, फागपुर, बगुलिया, चकरपुर व कंट्रोल लाइन के नाम से 10 लेन हैं और प्रत्येक में दो किमी लंबी सड़कें हैं। सात किमी की परिधि में रिंग रोड सहित बग्घा चौवन में कुल 30 किमी सड़कों का जाल बिछा हुआ है। बग्घा चौवन में जहां के लोग आकर बसे उस लेन को वहीं नाम दे दिया गया है। यहां हर वर्ग के लोग बसे हैं इसलिए इसे मिनी इंडिया भी कहा जाता है। बता दें कि राजस्व अभिलेखों में राजस्व ग्राम पंचायत सरपुड़ा का क्षेत्रफल 383.5964 हेक्टेयर दर्ज है। जबकि वन भूमि पर बसे बग्घा चौवन का क्षेत्रफल वन विभाग के रिकार्ड में 500 हेक्टेयर से अधिक है। वन विभाग के अधिकारी बताते हैं कि वर्तमान में और अधिक जमीन पर कब्जा किया गया है।

70 के दशक में टोंगिया पद्यति पर बग्घा में बसाए गए थे 500 परिवार
खटीमा। सुरई वनरेंज कंपार्ट बग्घा चौवन की खाली पड़ी वनभूमि 1970 के दशक में टोंगिया पद्यति के आधार पर तत्कालीन भूमिहीन परिवारों को खाने- कमाने को दी गई थी। तब शर्त थी कि वनस्पतिविहीन बग्घा चौवन में बसाए जाने वाले अपनी खेती बाड़ी के साथ ही इसमें पेड़-पौधे उगाएंगे और जब पेड़ बड़े हो जाएंगे तो जमीन वन विभाग वापस ले लेगा ओर यहां बसे परिवारों को सरकार अन्यत्र बसाएगी।


तत्कालीन कांग्रेस पार्टी के विधायक इंद्रलाल साह, डीएम एनपी त्रिपाठी पीलीभीत, वनसचिव वन अनुभाग दो के प्रयास से शासनादेश जारी होने पर टोंगिया पद्यति पर लगभग पांच सौ भूमिहीन परिवारों को यहां विभिन्न लाइनों में वनभूमि आवंटित की गई। शासनादेश की प्रति डीएम नैनीताल एवं पीलीभीत को जारी हुई थी। वर्तमान में बग्घा वनभूमि पर लगभग एक हजार परिवार वर्ष 70 के दशक से काबिज हैं। 

आदर्श सांसद ग्राम बनने के बाद भी बग्घा चौवन में नहीं बही विकास की गंगा
वनभूमि पर काबिज बग्घा वासियों का वर्ष 1970 के दशक से राजनैतिक लाभ लेने के लिए इस्तेमाल किया गया है। वनभूमि पर होने की वजह से सुविधाओं के अभाव में बग्घा चौवन के राजस्व ग्राम सरपुड़ा से जोड़कर इसे लाभ दिलाया गया। इसमें कांग्रेस एवं भाजपा के साथ ही बसपा की पूरी भागीदारी रही है।

वर्ष 2014 में भाजपा सांसद भागत सिंह कोश्यारी एवं विधायक पुष्कर सिंह धामी ने बग्घा को आदर्श सांसद ग्राम घोषित कर यहां विकास की गंगा बहाने का प्रयास किया लेकिन विकास के नाम पर करोड़ों खर्च करने के बाद भी बग्घा वासियों को सुलभ शौचालयों का लाभ तक नहीं मिला सका और स्वच्छ भारत मिशन अभियान में पलीता लगने से आज भी ग्रामीण बोतल एवं डिब्बे लेकर खुले में शौच जाने को मजबूर हैं।

बग्घा खाली हुआ तो दर्जनों गांवों के अस्तित्व पर उठेंगे सवाल
खटीमा। उच्च न्यायालय की डबल बेंच द्वारा करीब सात सौ हेक्टेअर क्षेत्रफल में बसे बग्घा चौवन को तीन माह में खाली कराने के आदेश जारी किया है। ऐसे में विकासखंड के उन दर्जनों गांवों के अस्तित्व पर भी सवालिया निशान खड़े हो जाएंगे जो वनभूमि पर बसे हुए हैं। कई गांव के अतिक्रमण हटाने गई पुलिस एवं वन व राजस्व विभाग के कर्मचारियों की संयुक्त टीम को ग्रामीणों के विरोध के चलते मुंह की खानी पड़ी और टीम भागने को मजबूर हुई थी। उच्च न्यायालय के आदेश पर यदि बग्घा चौवन खाली होता है तो इन गांवों को भी कोई नहीं बचा सकेगा। 


 आबादी 3912 और करीब दो हजार हेक्टेयर रकबा
खटीमा। एसडीएम विजयनाथ शुक्ला ने 9 अप्रैल 2018 को जिलाधिकारी को पत्र भेजकर कहा था कि 30 मार्च 2018 को ग्राम सरपुड़ा के तोक बग्घा 54 को राजस्व ग्राम घोषित करने के संबंध में आख्या उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। जिसके अनुपालन में अवगत कराया कि प्रस्तावित राजस्व ग्राम बग्घा 54 की आबादी कुल 3912 पर अनुसूचित जाति 1250 व अनुसूचित जन जाति शून्य व सामान्य 2662 है। जबकि परिवारों की संख्या 776, क्षेत्रफल अनमानित दो हजार हेक्टेयर, क्षेत्र में प्राथमिक स्कूल दो, जूनियर हाईस्कूल-इंटर कालेज एक-एक, आंगनबाड़ी केंद्र सात व एक पोस्टआफिस आदि हैं।

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