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सुरेंद्र के साथ पंढेर को मिले फांसी की सजा
Sun, 03 Mar 2019 12:36 AM IST
अरुण कुमार
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो
Published by: अरुण कुमार
Updated Sun, 03 Mar 2019 12:36 AM IST
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आरोपी को हुई फांसी।
- फोटो : amar ujala
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देश के चर्चित निठारी कांड में गाजियाबाद की विशेष सीबीआई कोर्ट ने दोषी सुरेंद्र कोली को फांसी की सजा सुनाई है। सुरेंद्र को दसवें केस में फांसी की सजा सुनाई गई है। निठारी कांड की शिकार हुई एक बच्ची के परिजन दरिंदे सुरेंद्र के साथ ही दूसरे आरोपी मोनिंदर सिंह पंढेर को भी फांसी की सजा की वकालत कर रहे हैं।
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उनका कहना है कि निठारी कांड में सुरेंद्र और पंढेर बराबर के दोषी हैं। जब तक दोनों को फांसी नहीं होती तब तक उनकी बेटियाें की आत्मा को शांति नहीं मिलेगी। पंढेर धनबल से मामला लंबा खिंचवा रहा है और डर है कि कहीं वह फांसी के फंदे से बच न निकले।
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शनिवार को अमर उजाला से हुई बातचीत में निठारी कांड में लाडली को गंवाने वाले गदरपुर के एक गांव में रहने वाले पिता का दर्द उभर आया। उन्होंने कहा कि 13 साल से वे न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं। जब भी निठारी का जिक्र आता है तो बेटियाें की याद में मन पीड़ा से भर आता है। मासूम बेटी की छवि आंखों के सामने घूमने लगती है।
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बेटी परिवार में सबसे बड़ी थी। अगर वह जिंदा होती तो घर परिवार में खुशियां होतीं। मजदूरी कर परिवार का गुजर बसर कर रहे पिता ने कहा कि जब तक दोनों आरोपियों को फांसी की सजा नहीं होगी तब तक उनके दिल को चैन नहीं मिलेगा।
उन्होंने कहा कि सुरेंद्र को सबसे पहले 13 फरवरी 2009 को फांसी की सजा हुई थी और पूर्व में नौ मामलों में फांसी की सजा हो चुकी है। लेकिन तबसे लगातार मामला टल ही रहा है। कहा कि न्याय प्रणाली पर उन्हेें पूरा भरोसा है। लेकिन जेहन में डर भी है कि कहीं पंढेर अपने पैसे के दम पर बच न जाए।
पंढेर धनबल से न्याय प्रक्रिया को प्रभावित करता रहा है।
सुरेंद्र के साथ ही पंढेर भी बराबर का गुनहगार है। पूरा परिवार चाहता है कि बेटी के हत्यारे फांसी पर चढ़े। कहा कि इतने साल तक खिंचे मामले में अब तक आरोपियों को फांसी नहीं मिलने से वहे आहत जरूर हैं।