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बंकरों में खुद को अजेय मान रहे पाक सैनिकों ने टेके थे घुटने : सूबेदार मेजर दानी राम

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Mon, 16 Dec 2019 01:00 AM IST
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Pak soldiers, who consider themselves invincible in bunkers, had kneeled
खटीमा। ऊपर से टायर बिछे बंकरों के अंदर 80 पूर्वी पाकिस्तान के सैनिक अपने को अजेय मान रहे थे। अक्सर सीआरपीएफ के चौकसी कैपों में फायरिंग करते थे। तीन दिसंबर को पीछे से आकर गार्ड बटालियन ने बंकरों पर धावा बोला, लेकिन कामयाब नहीं हो पाए। चार-पांच भारतीय सैनिक शहीद हो गए। कवरिंग टीम के आगे निकलने से हार हुई, लेकिन चार दिसंबर की रात को भारतीय जवानों ने हवाई जहाजों से बंकरों पर बम गिराए। दो ओर से 250-250 सैनिकों ने धावा बोला तब पांच दिसंबर को बंकरों से घुटने टेक चुके सभी 80 दुश्मन सैनिकों को इलाहाबाद (प्रयागराज) पहुंचाया था। तब बीएसएफ नहीं थी। सीआरपीएफ ही मेघालय की तुरा से सटी बांग्लादेश की सीमा पर चौकसी में तैनात थी। बीएसएफ को तो 1972 में तैनात किया गया।
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विजय दिवस पर पुरानी यादें ताजा होते ही मूल रूप से पिथौरागढ़ के गंगोलीहाट, ग्राम चनौला और हाल निवासी चकरपुर वन चेतना मैदान के पास बिल्हरी निवासी सीआरपीएफ के रिटायर्ड 79 वर्षीय सूबेदार मेजर दानी राम की भुजाएं फड़क उठीं। बोले, 1970 में उनकी 48 सीआरपीएफ बटालियन को मेघालय के तुरा से सटे बांग्लादेश सीमा पर निगरानी का जिम्मा सौंपा गया था। 26 मार्च 1971 को बांग्लादेश की स्वतंत्रता की घोषणा के साथ मुक्ति वाहिनी का गठन हुआ तो तुरा सीमा पर उनकी बटालियन मुक्ति वाहिनी का सहयोग करती थी। वहां बांग्लादेश का डालू और जमाल गांव था। तब वह हवलदार थे, लगातार गश्त और निगरानी करते थे।
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सीमा पर पूर्वी पाकिस्तानी सेना के अस्सी 80 जवानों का बंकर नाक पर दम किए था। उनको याद है, दो दिसंबर को पीछे से भारतीय आर्टिलरी ने बंकरों में बम बरसाए तो जवाब में वहां से बम उनके कैंप में गिरे, तब सिर्फ दस मीटर दूर साथी नायक राजेंद्र बम से घायल हुआ। फिर चार दिसंबर को हमारी ओर से हमला सफल रहा। छह दिसंबर को मुक्ति सेना के साथ उन्होंने भी तुरा बार्डर पर टू इंच मोर्टार को कब्जे में लिया, पूर्वी पाकिस्तानी सैनिक भाग खड़े हुए थे। फिर 16 दिसंबर को विजय दिवस ही आ गया।
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93 हजार से अधिक पाक सैनिकों ने आत्मसमर्पण कर दिया। उनकी बटालियन भी 1972 में बीएसएफ के आते ही हटा दी। तब उनके कंपनी कमांडर केडी रेड्डी थे। उनको पूर्वी सीमा पर तैनाती पर पूर्वी स्टार के साथ तीन सेवा मेडल, 25 वें स्वतंत्रता दिवस मेडल मिला। उत्तर पूर्वी मेघालय के पश्चिमी गोरो हिल्स का जिला तुरा शहर अब राज्य का एक प्रमुख शहर है।
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