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बरसात के बाद बढ़ने लगा डायरिया का प्रकोप
ब्यूरो/अमर उजाला, ऊधमसिंह नगर
Updated Mon, 11 Jul 2016 12:12 AM IST
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तराई में बाढ़ का कहर तो टल गया, लेकिन लोगों को डायरिया जैसी बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है। जिला अस्पताल से मिले आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले पांच दिनों के भीतर 50 से अधिक डायरिया पीड़ितों को भर्ती कराया, जिनमें से 12 लोगों की गंभीर हालत को देखते हुए हायर सेंटर रेफर किया। कई मरीज अब भी भर्ती हैं।
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पिछले पांच दिनों से तराई के अलावा शहर में मूसलाधार बारिश के कारण कल्याणी नदी उफान पर थी और जलस्तर बढ़ने के कारण शहर की कई मलिन बस्तियां इसकी चपेट में आ गईं। जलस्तर घटने पर बाढ़ के प्रकोप से तो लोग बच गए, लेकिन जलभराव और क्षेत्र से सटी बस्तियों में डायरिया बीमारी ने दस्तक देेनी शुरू कर दी है।
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जिला अस्पताल में पड़ताल करने पर पता चला कि पांच दिन में 50 डायरिया पीड़ित आए हैं, 12 को हल्द्वानी रेफर कर दिया। वहीं कुछेक को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई। वर्तमान में आपातकालीन कक्ष में एक बच्चे सहित दो डायरिया पीड़ित भर्ती हैं, जिनका उपचार चल रहा है। आशंका है कि जैसे ही बरसात के बाद मौसम खुलेगा वैसे ही डायरिया पीड़ितों की संख्या में इजाफा होगा।
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स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से मुस्तैद है : डा. जोशी
मुख्य चिकित्साधिकारी डा. एचसी जोशी ने बताया कि जिस प्रकार डायरिया पीड़ितों की संख्या में बढ़ोतरी होती है। उसके लिए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से मुस्तैद है। विभाग ने डायरिया रोग से संबंधित सभी दवाएं और ग्लूकोज इकट्ठा कर लिया है और सीएचसी को वितरण की प्रक्रिया जारी है। इसके अलावा पीड़ितों की संख्या में इजाफा होने पर जिला अस्पताल में दो डायरिया वार्ड बनाए जा चुके हैं।
सावधानी हटी तो बीमारी पकड़ेगी
जिला अस्पताल के फिजिशियन डा. एमपी तिवारी ने बताया कि डायरिया असावधानी बरतने से होने वाली बीमारी है। यदि सावधानी बरती जाए, तो इस बीमारी से बचा जा सकता है। अक्सर यह बीमारी बरसात के बाद या फिर अत्यधिक गंदगी से होती है। इसके लिए लोगों को ताजा खाना, हाथ धोकर खाना खाएं, फिल्टर पानी का प्रयोग करें, सड़े-गले फल-सब्जी को नहीं खाएं और ग्लूकोज का सेवन नियमित करें। तभी डायरिया से बचा जा सकता है।
कल्याणी किनारे बसे लोग आ सकते हैं चपेट में
मूसलाधार बारिश के बाद कल्याणी नदी से सटे जगतपुरा, भूतबंगला, संजयनगर खेड़ा, पहाड़गंज, रंपुरा क्षेत्र के वह लोग जो कल्याणी नदी के किनारे बसे हैं डायरिया की चपेट में आने की संभावना बढ़ सकती है। बरसात के बाद अक्सर नदी किनारे गंदगी एकत्र हो जाती है और कूड़ा कचरा सड़ने लगता है। ऐसे में डायरिया संक्रमण तेजी से पनपता है। जरा सी असावधानी से यह संक्रमण लोगों में फैल सकता है।
उल्टी-दस्त होने पर डॉक्टर से करें संपर्क
डायरिया में अक्सर उल्टी-दस्त शुरू होने लगता है। इस कारण रोगग्रस्त के शरीर में पानी की कमी आ जाती है और उसका वजन धीरे-धीरे गिरना प्रारंभ हो जाता है। शरीर में पानी की कमी और भूख नहीं लगना। इंसानी जिंदगी को खतरे में डाल सकता है। ऐसे में उल्टी-दस्त की शिकायत होने पर लापरवाही नहीं बरतें और डॉक्टर से परामर्श लेने के बाद दवाओं का सेवन करना चाहिए। डायरिया पीड़ित को लगातार ग्लूकोज का पानी नियमित देना चाहिए।