Uttarakhand: 25 साल तक कोर्ट को गुमराह करता रहा हत्या का आरोपी, आखिर फूट ही गया भांडा; जानें पूरा मामला
Rudrapur: हत्या का आरोपी 1998 से पुलिस और कोर्ट की आंखों में धूल झौंकता रहा। आखिरकार उसका भांडा फूट ही गया। मामला उत्तराखंड बनने से पहले का है।
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ढाई दशक पहले एक घर में हुई चोरी के दौरान हत्या के मामले में शामिल एक अभियुक्त ने सजा से बचने के लिए पुलिस रिकार्ड में नाम पता गलत दर्ज करा दिया था। कोर्ट के वारंट निकलने पर जब पुलिस ने छानबीन की तो अभियुक्त का असली पता और नाम तस्दीक हो गया। पुलिस ने अभियुक्त के खिलाफ केस दर्ज किया है।
पुलिस के अनुसार वर्ष 1998 में रुद्रपुर में एक घर में चोरी करने घुसे तीन अभियुक्तों ने विरोध करने पर एक व्यक्ति की हत्या कर दी थी। पुलिस ने अभियुक्तों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था और कोर्ट में चली सुनवाई में तीनों को दोषमुक्त कर दिया गया था।
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इसके खिलाफ सरकार ने हाईकोर्ट में अपील की थी और कोर्ट ने तीनों अभियुक्तों को तलब किया था। दो न्यायालय में पेश हो गए थे लेकिन फूलचंद उर्फ कल्लू निवासी ऊंचागांव थाना शीशगढ़ बरेली हाजिर नहीं हुआ। इसके बाद कोर्ट के वारंट पर जब पुलिस रिकार्ड में दर्ज पते पर पहुंची तो फूलचंद तो मिला, लेकिन वह कभी जेल नहीं गया। कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया तो एसआई अशोक कांडपाल ने इस मामले में जेल गए अभियुक्त दिनेश उर्फ पप्पू निवासी ढेलावाला, थाना रेहड़, बिजनौर और हाल निवासी मानपुर, काशीपुर से पूछताछ के साथ ग्राम खमरिया आजम, थाना मिलक जिला रामपुर में ग्रामीणों से जानकारी ली।
ग्रामीणों ने 1997-98 में फूलचंद उर्फ कल्लू के नाम से कल्याण राम उर्फ कल्लू निवासी ग्राम ऊंचागांव, रुस्तम नगर थाना शीशगढ़ के जेल जाने की बात कही थी। जब पुलिस दिनेश को लेकर कल्लू के पास पहुंची तो दिनेश ने उसे पहचान लिया। कल्याण ने भी फूलचंद उर्फ कल्लू के नाम से जेल जाना स्वीकारा जिसके बाद कल्याण के अंगुलियों के छाप हल्द्वानी जेल में उपलब्ध फूलचंद के अंगुलियों के निशान से मिल गए।
इस पर एसएचओ धीरेंद्र कुमार ने कल्याण के खिलाफ असली नाम व पता छिपाने, तत्कालीन विवेचक और कोर्ट को गुमराह करने का केस दर्ज किया है। एसपी सिटी मनोज कत्याल ने बताया कि कल्याण की गिरफ्तारी की जा रही है।