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अपनों ने ठुकराया, भुखमरी ने ले ली जान
आरडी खान काशीपुर।
Updated Sun, 24 Jun 2018 11:42 PM IST
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काशीपुर में मृतका राधा का फाइल फोटो।
- फोटो : amar ujala
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शरीर ने साथ देना क्या छोड़ा अपनों ने भी नि:संतान राधा से नजरें फेर ली। कई दिनों की भुखमरी के बाद अपने ही मकान के भीतर बेसुध हालत में उन्हें देख एक छात्रा ने एंबुलेंस बुलाकर राधा को राजकीय अस्पताल भिजवाया। देवर और जेठ के बच्चों के भरे पूरे परिवार के होने के बावजूद अस्पताल में दम टूटने तक वह अपनी पहचान को मोहताज रही।
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मूलत: बिहार निवासी राधा की किस्मत ने हमेशा से ही दगा दिया। कहने को उसकी चार शादियां हुई, लेकिन संतान नहीं होने के कारण हर बार पतियों ने उसे छोड़ दिया। ऐसे में फलों का ठेका लेने वाले पूरन सिंह पुत्र मोहन सिंह ने उसे अपनाया। ससुर के मकान के चौथाई हिस्से में उसने जीवन पर्यंत समर्पण भाव से पति धर्म निभाया। दस साल पहले उसके पति पूरन की मौत हो गई।
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एक जेठ और दो देवरों के आठ बेटे और पांच बेटियां है। देवरानियां, उनकी पुत्र वधूएं और नाती-पोते अलग से हैं। सब पैतृक मकान में ही रहते हैं। इतना बड़ा कुनबा होने के बावजूद अपनी आजीविका के लिए राधा फल बेचने का काम करती थी। बूढ़ी काया पर तरस खाकर कुछ लोग उससे नियमित रूप से फल खरीदते थे। पुरानी सब्जी मंडी निवासी आयुषी नागर भी राधा से फल खरीदती थी और अक्सर हालचाल जानने उनके कमरे पर भी जाती थी।
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काफी दिन बाहर रहने के बाद जब आयुषी 14 जून को राधा को देखने पहुंची तो उसकी रूह कांप उठी। उसने फौरन उसे अस्पताल में भर्ती कराया। इस बीच भी उसे देखने परिवार से कोई नहीं आया। बारह दिन भर्ती रहने के बाद भी अस्पताल प्रशासन उसकी पहचान नहीं कर पाया। हालांकि आयुषी व उसकी मां कुमकुम लगातार उसकी खैर-खबर लेती रहीं। हालत बिगड़ने पर डॉक्टर ने राधा को सुशीला तिवारी अस्पताल हल्द्वानी ले जाने की सलाह दी। मां-बेटी उसे हल्द्वानी ले जाने को रविवार सुबह अस्पताल पहुंची तो राधा की आंखें सदा के लिए बंद हो चुकी थीं। डॉक्टर अमरजीत ने बताया कि राधा की मौत निर्जलीकरण से हुई है।
अंतिम संस्कार के लिए खोजने पड़े मृतका के परिजन
काशीपुर। राधा के दुनिया से विदा होने के बाद उसका अंतिम संस्कार कराने के लिए पुलिस को उसके परिजनों को खोजना पड़ा। आयुषी ने भी पुलिस को बताया कि वह राधा के किसी भी परिजन को नहीं जानती है, हालांकि उसे उसका घर पता है। पंचनामा भरने आई उपनिरीक्षक मंजू पवार ने दो सिपाहियों को आयुषी के साथ उसके घर भेजा। पुलिस कर्मियों के कहने पर परिजन अस्पताल आकर मृतका का शव लेने को राजी हुए। उसके एक देवर ने उसका अंतिम संस्कार कराया।
वारिस को लेकर सवाल अनुत्तरित
काशीपुर। वृद्धा अपने पीछे क्या जमा-पूजी छोड़ गई है, इसका तो पता नहीं है। पर पति के हिस्से में आया मकान जरूर उसकी मिलकियत में था। मोहल्ले में किसी को भी उसके मायके के बारे में जानकारी नहीं है। ऐसे में मकान के वारिस को लेकर सवाल उठना लाजिम है। जवाब में राधा के पौत्र का कहना है कि जो भी दादी का अंतिम संस्कार कर रहा है, वही उसकी मिलकियत का वारिस होगा।