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नो एंट्री का पालन नहीं होने के विरोध में धरने पर बैठे विधायक
ब्यूरो/अमर उजाला, ऊधमसिंह नगर
Updated Sat, 29 Oct 2016 12:00 AM IST
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ध्ारना
- फोटो : अमर उजाला
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नो एंट्री के बावजूद भारी वाहनों का आवागमन के विरोध में विधायक हरभजन सिंह चीमा ने मेयर उषा चौधरी, निगम के पार्षदों व नागरिकों के साथ टांडा उज्जैन चौराहे पर धरने पर बैठ कर जाम लगाया। इससे सैकड़ों वाहन जाम में फंस गए। बाद में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा आगे से नो एंट्री का पूरा पालन कराने के आश्वासन देने पर चीमा धरना से उठे।
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शुक्रवार को टांडा उज्जैन में विधायक हरभजन सिंह चीमा विधायक निधि से जीर्णोद्धार हुए एक मंदिर का लोकार्पण कर रहे थे। इस दौरान लोगों ने चीमा को बताया कि सुबह आठ से रात नौ बजे तक शहर के अन्य मार्ग के समान टांडा तिराहा, टांडा चौराहा, शुगर मिल रोड, चैतीमोड़ तक भारी वाहनों की नो एंट्री रहती है। लेकिन पुलिस नो एंट्री के बावजूद रुद्रपुर की तरफ से आने वाले भारी वाहन, महुआखेड़ा गंज, अली गंज मार्ग से आने वाले भारी वाहनों को टांडा चौराहा होकर एनएच-74 पर जाने देती है। इससे टांडा उज्जैन कस्बे में हर समय जाम लगे रहने से लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। लोगों ने कहा कि वाहनों की आवाजाही से हर समय दुर्घटना का खतरा बना रहता है।
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इसके बाद विधायक चीमा, मेयर उषा चौधरी और नागरिकों के साथ टांडा चौराहे पर धरने पर बैठ गए। उन्होंने कहा कि वह धरने से तभी उठेंगे जब पुलिस का कोई बड़ा अधिकारी नो एंट्री में भारी वाहनों को नहीं जाने देने का आश्वासन देगा। धरने के चलते अलीगंज मार्ग दड़ियाल मार्ग, टांड़ा तिराहा, चैती चौराहा मार्गों पर जाम लगने से वाहनों की लंबी कतारें लग गई। सैकड़ों वाहन जाम में फंस गए। इधर चीमा द्वारा धरना देकर जाम लगाने से सैकड़ों वाहन के जाम में फंसने की सूचना पर पुलिस व प्रशासन में हड़कंप मच गया। एएसपी कमलेश उपाध्याय, एसडीएम दयानंद सरस्वती, कोतवाल ओम प्रकाश शर्मा, एसएसआई लाखन सिंह घटनास्थल पहुंचे।
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अधिकारियों के काफी मशक्कत करने और भविष्य में नो एंट्री का पूरा पालन कराने के आश्वासन पर चीमा धरने से उठने को तैयार हुए। उन्होंने अधिकारियों को काफी खरीखोटी सुनाकर कहा कि नो एंट्री के समय भारी वाहनों के गुजरने से अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध हो गई है। अधिकारी इतने संवेदनहीन हो गए कि दीपावाली जैसे त्योहार पर भी जनता को यातायात में राहत नही दे रहे है। धरना देने वालों में पार्षद सर्वेश बाली, गुरविंदर चंडोक, लक्ष्मी, कुसुम, चंद्रावती, श्रीपाल जैन आदि थे।