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पांच समय की नमाज में 23 बार वज्रासन करते हैं मुसलमान : नदीम
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काशीपुर। कानूनी व जागरूकता पुस्तकों के लेखक नदीम उद्दीन (45) ने सेहत व खुशहाली के लिए नमाज रोजा जकात नाम की पुस्तक लिखी है।
इसी पुस्तक के संबंध में उन्होंने बताया कि योग का संबंध किसी एक धर्म से नहीं है। लगभग सभी धर्मों ने किसी न किसी रूप में योग को अपना रखा है। मुसलमानों ने भी 1400 साल से अधिक समय से योग अपना रखा है।
प्रत्येक मुसलमान के लिए पांच समय नमाज पढ़ना जरूरी है उसमें मुसलमान प्रतिदिन 23 बार वज्रासन करते हैं। रमजान में तराबीह पढ़ने पर यह 10 बार और अधिक हो जाता है। इसके अलावा नमाज में मुसलमानों की ओर से भू नमन आसन, वज्रासन, दक्षासान, हस्तपदासन और सूर्य नमस्कार सहित विभिन्न योगासनों की स्थितियां की जाती हैं।
नमाज के बाद तसबीह में अंगूठे से अंगुलियों को मिलाकर ध्यान मुद्रा, पृथ्वी मुद्रा, वरुण मुद्रा और आकाश मुद्रा सहित विभिन्न योग मुद्राएं भी स्वतः हो जाती हैं।
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इसी पुस्तक के संबंध में उन्होंने बताया कि योग का संबंध किसी एक धर्म से नहीं है। लगभग सभी धर्मों ने किसी न किसी रूप में योग को अपना रखा है। मुसलमानों ने भी 1400 साल से अधिक समय से योग अपना रखा है।
प्रत्येक मुसलमान के लिए पांच समय नमाज पढ़ना जरूरी है उसमें मुसलमान प्रतिदिन 23 बार वज्रासन करते हैं। रमजान में तराबीह पढ़ने पर यह 10 बार और अधिक हो जाता है। इसके अलावा नमाज में मुसलमानों की ओर से भू नमन आसन, वज्रासन, दक्षासान, हस्तपदासन और सूर्य नमस्कार सहित विभिन्न योगासनों की स्थितियां की जाती हैं।
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नमाज के बाद तसबीह में अंगूठे से अंगुलियों को मिलाकर ध्यान मुद्रा, पृथ्वी मुद्रा, वरुण मुद्रा और आकाश मुद्रा सहित विभिन्न योग मुद्राएं भी स्वतः हो जाती हैं।
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