{"_id":"6526f13a30f6f635a20d4389","slug":"more-income-directly-proptional-to-scientifically-in-dairy-rudrapur-news-c-242-1-rdp1001-4671-2023-10-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"Udham Singh Nagar News: डेयरी व्यवसाय में अधिक कमाई के लिए जरूरी हैं वैज्ञानिक तौर तरीके","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Udham Singh Nagar News: डेयरी व्यवसाय में अधिक कमाई के लिए जरूरी हैं वैज्ञानिक तौर तरीके
Thu, 12 Oct 2023 12:32 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Thu, 12 Oct 2023 12:32 AM IST
विज्ञापन
पंतनगर में हुई गोष्ठी में मौजूद शौध डॉ एएन नैन अधिष्ठाता डॉ एसपी सिंह। स्रोत आयोजक
जनरल बिपिन रावत पर्वतीय शोध शिक्षणालय की ओर से डेयरी पशुपालन पर हुई संगोष्ठी
पंतनगर। जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय स्थित जनरल बिपिन रावत पर्वतीय शोध शिक्षणालय की ओर से डेयरी पशुपालन पर संगोष्ठी आयोजित की गई। वेटरिनरी काॅलेज सभागार में आयोजित संगोष्ठी में डीन डाॅ. एसपी सिंह ने कहा कि डेयरी व्यवसाय से अधिक आय अर्जित करने के लिए वैज्ञानिक तौर तरीके जरूरी हैं। उन्होंने बताया कि संतुलित आहार से दुधारू पशुओं की उत्पादन क्षमता बढ़ाई जा सकती है।
डाॅ. बीसी मंडल, डाॅ. शिवप्रसाद ने दुधारु पशुओं में समय से गर्भधारण न करने आदि की समस्याओं पर चर्चा की। डाॅ. बीएन साही ने देशी प्रजाति के साहीवाल, गीर और थारपार्कर को भी क्षेत्र की जलवायु के लिए उपयुक्त बताया। संयोजक डाॅ. राजीव रंजन कुमार ने प्रमुख परजीवी रोगों बबेसियोसिस, थेलेरियोसिस, सर्रा, फैसियोलोसिस आदि के निदान के लिए गोबर और रक्त परीक्षण के उपाय सुझाए। वहां पर डाॅ. आरके शर्मा, निदेशक शोध डाॅ. एएस नैन, निदेशक डाॅ. एएस जीना, विशाल राणा, पूर्व विधायक नवीन दुम्का आदि थे।
विज्ञापन
पंतनगर। जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय स्थित जनरल बिपिन रावत पर्वतीय शोध शिक्षणालय की ओर से डेयरी पशुपालन पर संगोष्ठी आयोजित की गई। वेटरिनरी काॅलेज सभागार में आयोजित संगोष्ठी में डीन डाॅ. एसपी सिंह ने कहा कि डेयरी व्यवसाय से अधिक आय अर्जित करने के लिए वैज्ञानिक तौर तरीके जरूरी हैं। उन्होंने बताया कि संतुलित आहार से दुधारू पशुओं की उत्पादन क्षमता बढ़ाई जा सकती है।
डाॅ. बीसी मंडल, डाॅ. शिवप्रसाद ने दुधारु पशुओं में समय से गर्भधारण न करने आदि की समस्याओं पर चर्चा की। डाॅ. बीएन साही ने देशी प्रजाति के साहीवाल, गीर और थारपार्कर को भी क्षेत्र की जलवायु के लिए उपयुक्त बताया। संयोजक डाॅ. राजीव रंजन कुमार ने प्रमुख परजीवी रोगों बबेसियोसिस, थेलेरियोसिस, सर्रा, फैसियोलोसिस आदि के निदान के लिए गोबर और रक्त परीक्षण के उपाय सुझाए। वहां पर डाॅ. आरके शर्मा, निदेशक शोध डाॅ. एएस नैन, निदेशक डाॅ. एएस जीना, विशाल राणा, पूर्व विधायक नवीन दुम्का आदि थे।
विज्ञापन