मोबाइल छीन रहा बचपन: बदल रहा है व्यवहार...चिड़चिड़ापन और गुस्सा होने के केस बढ़े, काउंसिलिंग को आ रहे अभिभावक
मोबाइल की लत बच्चों को बीमार बना रही है। उनके व्यवहार में बदलाव आ रहा है। अनिद्रा, चिड़चिड़ापन, हिंसक होना और जरा-जरा सी बात में गुस्सा होने के मामले बढ़े हैं।
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यदि आपका बच्चा अधिक देर तक मोबाइल पर समय बिता रहा है तो सावधान होने की जरूरत है। मोबाइल की लत बच्चों को बीमार बना रही है। उनके व्यवहार में बदलाव आ रहा है। अनिद्रा, चिड़चिड़ापन, हिंसक होना और जरा-जरा सी बात में गुस्सा होने के मामले बढ़े हैं।
मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विभाग की ओपीडी में आ रहे अलग-अलग केस इस बात की तस्दीक कर रहे हैं। बच्चों की काउंसिलिंग कराने के लिए मनोचिकित्सक के पास आ रहे अभिभावक उनके व्यवहार को लेकर परेशान हैं।
मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विभाग की ओपीडी में हर महीने 50 से 60 अभिभावक अपने बच्चों को लेकर आ रहे हैं। महीने में थेरेपी के लिए आने वाले बच्चों की संख्या 20-30 से बढ़कर 50-60 तकलेकर आ रहे हैं। महीने में थेरेपी के लिए आने वाले बच्चों की संख्या 20-30 से बढ़कर 50-60 तकरहा है। 10 से 20 साल के बच्चों के व्यवहार में समय से पहले बदलाव देखा जा रहा है। इसका असर उनके शारीरिक और मानसिक विकास पर पड़ रहा है।
साल के बच्चों में अधिक देखा जा रहा है इसका असर
कोविड के दौरान ऑनलाइन पढ़ाने के लिए अभिभावकों ने बच्चे को अलग मोबाइल लेकर दिया था। स्कूल खुलने के बाद बच्चे से फोन वापस ले लिया लेकिन बच्चा मोबाइल लेने के लिए जिद करने लगा और चिड़चिड़ापन का व्यवहार करने लगे। स्कूल से ही बेवजह लड़ाई और बहस की शिकायतें आई तो अभिभावक उसे मनोचिकित्सक के पास लेकर आए।
अभिभावक हर महीने बच्चों की करा रहे काउंसिलिंग
एक बड़े निजी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे के माता-पिता नौकरी की वजह से घर से बाहर रहते हैं और बच्चे को समय नहीं दे पाते हैं। बच्चे से संपर्क करने के लिए दिया गया मोबाइल ने ही उसकी सेहत बिगाड़ दी। बच्चा चिड़चिड़ा, जिद्दी हो गया और स्कूल से भी शिकायतें आनी लगी। इसके बाद चितिंत अभिभावक उसे मनोचिकित्सक के पास लेकर आए।
कई माता-पिता अक्सर स्कूल के प्रदर्शन में गिरावट व बच्चे के उत्तेजित स्वभाव की शिकायतें लेकर आते हैं। नियमित मनोरोग ओपीडी में इन मुद्दों की पहचान, निदान और उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। एक समग्र दृष्टिकोण प्रदान करके जिसमें बच्चे, माता-पिता और स्कूल शामिल हों। हम इन चुनौतियों का प्रभावी ढंग से समाधान कर सकते हैं। जिससे बच्चों को शैक्षणिक और भावनात्मक रूप से आगे बढ़ने में सक्षम बनाया जा सके। - डॉ. ईश कुमार डल्ला, मनोरोग चिकित्सक, मेडिकल कॉलेज
ये आ रही हैं शिकायतें
- उत्तेजित व्यवहार और शैक्षिक संघर्ष गंभीर समस्या बनकर सामने आ रहा है।
- वर्चुअल दुनिया में रहने के कारण बच्चे वास्तविकता से दूर हो रहे हैं।
- ऐसे में बच्चे सामाजिक माहौल में घुल मिल नहीं पा रहे हैं
- वे छोटी छोटी बातों में गुस्सैल स्वभाव, गालियां और मारपीट करने लगते हैं।
- उनकी पढ़ाई पर असर पढ़ रहा है। मासिक टेस्ट में कम नंबर आ रहे हैं।
- छोटी-छोटी बातों पर अन्य बच्चों से लड़ने की शिकायतें आ रही हैं।
ये करें उपाय
- पारिवारिक माहौल में सुधार
- बच्चे के साथ अधिक समय व्यतीत करना
- घर का किसी प्रकार के नशे के प्रभाव में ना हो
- अपना समय बचाने के लिए बच्चे को फोन न दें
- बच्चों का खेलों में रुझान बढ़ाएं
- सीमित समय तक फोन का उपयोग करना सिखाएं