{"_id":"5ee4c64a8ebc3e42ec149d01","slug":"meeting-of-forest-officials-of-uttarakhand-and-up-regarding-tiger-conservation188","type":"story","status":"publish","title_hn":"उत्तराखंड - यूपी के वन अधिकारियों ने किया मंथन, कैसे हो बाघों का संरक्षण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
उत्तराखंड - यूपी के वन अधिकारियों ने किया मंथन, कैसे हो बाघों का संरक्षण
विज्ञापन
खटीमा के सुरई रेंज के यूपी सीमा पर विश्राम गृह में उत्तराखंड व यूपी वन अधिकारी एवं कर्मचारियों को दिशा निर्देश देते पश्चिमी वृत वन संरक्षक डॉ. पराग मधुकर धकाते
- फोटो : AMAR UJALA
खटीमा। बाघ संरक्षण को लेकर उत्तराखंड एवं यूपी के वन अधिकारियों ने समन्वय बैठक आयोजित की। जिसमें उत्तराखंड की सुरई वन रेंज और यूपी की महोव वन रेंज के वन कर्मियों द्वारा बॉर्डर के जंगलों में संयुक्त गश्त और दोनों राज्यों के वन अधिकारियों द्वारा हर 15 दिन में संयुक्त गश्त करने का निर्णय लिया गया। यूपी बॉर्डर से लगी सुरई वन रेंज के विश्राम गृह में पश्चिमी वृत के वन संरक्षक पराग मधुकर धकाते एवं तराई पूर्वी वन प्रभाग के डीएफओ नीतीश मणि त्रिपाठी ने यूपी के पीलीभीत टाइगर रिजर्व के डायरेक्टर और पीलीभीत के डीएफओ के साथ बाघ संरक्षण और वनों के अवैध कटान पर लगाम लगाने के लिए समन्वय बैठक की। बैठक के बाद दोनों राज्यों के वन कर्मियों द्वारा उत्तराखंड और यूपी की सीमा के जंगलों में संयुक्त गश्त की। सुरई वन रेंज के गेस्ट हाउस में यूपी और उत्तराखंड के पदाधिकारियों की बैठक में बाघ की सुरक्षा के लिए आपसी सामंजस्य बनाने को लेकर चर्चा की।
विज्ञापन
विज्ञापन
बैठक में निर्णय लिया गया है कि दोनों तरफ के वन अधिकारी आपस में समन्वय बनाते हुए सूचनाओं का आदान प्रदान करेंगे और साथ ही हर 15 दिन में दोनों राज्यों के वन कर्मी संयुक्त गश्त करेंगे।
वन संरक्षक डॉ पराग मधुकर धकाते ने पत्रकारों से रूबरू होते कहा कि यूपी पीलीभीत टाइगर रिजर्व में लगभग 40 से 50 टाइगर है तथा उतने ही टाइगर सुरई वन रेंज में हैं। यूपी और उत्तराखंड की सीमा के दोनों तरफ लगभग 100 की संख्या में टाइगर निवास करते हैं। टाइगरों को बचाने के लिए यूपी और उत्तराखंड के वन अधिकारियों म़े आपसी तालमेल जरूरी है।
विज्ञापन
विज्ञापन