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रेलवे विभाग के नोटिस जारी होने से किसानों में आक्रोश
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खटीमा में बैठक करते भाकियू संयुक्त मोर्चा पदाधिकारी। संवाद
- फोटो : KHATIMA
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खटीमा। मंडी समिति सभागार में संयुक्त किसान मोर्चा की हंगामेदार बैठक हुई। बैठक में वक्ताओं ने किसान आंदोलन के दौरान ट्रेन रोकने के एवज में केवल क्षेत्र के किसानों पर हो रही कार्रवाई पर आक्रोश जताया। वक्ताओं ने इस कार्रवाई को व्यक्तिगत द्वेष बताया। किसानों ने एकमत होकर 31 जनवरी तक किसानों के मुकदमे वापस नहीं लेने पर सड़कों पर उतरने की चेतावनी दी।
भाकियू जिलाध्यक्ष गुरसेवक सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में वक्ताओं ने रेलवे विभाग की ओर से क्षेत्र के किसानों को जारी नोटिस पर आक्रोश जताया। कहा कि रेल रोको अभियान देश में चला लेकिन कार्रवाई सिर्फ खटीमा की किसानों पर हो रही है। भाकियू जिलाध्यक्ष सिंह, हरप्रीत सिंह, अवतार सिंह एवं जगविंदर सिंह पप्पू ने कहा कि रेलवे विभाग की ओर से रेल रोकने वाले किसानों को नोटिस जारी किए है।
वक्ताओं ने कहा कि सरकार नोटिस की आड़ में किसानों का मानसिक उत्पीड़न कर रही है। किसान आंदोलन के बाद सरकार लिखित समझौते का अनुपालन नहीं कर रही है। लिखित समझौते में मुकदमे वापस लेने, एमएसपी के लिए कमेटी गठित करने, लखीमपुर खीरी कांड के दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने, शहीद किसानों को मुआवजा देना तय था लेकिन एक मामले में भी कार्रवाई नहीं हुई।
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वक्ताओं ने 31 जनवरी तक किसानों को जारी नोटिस प्रक्रिया को बंद कर मुकदमे वापस नहीं लिए जाते हैं तो संयुक्त मोर्चा एकमत होकर भाजपा सरकार का विरोध करेगा। वक्ताओं ने मुकदमे की आड़ में किसानों का मानसिक एवं आर्थिक शोषण बंद न होने पर व्यापक आंदोलन की चेतावनी दी। वहां हीरा सिंह संधू, लखविंदर सिंह, प्रीतपाल सिंह, दलजीत सिंह, सुधीर चौधरी, हरनाम सिंह, गुरभजन सिंह आदि थे।
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भाकियू जिलाध्यक्ष गुरसेवक सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में वक्ताओं ने रेलवे विभाग की ओर से क्षेत्र के किसानों को जारी नोटिस पर आक्रोश जताया। कहा कि रेल रोको अभियान देश में चला लेकिन कार्रवाई सिर्फ खटीमा की किसानों पर हो रही है। भाकियू जिलाध्यक्ष सिंह, हरप्रीत सिंह, अवतार सिंह एवं जगविंदर सिंह पप्पू ने कहा कि रेलवे विभाग की ओर से रेल रोकने वाले किसानों को नोटिस जारी किए है।
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वक्ताओं ने कहा कि सरकार नोटिस की आड़ में किसानों का मानसिक उत्पीड़न कर रही है। किसान आंदोलन के बाद सरकार लिखित समझौते का अनुपालन नहीं कर रही है। लिखित समझौते में मुकदमे वापस लेने, एमएसपी के लिए कमेटी गठित करने, लखीमपुर खीरी कांड के दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने, शहीद किसानों को मुआवजा देना तय था लेकिन एक मामले में भी कार्रवाई नहीं हुई।
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वक्ताओं ने 31 जनवरी तक किसानों को जारी नोटिस प्रक्रिया को बंद कर मुकदमे वापस नहीं लिए जाते हैं तो संयुक्त मोर्चा एकमत होकर भाजपा सरकार का विरोध करेगा। वक्ताओं ने मुकदमे की आड़ में किसानों का मानसिक एवं आर्थिक शोषण बंद न होने पर व्यापक आंदोलन की चेतावनी दी। वहां हीरा सिंह संधू, लखविंदर सिंह, प्रीतपाल सिंह, दलजीत सिंह, सुधीर चौधरी, हरनाम सिंह, गुरभजन सिंह आदि थे।