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अरुणिका की बढ़ रही महक
कुंदन श्ााह अमर उजाला ब्यूरो काशीपुर
Updated Mon, 30 Jul 2018 12:33 AM IST
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Mango
- फोटो : amar ujala
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घर के बाग और किचन गार्डन में औद्यानिकी परीक्षण एवं प्रशिक्षण केंद्र काशीपुर में तैयार आम की लाल रंग की शोधित प्रजातियों के पौध की भारी डिमांड है। यहां विकसित अरुणिका आम प्रजाति नेे लखनऊ और चंडीगढ़ आम महोत्सव में अवार्ड जीता है।
राज्य सरकार के आलू फार्म स्थित औद्यानिकी परीक्षण एवं प्रशिक्षण केंद्र में आम की प्रजातियों पर अनुसंधान से नए रूप-रंग और गुणों वाली नई प्रजातियां तैयार की जाती हैं। सफल होने पर उनकी विभिन्न विधियों से नई पौध तैयार की जाती है और किसानों को दी जाती है। उपनिदेशक उद्यान विभाग उत्तराखंड डॉ. ब्रजेश गुप्ता ने बताया कि औद्यानिकी परीक्षण एवं प्रशिक्षण केंद्र आलू फार्म काशीपुर में आम की तकरीबन 40 प्रजातियां हैं, लेकिन अनुसंधान शालाओं में तैयार लाल रंग की प्रजातियों की दूसरे प्रदेशों से सरकारी व गैर सरकारी डिमांड है। डॉ. गुप्ता ने बताया कि इसी माह लखनऊ और चंडीगढ़ में आम महोत्सव का आयोजन हुआ है। लखनऊ महोत्सव में आलू फार्म नर्सरी में तैयार अरुणिका को लेकर खटीमा निवासी किसान नरेंद्र के अपने बाग में लगाया था। नरेंद्र के आम अरुणिका को लखनऊ महोत्सव में अवार्ड मिला है।
चंडीगढ़ आम महोत्सव में भी आलू फार्म काशीपुर के अरुणिका आम को श्रेष्ठ पुरस्कार मिला है। डॉ. गुप्ता ने बताया कि काशीपुर नर्सरी में केंद्रीय अनुसंधान केंद्र लखनऊ की अरुणिका, अर्का अरुणा, भारतीय अनुसंधान परिषदों के पूसा सूर्या, पूसा प्रतिभा, पूसा पीतांबर, पूसा श्रेष्ठ, पूसा लालिमा, अर्का नील किरण, अर्का अनमोल, अर्का पुनीत व केसर प्रजातियों की पौध तैयार की गई। डॉ. गुप्ता ने बताया कि अनुसंधान वाली लाल रंग की प्रजातियों के आम प्रति वर्ष लगते हैं। यह खाने में काफी स्वादिष्ट होते हैं। गुठलियां पतली और गूदा रेसा रहित, महकदार स्वादिष्ट होते हैं। पैदावार भी भरपूर होती है। यह खूबसूरत होते हैं। प्रजातियों के अनुसार लाल, लालिमा बैगनी, सिंदूरी, सूर्य जैसे सुनहरा चमकदार रंगों के सुंदर होते है।
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शुगर के मरीज भी खा सकते हैं आम
काशीपुर। आम के सीजन में शुगर के रोगी आम खाने को तरसते हैं। लेकिन आम अधिक मीठे होने से नहीं खाते हैं। लेकिन भारतीय अनुसंधान केंद्र बंगलुरू द्वारा तैयार पूसा सूर्या आम में मिठास काफी कम है। डॉ. ब्रजेश गुप्ता ने बताया कि पूसा सूर्या में शुगर की मात्रा टीएसएस-18 है। यह आम देखने में भी सुंदर सूर्य जैसे सुनहरा लालिमा रंग के होते है।
राज्य सरकार के आलू फार्म स्थित औद्यानिकी परीक्षण एवं प्रशिक्षण केंद्र में आम की प्रजातियों पर अनुसंधान से नए रूप-रंग और गुणों वाली नई प्रजातियां तैयार की जाती हैं। सफल होने पर उनकी विभिन्न विधियों से नई पौध तैयार की जाती है और किसानों को दी जाती है। उपनिदेशक उद्यान विभाग उत्तराखंड डॉ. ब्रजेश गुप्ता ने बताया कि औद्यानिकी परीक्षण एवं प्रशिक्षण केंद्र आलू फार्म काशीपुर में आम की तकरीबन 40 प्रजातियां हैं, लेकिन अनुसंधान शालाओं में तैयार लाल रंग की प्रजातियों की दूसरे प्रदेशों से सरकारी व गैर सरकारी डिमांड है। डॉ. गुप्ता ने बताया कि इसी माह लखनऊ और चंडीगढ़ में आम महोत्सव का आयोजन हुआ है। लखनऊ महोत्सव में आलू फार्म नर्सरी में तैयार अरुणिका को लेकर खटीमा निवासी किसान नरेंद्र के अपने बाग में लगाया था। नरेंद्र के आम अरुणिका को लखनऊ महोत्सव में अवार्ड मिला है।
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चंडीगढ़ आम महोत्सव में भी आलू फार्म काशीपुर के अरुणिका आम को श्रेष्ठ पुरस्कार मिला है। डॉ. गुप्ता ने बताया कि काशीपुर नर्सरी में केंद्रीय अनुसंधान केंद्र लखनऊ की अरुणिका, अर्का अरुणा, भारतीय अनुसंधान परिषदों के पूसा सूर्या, पूसा प्रतिभा, पूसा पीतांबर, पूसा श्रेष्ठ, पूसा लालिमा, अर्का नील किरण, अर्का अनमोल, अर्का पुनीत व केसर प्रजातियों की पौध तैयार की गई। डॉ. गुप्ता ने बताया कि अनुसंधान वाली लाल रंग की प्रजातियों के आम प्रति वर्ष लगते हैं। यह खाने में काफी स्वादिष्ट होते हैं। गुठलियां पतली और गूदा रेसा रहित, महकदार स्वादिष्ट होते हैं। पैदावार भी भरपूर होती है। यह खूबसूरत होते हैं। प्रजातियों के अनुसार लाल, लालिमा बैगनी, सिंदूरी, सूर्य जैसे सुनहरा चमकदार रंगों के सुंदर होते है।
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शुगर के मरीज भी खा सकते हैं आम
काशीपुर। आम के सीजन में शुगर के रोगी आम खाने को तरसते हैं। लेकिन आम अधिक मीठे होने से नहीं खाते हैं। लेकिन भारतीय अनुसंधान केंद्र बंगलुरू द्वारा तैयार पूसा सूर्या आम में मिठास काफी कम है। डॉ. ब्रजेश गुप्ता ने बताया कि पूसा सूर्या में शुगर की मात्रा टीएसएस-18 है। यह आम देखने में भी सुंदर सूर्य जैसे सुनहरा लालिमा रंग के होते है।