ऐेसे तो घाटे से उबर चुका परिवहन निगम
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यात्री रोडवेज में बसों के इंतजार में खड़े रहते हैं लेकिन रोडवेज बसों की कमी के चलते यात्रियों को फजीहतें उठानी पड़ रही है। सबसे ज्यादा परेशानी का सामना रुद्रपुर जाने वाले यात्रियों को करना पड़ता है। ऐसे में एकाध बस आने पर यात्रियों को सीट घेरने के लिए धक्का मुक्की का सामना करना पड़ता है। कई बार इसी धक्का मुक्की में जेबकतरे आसानी से अपना काम कर ले जाते है। विभागीय अधिकारी कोई हल निकालने के बावजूद एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाते रहते हैं।
उत्तराखंड परिवहन निगम का घाटे का रोना तो लगा रहता है। लेकिन निगम को यह घाटा यात्रियों की कमी से नहीं बल्कि पर्याप्त संख्या में बसों की उपलब्धता नहीं होने से हो रहा है। खासतौर पर उन रोडवेज बस अड्डो की बड़ी बुरे हालत हैं जहां पर बसों की खासी कमी है। इतना ही नहीं निगम खटारा बसों से आय बढ़ाने की दूरदर्शी सोच रखा हुआ है। यहां बता दे कि काशीपुर से सबसे अधिक यात्री दिल्ली, देहरादून और रुद्रपुर को जाते है।
दिल्ली और देहरादून रूटों की स्थिति तो ठीक है। लेकिन जिला मुख्यालयों को पहुंचने के लिए यात्रियों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। बताया जाता है कि रुद्रपुर जाने के लिए साढ़े नौ बजे तक तो बसें हैं। लेकिन इसके बाद बस मिलना मुश्किल हो जाता है। कुछ यही स्थिति शाम की भी है। ऐसे में यात्रियों को लंबे रूट की बसों में सीट घेरने के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ती है। आलम यह हो जाता है कि कई बार यात्री खड़े-खड़े रुद्रपुर के डेढ़ घंटे का सफर करने को मजबूर हो जाते हैं। सोमवार को तो रुद्रपुर की बसें नहीं मिलने पर यात्री परेशान नजर आए। कुछ यहीं हाल मंगलवार को भी रहा। कई यात्रियों ने यह तक कह डाला की हंगामा करना पड़ेगा, तभी रोडवेज की स्थितियां ठीक हो सकेंगी।